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शिमला –रामपुर तहसील के दुर्गम गांव कुंगल बाल्टी से लाकर 6 दिसंबर को मशोबरा के नारी सेवा सदन में रखी गई गंभीर रूप से विकलांग अनीतू(25) को अब कुल्लू के एक स्वयंसेवी संस्था के आश्रम में भेज दिया गया है।वहां जांच के बाद उसे गंभीर स्त्रीरोगों से ग्रस्त पाया गया जबकि दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में डॉक्टरों ने कहा था कि उसे कोई बीमारी नहीं है।

कुल्लू के कलाथ में आदर्श मानसिक विकलांग महिला संस्थान में अनीतू अब स्थायी तौर पर रहेगी। उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव, जिन्होंने स्वयं ननखड़ी उप तहसील के दुर्गम गांव कुंगल बाल्टी जाकर अनीतू के मानवाधिकार उल्लंघन का मामला उठाया था, ने बताया कि मीडिया के दबाव में आकर सरकार ने उसे शिमला तो लाई लेकिन ठीक से उसके स्वास्थ्य की जांच नहीं की गई। विकलांगता मामले देखने वाले एससी, ओबीसी एवं अल्पसंख्यक विभाग ने उसे कुल्लू के एनजीओ के हवाले कर दिया जहाँ डॉक्टरों ने बताया कि वह गंभीर स्त्री रोगों से ग्रस्त है।

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आदर्श मानसिक विकलांग महिला संस्थान में सरकार अनीतू को मिलाकर कुल 32 मनोरोगी या मंदबुद्धि महिलाओं को भेज चुकी है। जून में 28 ऐसी महिलाएं नारी सेवासदन से और तीन बसंतपुर के वृद्ध आश्रम से भेजी गयीं थी। अजय श्रीवास्तव की जनहित याचिका पर हाईकोर्ट ने 4 जून 2015 को सरकार को आदेश दिए थे कि वह बेसहारा मनोरोगी या मंदबुद्धि महिलाओं के लिए अलग नारी सेवा सदन बनाए और सामान्य महिलाओं के साथ उन्हें न रखा जाए।

अजय श्रीवास्तव ने बताया कि वे खुद कुल्लू के इस संस्थान को देखकर आये हैं। यह एनजीओ बहुत सेवा भावना से कार्य कर रहा है। लेकिन उसके पास साधनों की कमी है और सरकार ने अलग आश्रम बनाने की बजाए 32 गंभीर रूप से बीमार मनोरोगी और मंदबुद्धि महिलाओं को बहुत सस्ते में उसके पास छोड़ कर पल्ला झड़ लिया। एससी, ओबीसी एवं अल्पसंख्यक विभाग उस एनजीओ को प्रति महिला बहुत कम राशि देता है जिससे उन महिलाओं की उचित देखभाल के लिए कर्मचारी रखना, नियमित रूप से स्त्रीरोग विशेषज्ञ, मनोचिकित्सक और फिजियोथेरेपिस्ट की सेवायें लेना और अन्य खर्च उठाना संभव ही नहीं है। हालांकि विभाग के निदेशक समय समय पर वहां का दौरा करते हैं पर उन्होंने इस तरफ कोई ध्यान नहीं दिया।

अजय श्रीवास्तव ने कहा कि कुल्लू के आदर्श मानसिक विकलांग महिला संस्थान में आवश्यक सुविधाएं नहीं है। सभी मनोरोगी महिलाओं को जमीन पर सुलाया जाता है क्योकि बेड लगाने के लिए स्थान उपलब्ध नहीं है। उनके लिए उचित शौचालय और सफाई कर्मचारियों की भारी कमी है। ऐसे में हाईकोर्ट के फैसले की भावना का उल्लंघन हो रहा है। उन्होंने सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की सचिव अनुराधा ठाकुर से स्वयं कुल्लू जाकर हालात देखने और इस मामले में तुरंत कदम उठाने की मांग की।

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