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वीडियो: बिलासपुर की भोली पंचायत खोल रही विकास की डींगें हांकने वाली सरकार की पोल, लोग जान को जोखिम में डालकर पार कर रहे आली खड्ड
बिलासपुर– हिमाचाल प्रदेश के जिला बिलासपुर के अन्तर्गत आने वाले जुखाला क्षेत्र से कुछ ही दूरी पर स्थित गाँव भोली को एक सम्पर्क मार्ग गसौड़ से जोड़ता है। यह मार्ग लगभग 20 वर्ष पहले बना है। यह कोई बहुत ही दूर पार का इलाका नहीं है यह बिलासपुर मुख्यालय से महज़ 25 किलोमीटर दूरी पर स्थित है।
जंहा प्रदेश सरकार विकास की डींगें हाँकती नहीं थकती, वास्तविक स्थिति इस क्षेत्र में देखी जा सकती है। इतना समय बीत जाने के बाद भी इस सड़क में विकास के नाम पर सरकार एक पत्थर तक नहीं लगा पायी है और यह सड़क पक्की नहीं हो पाई है।
इस सड़क पर बीच में आली खड्ड पड़ती है जो बरसात के मौसम में पानी के तेज़ बहाव के कारण अपने रूद्र रूप में होती है। इस खड्ड को पार करने के लिए किसी भी तरह की कोई व्यवस्था नहीं है और न ही यहां कोई पुल है।
वीडियो
लोगों को मजबूर होकर अपने कपड़े और जूते उतारकर खड्ड को पार करना पड़ता है। बहुत ही शर्म की बात है कि 21वीं सदी में भी यह नजारा देखने को मिल रहा है।
स्थानीय लोगों को पुल ना होने के कारण अपनी जान को जोखिम मे डालकर यह खड्ड पार करनी पड़ती है। जैसा की वीडियो के माध्यम से भी देखा जा सकता है।
हैरानी की बात है कि यहां पहले भी कई लोग काल का ग्रास बन चुके है। एक स्थानीय बजुर्ग ने बताया कि हमारे सामने यहां तीन से चार लोग बहकर मर चुके हैं, लेकिन फिर भी आज दिन तक यहां सरकार पुल नहीं बनवा पायी है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि उन्हें अपनी मूलभूत जरूरतों को पूरा करने के लिए गसौड़ ही जाना पड़ता है क्योंकि हॉस्पिटल, बैंक, डाकघर, स्कूल, कॉलेज जैसी सुविधायें और बाज़ार वंही स्थित हैं।
यहां तक की उन्हें नमक लाने के लिए भी गसौड़ जाना ही पड़ता हैं। बच्चों को स्कूल और कॉलेज जाने के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है। प्रतिदिन 500 से ज्यादा लोग इस खड्ड को पार करते है।
कोरोना का टिका लगवाने के लिए भी आली खड्ड को पार करना पड़ता है। लोगों का कहना है कि अगर कोई व्यक्ति बीमार भी हो जाता है तो उसे हॉस्पिटल ले जाने के लिए भी कोई सुविधा नहीं है।
एक मात्र कच्ची सड़क से न कोई बस की सुविधा है,और सड़क में इतने गड्डे बने है कि निजी वाहन या टैक्सी ले जाना भी मुश्किल हो जाता है।
खड्ड में पानी का प्रवाह ज्यादा होने के कारण अस्पताल तक पहुँचने के लिए 10 किलोमीटर दूर से जाना पड़ता है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इस सड़क को विधायक प्राथमिकता में भी डाला गया है लेकिन इस पर अभी तक कोई गौर नहीं किया गया है।
स्थानीय लोगों ने कहा कि पुल निर्माण व सड़क को पक्का करने के लिए गांव वालो ने अपनी जमीन भी चार वर्ष पहले ही लोक निर्माण विभाग (PWD) के नाम करवा दी थी, लेकिन अभी तक कोई भी निर्माण कार्य नहीं किया गया है।
लोगों का कहना है कि वह अपनी इस समस्या को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों डी.सी, एस.डी.एम यहाँ तक की मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री को भी लिखित में अर्जियां दे चुके है लेकिन अभी तक उन्हें केवल आश्वासन ही मिलते रहे है।
बार-2 मांग करने पर भी अभी तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। स्थानीय लोगों ने समय-2 पर जो भी प्रार्थना पत्र डीसी,मुख्यमंत्री,प्रधानमंत्री को भेजे है उनकी प्रतियां हिमाचल वॉचर के साथ साझा की हैं।
इस गांव मे 80% अनुसूचित जाति के लोग निवास करते हैं। यह संपर्क मार्ग न केवल भोली बल्कि पनसोडा, कोट, पहलवाना,ढाडस आदि गावों, जिनकी जनसंख्या 3000 से अधिक है, को गासौड़ से जोड़ता है।
स्थानीय लोगों ने सरकार से मांग की है कि शीघ्र अतिशीघ्र उनकी इस समस्या का समाधान किया जाये।
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LSD तस्करी मामले में अब हरियाणा से सप्लायर गिरफ्तार, आरोपी संदीप सप्लायर को बदले में देता था गांजा
शिमला: बीते दिनों न्यू शिमला क्षेत्र में पुलिस ने दो आरोपियों को करीब एक करोड़ रुपये की LSD (Lysergic Acid Diethylamide) ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया था। जिसमें एक युवक और युवती शामिल थे। पुलिस ने आरोपियों के पास से 11.57 ग्राम एलएसडी और 562 स्टैंप साइज स्ट्रिप्स बरामद की थी। पुलिस ने अब इस मामले में सप्लायर को गुरुग्राम (हरियाणा) से गिरफ्तार कर लिया है।
पुलिस के अनुसार आरोपी की पहचान नैवियल हैरिसन (27) ,केरल के रूप में हुई है। पुलिस ने जानकारी देते हुए कहा कि जांच के दौरान सामने आया की आरोपी नैवियल हैरिसन और आरोपी संदीप शर्मा काफी समय से एक दूसरे के संपर्क में थे और LSD की तस्करी कर रहे थे। पुलिस ने बताया कि आरोपी नैवियल हैरिसन और आरोपी संदीप शर्मा सिर्फ व्हॉटस्एप कॉल के माध्यम से बातचीत करते थे। आरोपी संदीप नैवियल हैरिसन को बदले में गांजा उपलब्ध करवाता था।
एएसपी हेडक्वार्टर अभिषेक ने मामले की पुष्टी की है। उन्होंने बताया कि मामले में आगामी जांच जारी है।
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हिमाचल प्रदेश में फिर बदलेगा मौसम, 15 और 16 मार्च को बारिश और तेज हवाओं का पूर्वानुमान
शिमला: हिमाचल प्रदेश में एक बार फिर मौसम करवट लेने वाला है। मौसम विभाग के अनुसार 15 और 16 मार्च के बीच प्रदेश के कई क्षेत्रों में मौसम खराब रहने की संभावना है। इस दौरान बिजली चमकने, तेज हवाएं चलने और बारिश का पूर्वानुमान जताया गया है।
विभाग के मुताबिक 17 और 18 मार्च को मौसम साफ रहने की उम्मीद है। हालांकि विभाग के मुताबिक 15 से 18 मार्च के बीच प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में मौसम के खराब रहने के भी आसार हैं। इस दौरान अधिकतर स्थानों पर बारिश और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी हो सकती है।
मौसम विभाग का कहना है कि 14 मार्च की रात से पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने की संभावना है, जिसके प्रभाव से प्रदेश में तापमान गिरावट दर्ज की जा सकती है।
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शिमला में 1 करोड़ रुपये का LSD बरामद, जानिए भारत में क्यों प्रतिबंधित है यह नशा और क्या है सजा ?
शिमला: बुधवार को पुलिस ने न्यू शिमला क्षेत्र में एक भवन से करीब एक करोड़ रुपये की LSD (lysergic acid diethylamide) ड्रग्स बरामद की है। बता दें कि भारत में एलएसडी प्रतिबंधित है। एलएसडी रखना, बेचना या तस्करी करना एक गंभीर अपराध है और मात्रा के आधार पर इसकी सजा तय होती है।
मामले में पुलिस ने दो लोगों को गिरफ्तार किया है जिसमें एक युवक और युवती शामिल है। आरोपियों की पहचान प्रिया शर्मा, निवासी सिरमौर, संदीप शर्मा, निवसी पंजाब (मोगा) को रुप में हुई है। पुलिस ने बताया कि दोनों आरोपियों के पास कुल 11.57 ग्राम एलएसडी ड्रग्स बरामद की गई है। दोनों आरोपियों को खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।
पुलिस ने बताया कि हमें गुप्त सूचना मिली थी कि राजधानी में एलएसडी की तस्करी हो रही है। सूचना के आधार पर पुलिस ने एक टीम का गठन किया और न्यू शिमला के हिम निवास में एक कमरे में ठहरे युवक और युवती की तालाशी ली। इस दौरान पुलिस ने आरोपियों के पास से एलएसडी के साथ 562 स्टैंप साइज सिट्रप्स बरामद किए। एएसपी हेडक्वार्टर अभिषेक ने मामले की पुष्टी करते हुए कहा कि आगामी जांच जारी है।
क्या होता है LSD ?
एलएसडी (Lysergic Acid Diethylamide) एक बेहद शक्तिशाली हैलूसिनोजेनिक (मतिभ्रम पैदा करने वाला) नशीला पदार्थ है, जो दिमाग की कार्यप्रणाली को प्रभावित करता है। यह एक सिंथेटिक रासायनिक ड्रग है, जो मस्तिष्क में मौजूद सेरोटोनिन रिसेप्टर्स पर असर डालकर व्यक्ति की सोच, भावनाओं और वास्तविकता की अनुभूति को बदल देता है। एलएसडी बहुत कम मात्रा में भी तेज असर दिखाता है। इसे आमतौर पर छोटे कागज़ के टुकड़ों (ब्लॉटिंग पेपर), टैबलेट, जेल टैब या तरल बूंदों के रूप में बेचा जाता है।
यह कैसे बनता है?
LSD एक सिंथेटिक (कृत्रिम) नशा है जिसे ‘लाइसर्जिक एसिड’ से बनाया जाता है। यह एसिड ‘अर्गट’ (Ergot) नामक एक फंगस (कवक) में पाया जाता है, जो राई और अन्य अनाजों पर उगता है। यह नशा इतना शक्तिशाली होता है कि इसकी खुराक माइक्रोग्राम (mcg) जैसे बेहद सूक्ष्म स्तर पर मापी जाती है।
सेवन करने पर क्या होता है?
एलएसडी का सेवन करने के बाद इसका असर आमतौर पर 30 से 60 मिनट में शुरू हो जाता है और 8 से 12 घंटे या उससे अधिक समय तक रह सकता है। इस दौरान व्यक्ति को एक तरह का “ट्रिप” अनुभव होता है, जिसमें उसकी वास्तविकता को समझने की क्षमता बदल जाती है।
सेवन करने वाले व्यक्ति को निम्न अनुभव हो सकते हैं:
- ऐसी चीजें देखना या सुनना जो वास्तव में मौजूद नहीं होतीं (हैलूसिनेशन)
- समय और स्थान की समझ में बदलाव
- भावनाओं में अचानक परिवर्तन
- वास्तविकता और कल्पना के बीच फर्क समझने में कठिनाई
- अत्यधिक डर, घबराहट और मानसिक तनाव हो सकता है।
- दिल की धड़कन तेज होना, शरीर का तापमान बढ़ना, हाई ब्लड प्रेशर, आंखों की पुतलियों का फैलना, मतली, भूख न लगना, शुगर बढ़ना, नींद न आना, मुंह सूखना और शरीर में कंपन या दौरे पड़ना।
भारत में एलएसडी के खिलाफ कानून
भारत में एलएसडी पूरी तरह प्रतिबंधित है और इसके खिलाफ कड़े प्रावधान Narcotic Drugs and Psychotropic Substances Act (NDPS Act), 1985 के तहत लागू हैं। इस कानून के तहत एलएसडी का उत्पादन, खरीद-फरोख्त, परिवहन, भंडारण या सेवन करना अपराध है।
सजा का प्रावधान
| मात्रा | सजा |
|---|---|
| छोटी मात्रा | अधिकतम 1 वर्ष की जेल या ₹10,000 तक जुर्माना |
| मध्यम मात्रा | 10 वर्ष तक की जेल और ₹1 लाख तक जुर्माना |
| व्यावसायिक मात्रा | 10 से 20 वर्ष तक कठोर कारावास और ₹1–2 लाख तक जुर्माना |
दोबारा अपराध करने पर सजा और भी कठोर हो सकती है।
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