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शिमला की जुड़वां बहनों से बंधवा मजदूरी और यौन शोषण का मामला: 1 गिरफ्तार, 3 दिन के पुलिस रिमांड पर

shimla twin sister bonded labor

उक्त महिला ने शरीर की मालिश कराते समय एक बच्ची को इतनी जोर से लात मारी कि वह गंभीर रूप से घायल हो गई उसे पहले पांवटा साहिब और उसके बाद में देहरादून के अस्पताल में भर्ती करना पड़ा।

सिरमौर -सिरमौर जिले के पांवटा साहिब मैं शिमला जिले के दूरदराज के क्षेत्र कुपवी की दो नन्हीं बच्चियों को बंधुआ मजदूर बनाने और मारपीट करने के मामले में एक नया मोड़ ले लिया है ।एक बच्ची के इस बयान के बाद कि विजय भल्ला नाम का व्यक्ति उसके उसका यौन शोषण करता था पुलिस ने बाल यौन अपराध रोकथाम कानून की धारा 8 के तहत उसे गिरफ्तार कर लिया है। पावटा साहिब पुलिस ने उसे चीफ ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट की अदालत में पेश किया। अदालत ने अभियुक्त को 3 दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया है। उधर उसकी पत्नी फरार है।

दोनों बच्चियां अभी शिमला के इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में हैं जिनमें से एक बयान देने की स्थिति में नहीं है।

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उल्लेखनीय है की 21 फरवरी को उमंग फाउंडेशन ने यह मामला मीडिया के माध्यम से उजागर किया था और उसके बाद ही पुलिस ने हरकत में आई। पहले पुलिस ने बच्चियों के साथ मारपीट और शारीरिक श्रम कराने के आरोप में केस दर्ज किया था। दोनों बच्चियां पौंटा साहिब मैं विजय भल्ला के घर व शोरूम में घरेलू काम करती थी। उनके पिता ने इस आश्वासन पर उन्हें वहां भेजा था कि बच्चियों को स्कूल में पढ़ाया जाएगा और हर प्रकार की सुविधा दी जाएगी। लेकिन बच्चियों का आरोप है की विजय भल्ला की पत्नी उनसे सुबह 5 बजे से रात 11 बजे तक काम कराती थी और पिटाई भी करती थी।

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उन्हें कभी भी स्कूल नहीं भेजा गया। बच्चियों ने वहां 11 महीने तक काम किया और इस दौरान उन्हें अपने माता-पिता से फोन पर बात नहीं करने दी गई। 16 फरवरी को उक्त महिला ने शरीर की मालिश कराते समय एक बच्ची को इतनी जोर से लात मारी कि वह गंभीर रूप से घायल हो गई उसे पहले पांवटा साहिब और उसके बाद में देहरादून के अस्पताल में भर्ती करना पड़ा।

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बच्चियों के पिता का एक रिश्तेदार शिमला में इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज अस्पताल की कैंटीन में काम करता है। उसने सूचना मिलने पर शिमला से एंबुलेंस भेज कर बच्चियों को देहरादून के अस्पताल से लॉकर इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया। उनमें से एक अभी मानसिक रूप से इतनी ज्यादा तनाव में है कि बयान नहीं दे सकती। दूसरी बच्ची ने जो बयान दिया उसके आधार पर विजय भल्ला को गिरफ्तार कर लिया गया।

इससे पूर्व 22 फरवरी को पावटा पुलिस ने बच्चियों के साथ मारपीट करने और शारीरिक श्रम कराने जैसे आरोपों में मुकदमा दर्ज किया था।

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10 कार्यकर्ताओं के निष्कासन पर ऐबीवीपी का धरना प्रदर्शन,विश्वविद्यालय पर एक तरफा कार्यवाही का लगाया आरोप

ABVP Protest at HPU over suspension of members 2

शिमला– आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद इकाई ने विश्वविद्यालय में पिंक पेटल्स चौक पर धरना प्रदर्शन किया । इकाई सचिव अंकित चंदेल ने जानकारी देते हुए बताया की पिछले कल विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से एक तनशाही फैसला निकाला गया जिसमें 10 ऐबीवीपी कार्यकर्ताओं को विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया गया।

गौरतलव है की पिछले 11 जुलाई को विद्यार्थी परिषद ने कैम्पस मे धरना प्रदर्शन किया था जिसके चलते 10 छात्रों का निष्काशन कर दिया है।

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धरने को संबोधित करते हुए इकाई सचिव अंकित चन्देल ने बताया की एक तरफ जब कर्मचारियों द्वारा कुलपति कार्यालय में नारेबाजी की जाती है तो उन कर्मचारियों क खिलाफ कुलपति साहब की कोई प्रतिक्रिया नही आती, परन्तु जब ऐबीवीपी कैम्प्स में धरना प्रदर्शन करते है तो उन्हें तुरन्त प्रभाव से निष्कासित कर दिया जाता है जोकि सरासर एकतरफा कार्यवाही है।

चन्देल ने कहा कि विश्वविद्यालय अपनी कमियों को छुपाने क लिए तरह-2 के हथकण्डे अपना रहा है। जहाँ अधूरे परिणामों की वजह से प्रदेश भर के छात्र परेशानी में हैं वहीँ प्रशासन अपने मुंह मिया मिठु बनने में कोई कसर नही छोड़ता।

ABVP Protest at HPU over suspension of members

चन्देल ने कहा कि सभी को ज्ञात है विवि में नौ महीने में पीएचडी (P.hD) और एमसीऐ (MCA) में फर्जी तरीके से प्रवेश के मामले सामने आते है, और इन सभी गडवड़ियों के विरोध करने वाले छात्र संगठनों की आवाज को दबाने का प्रयास विश्वविद्यालय प्रशासन् कर रहा है।

धरने क माध्यम से प्रशासन को चेताते हुये परिषद ने मांग उठाई विश्वविद्यालय अपना काम करे न कि छात्र संगठनों के कार्य मे दखल दे। ऐबीवीपी ने चेतावनी दी है कि जल्द से जल्द परिषद कार्यकर्ताओं का निष्कासन् वापिस नही करता है तो प्रदेश स्तरीय आंदोलन करने में कोई गूरेज़ नही होगाI ऐबीवीपी ने साथ ही यूजी UG के सभी परीक्षा परणामों को पूरा करने की मांग भी प्रशासन के सामने रखी है।

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सेब के सर्मथन मुल्य में मात्र 50 पैसे बढ़ौतरी बागवानों से भद्दा मजाकः राठौर

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शिमला -हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा सेब के सर्मथन मुल्य में की गई मात्र 50 पैसे की बढ़ौतरी को बागवानों के साथ किया गया भद्दा मजाक करार दिया है।

आज शिमला से जारी प्रेस वयान में कुलदीप सिंह राठौर ने बताया कि वर्तमान समय में जब बागवानों को अपनी फसल तैयार करने के लिए भारी मंहगाई का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि जी.एस.टी के चलते सेब से संबंधित पैकिंग से लेकर फफूंद नाशक दवाईयां एवं अपनी फसलों को मंण्ड़ियों तक पहुॅचाने के लिए किराया भी कई गुणा बढ़ गया है इसके चलते सेब के सर्मथन मुल्य कम से कम 10 रूपये होना चाहिए।

कुलदीप राठौर ने कहा कि सेब इलाकों में बहुत जगह सड़कों की हालत खराब पड़ी है और सेब को मण्ड़ियों तक पहुॅचाने वाले ट्रक व गाड़ियों के मालिक खराव सडकों पर गाडियाॅं भेजने को मना कर रहे हैं इसलिए सरकार को चाहिए कि ख़राब सडकों को जल्दी से जल्दी ठीक करवायें।

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हिमाचल सरकार पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे : कर्मचारी नेता

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शिमला -हिमाचल प्रदेश कर्मचारी महासंघ के पूर्व अध्यक्ष सुरेन्द्र मनकोटिया, पूर्व सयुक्त सचिव सेन राम नेगी,पूर्व प्रेस सचिव हरीश गुलेरिया, गैर शिक्षक महासंघ के महासचिव दीप राम शर्मा ,इंदिरागांधी आयुर्विज्ञान मेडिकल कॉलेज के पूर्व महासचिव आत्मा राम शर्मा ने प्रदेश सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद करने के निर्णय की आलोचना करते हुए इसे कर्मचारी विरोधी बताया है।

कर्मचारी नेताओं का कहना है कि जब जब प्रदेश में भाजपा सरकार सत्ता में आई तब तब प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद किया गया,जो कि कर्मचारियों के साथ अन्याय है।

कर्मचारी नेताओं ने जयराम सरकार की आलोचना करते हुए कहा है कि भाजपा कभी भी कर्मचारी हितेषी नही रही है।पूर्व में धूमल सरकार ने भी सत्ता में आते ही इसे बंद किया था अब बर्तमान में जयराम सरकार ने भी ऐसा ही किया है।उनका कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रख कर इसे खोला था।इसे खोलने का एक ही उद्देश्य था कि जो सरकार के किसी भी गलत फैंसले को चुनौती देने के लिए स्वतंत्र था और उसे जल्द और सस्ता न्याय मिल जाता था।

नेताओं का कहना है कि अब ऐसा नही होगा।किसी भी कर्मचारी को न्याय के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना होगा जहां पहले ही हजारों मामले सुनवाई के लिए लंबित पड़े है।

कर्मचारी नेताओं ने मुख्यमंत्री जयराम से आग्रह किया है कि वह इस मामले पर पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे। इसे उन्हें अपनी किसी भी प्रतिष्ठा का प्रश्न नही बनना चाहिए।

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