गन्दगी ने लगाया चेडविक फॉल की खूबसूरती को ग्रहण, गंदगी देख निराश लौट जाते हैं पर्यटक

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शिमला- देवदार के शांत जंगल के बीच करीब 100 मीटर की ऊंचाई से जब पानी झरने का रूप लेकर गिरता है तो दिल छू देने वाला नजारा हर किसी के भी कदमों को रोक देता है। देवभूमि में ऐसे कई मनोरम दृश्य हैं। ऐसा ही एक झरना राजधानी शिमला में है, जिसे चैडविक फॉल के नाम से जानते हैं।

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अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के कारण यह देश ही नहीं विदेशों में भी प्रसिद्ध है। विश्व पर्यटन पर अलग पहचान बनाने के बावजूद चेडविक फॉल का अस्तित्व खतरे में है। कभी इस झरने के पानी का प्रयोग लोग पीने के लिए करते थे, लेकिन आज यहां हर तरफ गंदगी का आलम है। समरहिल से महज दो किलोमीटर दूर यह झरना विदेशी पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र है। अफसोस की बात है कि पर्यटन की दृष्टि से इतना महत्त्वपूर्ण स्थान संवारा ही नहीं गया। इस खूबसूरत नजारे को देखने के लिए रोजाना सैकड़ों देशी व विदेशी पर्यटक पहुंचते हैं, लेकिन आसपास गंदगी देख निराश होकर लौट जाते हैं।

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चैडविक फॉल के लिए समरहिल नेरी सड़क से होते हुए सन्होग स्कूल तक निजी टैक्सियों या बस के जरिए पहुंचा जा सकता है। यहां से झरने तक पहुंचने के लिए पैदल जाना पड़ता है। झरने के पास न तो कोई खाने-पीने का कोई प्रबंध है और न ही कोई अन्य सुविधा। पर्यटकों को स्थानीय लोगों द्वारा खोले गए छोटे-मोटे ढाबों से ही गुजारा करना पड़ता है। यहां पर ऐसा कोई होटल भी नहीं है, जहां पर्यटक एक-दो दिन के लिए रुक सकें।

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प्राचीन मान्यता के मुताबिक

स्थानीय लोगों का कहना है कि जहां झरने का पानी गिरता है, वहां एक तालाब है और वहीं पर एक बड़ी चट्टान है। कभी यहां पर एक राक्षस रहता था। राक्षस को भोजन के रूप में गांव के लोग यहां पर सत्तू रखते थे। जब राक्षस ने ज्यादा तंग करना शुरू किया तो लोग देवता की शरण में चले गए। देवता ने राक्षस को बड़ी चट्टान के नीचे दबा दिया।

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लिफ्ट हो रहा झरने का पानी

चैडविक फॉल से चायली, गड़ावग व पॉटरहिल के लिए पानी लिफ्ट होता है। बावजूद इसके सांगटी के अधिकतर घरों की गंदगी इसी झरने में बहाई जा रही है। पानी इतना दूषित हो गया है कि ग्रामीणों के पशु तक बीमार होने लगे हैं।

Photo: Himachal Watcher

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