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दक्षिण एशियाई देशों की महिला एथलीटों ने साझा की धीरज और मज़बूत इरादे की हौसला देने वाली कहानियाँ

sapan athelets

भारत की राजधानी दिल्ली से दूर मणिपुर की रहने वाली साइखोम मीराबाई चानू के बारे में चंद दिनों पहले तक ज्यादातर भारतीय न के बराबर जानते थे

कुछ ऐसा ही हाल असम की लवलीना बोरगोहेन, पंजाब की कमलप्रीत कौर, हरियाणा की सविता पुनिया, पंजाब की गुरजीत कौर, झारखंड की सलीमा टेटे या निक्की प्रधान का था। ये सब ओलम्पिक में भाग ले रहीं महिला खिलाड़ी हैं।  हाँ, पीवी सिंधू को हम सब कुछ सालों से ज़रूर जानने लगे हैं। इन स्त्रियों में कोई वज़न उठा कर पटखनी दे रहा है तो कोई मुट्ठी की कला दिखा रहा है। तो किसी ने इतना ज़ोरदार चक्का फेंका कि सबकी आँखें खुली की खुली रह गयीं। किसी की फ़ुर्ती तो किसी की पैनी निगाहें सामने वाली हॉकी खिलाड़ी के हर वार को जब नाकाम करतीं तो लोग दाँतों तले अँगुलियाँ दबाने लगते तो किसी ने बिजली सी तेज़ी दिखाई और फ़िर सुनाई दिया गोल।  ये खिलाड़ी अब मशहूर हो गयी हैं।।

हालाँकि, इन महिला खिलाड़ियों को शोहरत के इस मुकाम तक पहुँचने के लिए जितनी बाधाएँ पार करनी पड़ी होंगी, उतनी किसी बाधा दौड़ के धावक को नहीं करनी पड़ती होगी। इसीलिए ये ओलम्पिक में खेल रही और झंडा गाड़ रही हमारी बेटियाँ सिर्फ़ भारत की ही नहीं, पूरे दक्षिण एशियाई खिते की स्त्रियों की फ़ख़्र की वजह हैं।  आज हमारे सभी पड़ोसी मुल्क भी गर्व कर रहे है इन बेटियों की कामयाबी से महिलाओं खिलाडी की इस शोहरत के पीछे की कहानी, मंजिल तक पहुचने के इनके संघर्ष, पूरे दक्षिण एशियाई खिते की एक है।

इसी विषय पर समझ बनाने के लिए, साउथ एशिया पीस एक्शन नेटवर्क (सपन – SAPAN) पिछले दिनों दक्षिण एशियाई देशों की अनेक महिला खिलाडीयों को एक साथ जोड़ा आर उनकी ऑनलाइन मीटिंग रखी गई। लगभग 14  खिलाड़ी एक साथ आयीं।इन्होंने अपने सामने आने वाली चुनौतियों और कामयाबियों पर चर्चा की. दिल को छू लेनी वाली कहानियाँ साझा कीं. हौसला देने वाली एकजुटता दिखायी।

इस ऑनलाइन मीटिंग का विषय था, ‘खेल में महिलाएँ: चुनौतियाँ और कामयाबियाँ.’ रविवार, 25 जुलाई को आयोजित यह चर्चा दो घंटे से ज़्यादा वक़्त तक चली।

इस बैठक में भविष्य में सहयोग के लिए कई विचार आये. इसमें एक किताब तैयार करने और दक्षिण एशियाई महिला एथलीटों का एक संघ बनाने की बात भी शामिल है।

 

मैंने हार नहीं मानी: ख़ालिदा पोपल

अफगानिस्तान की महिला राष्ट्रीय फुटबॉल टीम की पूर्व कप्तान ख़ालिदा पोपल ने कहा, ‘जंग ने हमसे सब कुछ छीन लिया है।’

उन्होंने कहा, ‘किसी न किसी को तो कदम उठाना पड़ता. मुझे परेशान किया गया. बहुत बुरा-भला कहा गया. हमला किया गया। लेकिन मैंने हार नहीं मानी। मेरी लड़ाई सिर्फ़ मेरे लिए नहीं थी। यह मेरी बहनों के लिए था। मेरे देश की बाकी दूसरी सभी स्त्रियों के लिए था।’

ख़ालिदा पोपल ने कहा,  ‘दक्षिण एशिया हमारे घर की तरह है. हमारा दर्द एक जैसा है। सिर्फ़ एक चीज़ की कमी है. वह है, हमारे बीच एकता नहीं है।’

सपनकी मासिक शृंखला

खालिदा उन दर्जन भर महिला खिलाड़ियों में शामिल हैं, जिन्होंने इस वेबिनार में भाग लिया। साउथ एशिया पीस एक्शन नेटवर्क (सपन) के बैनर तले   ‘इमेजिन! नेबर्स इन पीस,’ मासिक शृंखला के तहत यह चौथा वेबिनार था।  इस शृंखला का शीर्षक मशहूर वेबसाइट चौक डॉट कॉम के अप्रकाशित संग्रह से लिया गया है। रविवार का यह वेबिनार ‘साउथ एशिया वीमेन इन मीडिय’ (एसएडब्ल्यूएम) के सहयोग से आयोजित किया गया. कार्यक्रम का संचालन ‘ई-शी’  पत्रिका की संपादक एकता कपूर ने किया।

भाग लेने वाले एथलीटों के साथ चर्चा का संचालन एथलीटों के अधिकारों की वकालत करने वाली प्रमुख कार्यकर्ता और जिनेवा स्थित ‘सेंटर फॉर स्पोर्ट एंड ह्यूमन राइट्स’ की निदेशक और ट्रस्टी पायोशनी मित्रा और कराची की खेल पत्रकार नताशा राहील द्वारा  संयुक्त रूप से किया गया।

मैं तो लड़के के भेष में क्रिकेट खेलती थी: नूरेना

अंतरराष्ट्रीय स्क्वैश खिलाड़ी नूरेना शम्स, पाकिस्तान के उत्तर-पश्चिमी प्रांत के मलाकंद इलाके की पहली अंतरराष्ट्रीय महिला एथलीट हैं।  खालिदा पोपल की तरह नूरेना भी जंग के बीच पली-बढ़ी हैं। नूरेना ने कहा, ‘ मेरे कानों में अब भी बमों के धमाके गूँजते हैं।’ उन्होंने कहा कि उन्हें लगता था कि वे मर जायेंगी और  कभी ख़्वाब में भी नहीं सोचा था कि वे स्क्वैश खेलेंगी। वह भी इतने बड़े स्तर पर।

नूरेना ने कहा कि ऐसे क्षेत्र में जहाँ लड़कियों के लिए तालीम हासिल करना ही बहुत बड़ी जद्दोजेहद है, वहाँ कोई खेल खेलना तो कठिन ही कठिन है। उन्होंने बताया, ‘मुझे पेशावर में क्रिकेट खेलने के लिए ख़ुद को एक लड़के के भेष में छिपाना पड़ता था।।’

नूरेना का सुझाव था, ‘…दक्षिण एशियाई लोगों को एक- दूसरे के लिए लगातार  खड़े रहना चाहिए. यह किसी ट्रॉफी जीतने की बात नहीं है या इस बारे में भी नहीं है कि पहले किसने क्या किया। हमें  जो करना है, मिल-जुलकर एक साथ करना है. एक-दूसरे के लिए खड़े रहना है।’

महिलाओं के लिए खेल का मुद्दा अहम है

‘सपन’ दक्षिण एशिया में अमन, इंसाफ़, लोकतंत्र और मानवाधिकारों के सिद्धांतों को मज़बूत करने और आगे बढ़ाने वाले व्यक्तियों और संगठनों का एक गठबंधन है. इसकी शुरुआत इसी साल मार्च में हुई.  अपने जन्म के बाद से ही ‘सपन’ सार्वजनिक स्वास्थ्य के मुद्दे के तौर पर सभी के लिए स्वास्थ्य सेवा पर काम कर रहा है. ‘सपन’ खेल – और संघर्ष – को, खासकर महिलाओं के लिए, सार्वजनिक स्वास्थ्य के मुद्दे के तौर पर ही देखता है.

इस बीच, टोक्यो में ओलंपिक शुरू हो चुका था.  एक तरफ़  ‘सपन’ के कार्यक्रम में महिला खिलाड़ी, खेल को एक पेशे के रूप में अपनाने में आने वाली कठिनाइयों के बारे में बात कर रही थी और दूसरी ओर  भारत की झोली में पहला पदक एक महिला खिलाड़ी ने दिलाया. यह एक ऐसा संघर्ष है जिसका अधिकांश महिला खिलाड़ियों ने सामना किया है… और अक्सर यह संघर्ष  घर से शुरू होता है.

लड़कियाँ खेल में आयें, सब सोचें: अशरीन

बांग्लादेशी बास्केटबॉल खिलाड़ी अशरीन मृधा ने जोर देकर कहा कि लड़कियों को खेलों में लाने की जिम्मेदारी केवल खेल संघों और खेल संगठनों की नहीं है. यह ज़िम्मेदारी दोस्तों, परिवारीजनों, चाचाओं-मामाओं, चाचियों-मामियों और भाइयों की भी है. इन सबको महिला खिलाड़ियों को बढ़ाने के लिए आगे आने की ज़रूरत है.  उन्होंने कहा, ‘जेंडर/ लैंगिक असमानता को केवल महिलाओं की समस्या मानकर सुलझाने की ज़रूरत नहीं है.’

विकलांग एथलीटों के सामने और कठिन संघर्ष

विकलांग एथलीटों को और भी कठिन संघर्ष का सामना करना पड़ता है.  गुलशन नाज़ को आंशिक तौर पर देख सकने में दिक़्क़त है.  गुलशन, भारत के उत्तर प्रदेश के एक छोटे शहर  सहारनपुर की रहने वाली हैं.

वे कहती हैं, ‘देख सकने में मजबूर यानी दृष्टि बाधित एथलीट को कोई भी प्रायोजित नहीं करना चाहता है.’

महिलाओं खिलाड़ियों के सामने पैसे का संकट

एक बड़ा मुद्दा पैसे या संसाधन का है. बांग्लादेश की महिला क्रिकेट टीम की कप्तान रूहमाना अहमद सहित अनेक दक्षिण एशियाई एथलीटों ने महिला एथलीटों के सामने इस वजह से आने वाली चुनौतियों और मुश्किलों पर रोशनी डाली.

पाकिस्तान महिला क्रिकेट टीम की पूर्व कप्तान सना मीर ने कहा, ‘महिलाओं को पैसा हासिल करने के लिए ख़ुद को साबित करना पड़ता है. दूसरी ओर, पुरुष न भी जीतें तो उन्हें पैसे की पूरी मदद दी जाती है.’

यहां तक कि जब महिला एथलीट पदक के मामले में पुरुषों से बेहतर प्रदर्शन करती हैं,  तब भी उन्हें वह शोहरत या पैसा नहीं मिलता जैसा पुरुष खिलाड़ियों को मिलता है.  इस मामले में भारत की महिला खिलाड़ियों को हम देख सकते हैं.

महिला खिलाड़ी खेल न छोड़ें: निशा

वेबिनार में भाग लेने वालों ने जेंडर स्टीरियोटाइप तोड़ने की ज़रूरत और अहमियत के बारे  में भी चर्चा की.  भारत की ओलंपियन तैराक निशा मिलेट जुड़वाँ बेटियों के साथ इस बैठक में शामिल थीं. उन्होंने महिलाओं से अपील की कि प्रतिस्पर्धी खेल छोड़ने के बाद भी वे खेल न छोड़ें. वे खिलाड़ियों की अगली पीढ़ी को बनाने के लिए और उन्हें कोचिंग देने, सलाह देने, बढ़ावा देने में योगदान देने के लिए आगे आयें.

कौनकौन शामिल हुआ

इस कार्यक्रम में बोलने वाली खिलाड़ियों में भारत की एथलीट और खेल निवेशक आयशा मनसुखानी, श्रीलंका की कार्यकर्ता और पूर्व नेटबॉल खिलाड़ी कैरिल टोज़र, बांग्लादेश की क्रिकेटर चंपा चकमा, बांग्लादेश की पुरस्कार विजेता भारोत्तोलन चैंपियन माबिया अख़्तर शिमांटो, भारत/संयुक्त अरब अमीरात की क्रिकेटर कोच और भारत ए टीम के पूर्व खिलाड़ी रूपा नागराज और नेपाल की राष्ट्रीय टेनिस खिलाड़ी  प्रीति बराल शामिल थीं.

मैं इनकी बातें सुनकर दंग हूँ: नजम सेठी

प्रमुख विश्लेषक नजम सेठी ने इन सबकी बात सुनने के बाद कहा, ‘मैं बहुत ही मुश्किल हालात में आगे बढ़ने वाली इन खिलाड़ियों के साहस और दृढ़ संकल्प की बातें सुन कर दंग हूँ.  कैसे इन्होंने मुस्कुराते हुए अपनी आपबीती सुनायी. मैं बेहत प्रभावित हूँ.’

नजम सेठी ने कहा कि दक्षिण एशिया की सभी महिला एथलीटों को  लीडरशिप के मुद्दे, आर्थिक संकट, भेदभाव, स्टीरियोटाइप जैसी समस्याओं से लड़ना-जूझना पड़ रहा है. लेकिन उन्होंने दो और चिंताओं की तरफ़ ध्यान दिलाया. वे चिंता हैं- महिलाओं का वस्तुकरण और यौन उत्पीड़न. उनका कहना था कि इस पर और ज़्यादा ध्यान देने की ज़रूरत है.

नजम सेठी एक प्रकाशन भी चलाते हैं. उन्होंने कहा कि इस चर्चा में उन्होंने जो कहानियाँ सुनीं, इन सब बातों को तो एक किताब की शक्ल में सामने आना चाहिए.  ‘सपन’ टीम इस परियोजना पर काम करने के लिए सहमत हुई है.

इस आयोजन में दक्षिण एशियाई महिला एथलीटों का संघ बनाने का भी विचार आया. अनेक प्रतिभागियों को यह विचार पसंद आया.

वीज़ा मुक्त दक्षिण एशिया

प्रख्यात शिक्षाविद् बायला रज़ा जमील ने कार्यक्रम के दौरान ‘सपन’ के घोषणापत्र को  पढ़कर सुनाया. इस घोषणापत्र में वीज़ा मुक्त दक्षिण एशिया के साथ ही व्यापार, पर्यटन और यात्रा में आसानी देने की माँग की गयी है.  उन्होंने मौजूद लोगों से इस घोषणापत्र का समर्थन करने का आह्वान किया.

पिछले वेबिनार की तरह ही ‘सपन’ ने उन लोगों को श्रद्धांजलि दी जिनके आदर्शों को संगठन आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहा है. इनमें आईए रहमान, आसमा जहाँगीर, निर्मला देशपांडे, डॉ. मुब्बशीर हसन, मदनजीत सिंह जैसे लोग शामिल हैं.  प्रतिभागियों ने उन प्रमुख दक्षिण एशियाई लोगों को भी याद किया, जिनका पिछले एक महीने में निधन हो गया है. साथी ही उन परिवारों के प्रति भी संवेदना व्यक्त की जिनके परिवारीजन कोरोना वायरस महामारी के शिकार हुए हैं.

व्यंग्य नाटक कैप्टन समीनाकी प्रस्तुति

वेबिनार में शोएब हाशमी ने खेल में महिलाओं पर एक छोटा व्यंग्य नाटक “कैप्टन समीना” की भी प्रस्तुति की.  1980 के दशक में पाकिस्तान में जनरल जियाउल हक की दमनकारी सैन्य तानाशाही के दौरान इस नाटक का प्रदर्शन हुआ था. हालाँकि, ख़तरों को भाँपते हुए इसे कभी रिकॉर्ड नहीं किया गया था. तब से चीजें बहुत बदल चुकी हैं. इसके बाद भी इस नाटक में महिलाओं के खेल को दबाने का मुद्दा जिस तरह से उठाया गया है,  वह आज भी प्रासंगिक है.

वेबिनार के प्रतिभागी इस बात पर एकमत थे कि आगे बढ़ने का रास्ता एकता, एकजुटता और दक्षिण एशियाई सहयोग में है.

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राज्य में डेंगू के 257 मामले, बचाव के दृष्टिगत स्वास्थ्य विभाग ने दी सतर्क रहने की सलाह

शिमला-राज्य स्वास्थ्य विभाग के प्रवक्ता ने आज यहां कहा कि जनवरी-2021 से अब तक राज्य में डेंगू के 257 मामले सामने आए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश के लिए राहत की बात यह है कि इस वर्ष राज्य में अब तक डेंगू से किसी भी व्यक्ति की मृत्यु दर्ज नहीं की गई हैं, उन्होंने लोगों को इससे सतर्क रहने की सलाह दी है।

उन्होंने कहा कि जनवरी-2021 से 14 अक्तूबर, 2021 तक राज्य में डेंगू की जांच के लगभग 2344 टेस्ट किए गए, जिनमें 257 लोग डेंगू पॉजिटिव पाए गए। इसी अवधि के दौरान जिला बिलासपुर में 01, चंबा में 03 हमीरपुर में 05, कांगड़ा में 25, मंडी में 03, सिरमौर में 01, सोलन में 194, ऊना में 21, इसके अलावा मेडिकल कॉलेज टांडा में 04 मामलें डेंगू के पॉजिटिव पाए गए है।

प्रवक्ता ने कहा कि अचानक तेज बुखार आना, सिर दर्द, आंखों के पीछे दर्द, जोड़ों और मांसपेशियों में दर्द, थकान, उल्टी आना और शरीर पर लाल चकत्ते (दाने) आना आदि डेंगू के लक्षण हैं, जो डेंगू के बुखार के आरम्भ से दो से पांच दिन के बाद दिखाई देते हैं।

उन्होंने कहा कि डेंगू मच्छरों के काटने से फैलता हैं और डेंगू के अधिकतर मामले शहरी और अर्ध शहरी क्षेत्रों में पाए जाते हैं। उन्होंने लोगों से आह्वान किया है कि अपने घरों के आसपास साफ-सफाई बनाए रखे और पानी जमा नहीं होने दें ताकि घरों के आसपास मच्छर न पनप सके।

Feature Photo: Photo by Ravi Kant from Pexels

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हिमाचल में 22 अक्टूबर को होने वाली पंचायत सहायक भर्ती परीक्षा में धांधली होने की आशंका: एसएफआई (SFI)

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शिमला– हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की एसएफआई (SFI) इकाई ने 22 अक्टूबर को आयोजित होने वाली पंचायत सहायक भर्ती परीक्षा, जिसे हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय प्रशासन 93 केंद्रों में आयोजित करवा रहा है, में धांधलियां होने की आशंका जाहिर की है।

एसएफआई इकाई अध्यक्ष विवेक राज ने बताया कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने 93 परीक्षा केंद्रों के लिए 186 कर्मचारियों को परीक्षा आयोजित करवाने के लिए तैयार किया है, जिसमें अधिकतर कर्मचारी बीजेपी व आरएसएस से संबंधित है। उन्होंने कहा कि जिस तरह विश्वविद्यालय में प्रोफेसर भर्ती प्रक्रिया में धांधली कर बीजेपी व आरएसएस के कार्यकर्ताओं को भर्ती किया गया है, उसी तरह पंचायत स्तर पर भी इस परीक्षा के माध्यम से प्रशासन बीजेपी व आरएसएस के कार्यकर्ताओं की भर्ती करवाने जा रहा है।

विवेक राज ने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन ने पंचायत सहायक के आवेदन के नाम पर प्रदेश के बेरोजगार युवाओं से 1200 रुपए की रकम वसूल की है और महिलाओं से भी इसी तरह फीस वसूल की गई। जबकि प्रदेश में किसी भी सरकारी भर्ती में महिलाओं से फीस नहीं ली जाती है । हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय प्रशासन सरकार की शह पर पंचायतों में बीजेपी व आरएसएस के कार्यकर्ताओं को भर्ती करवाना चाहता है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के शिक्षक संघ ने भी इस भर्ती प्रक्रिया पर वीसी से मिलकर सवाल खड़े किए हैं।

एसएफआई ने मांग की है कि इस भर्ती प्रक्रिया को निष्पक्ष होकर करवाया जाए और महिलाओं से जो 1200 रूपए फीस प्रशासन ने ठगी है उसे तुरंत प्रभाव से वापस किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि इस भर्ती प्रक्रिया में किसी भी तरीके की धांधली सामने आई तो एसएफआई प्रदेश के युवाओं व छात्रों को इकट्ठा कर विश्वविद्यालय प्रशासन और प्रदेश सरकार के खिलाफ एक उग्र आंदोलन खड़ा करेगी।

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चुनावी मुद्दों से ध्यान भटका रही भाजपा, चार सालों के कार्यो का श्वेत पत्र जारी करे मुख्यमंत्री: नरेश चौहान

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शिमला– हिमाचल में हो रहे उप चुनावो को लेकर दोनों प्रमुख दलों कांग्रेस और बीजेपी में जुबानी जंग तेज हो गई है। बीजेपी जहां कांग्रेस को सेना पर दिए गए बयान पर घेर रही है वहीं कांग्रेस भी बीजेपी को मंहगाई बेरोजगारी और गुटबाजी पर घेर रही है। कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता नरेश चौहान ने कहा कि भाजपा को कांग्रेस की दीक्षा, नेतृत्व और नीति की चिंता छोड़ कर केंद्र तथा प्रदेश में भाजपा सरकार ने केवल निजीकरण पर ही ध्यान केंद्रित किया हुआ है।

चौहान ने कहा कि कांग्रेस के बजाय भाजपा में ख़ेमे बाजी चरम पर है, भाजपा कई गुटों में बंट कर रह गई है। उन्होंने कहा कि भाजपा पहले यह स्पष्ट करे कि भाजपा किसके कहने पर कार्य करती है – मुख्यमंत्री खेमा अलग है, अनुराग धूमल खेमा अलग है, नड्डा खेमा अलग है या आरएसएस के कहने पर कार्य होते हैं।

चौहान ने कहा कि  प्रदेश में उपचुनावों का दौर चला हुआ है और भाजपा जनहित के मुद्दों  के बजाय कांग्रेस पार्टी पर ही पूरी पत्रकार वार्ता कर असली मुद्दों से प्रदेशकी जनता का ध्यान भटकाने का प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से बीते कल भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सुरेश कश्यप ने कांग्रेस के नेतृत्व, नीति और दिशा पर जो सवाल उठाया है तो यह स्पष्ट करना चाहते हैं कि कांग्रेस के पास नेता भी है, नीति भी है, और कांग्रेस की अपनी दिशा भी है।

चौहान ने कहा कि कोरोना के बाद बढ़ती महंगाई और बेरोजगारी आज जनता के अहम मुद्दे हैं। करोना के चलते लोगों की नौकरियां चली गई, छोटे धंधे चौपट हो गए। अगर महंगाई की बात की जाए तो पेट्रोल डीजल 100 के पार हो गए हैं। उन्होंने कहा कि आज जिस उज्जवला योजना की प्रदेश सरकार चर्चा करती है वहीं सिलेंडर 1000 रूपये के पार पहुंच चुका है।

उन्होंने कहा कि आज दिनचर्या की चीजों के दाम सातवें आसमान को छू रहे हैं। यह प्रदेश सरकार तथा केंद्र सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वह अहम मुद्दों पर चर्चा करें तथा देश एवं प्रदेश की जनता को बढ़ती महंगाई तथा बेरोजगारी से निजात दिलाई जाए। उन्होंने मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर से चार साल के कार्यो को लेकर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है।

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