हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय का दृष्टिबाधित छात्र पुस्तकालय पूरी तरह सुगम्य, 2.5 लाख पुस्तकें उपलब्ध

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शिमला- हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय का पुस्तकालय अब दृष्टि बाधित विद्यार्थियों के लिए भी पूरी तरह सुगम्य हो गया है।अब दृष्टिबाधित छात्र पुस्तकालय मे उपलब्ध सवा दो लाख पुस्तकें आसानी से टाकिंग सॉफ्टवेयर के माध्यम से पढ़ सकेंगे। यही नहीं वे अंतर्राष्ट्रीय ऑन लाइन लाइब्रेरी की दो लाख 30 हज़ार पुस्तकें भी पढ़ पाएंगे। विशवविद्यालय सभी विकलांग विद्यार्थियों को मुफ्त शिक्षा देने वाला देश का पहला विश्वविद्यालय है।

कुलपति प्रोफेसर अरुण दिवाकर नाथ वाजपेयी ने आज दृष्टिबाधितों के लिए सुगम्य पुस्तकालय का उदघाटन करने के बाद कहा कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय अब विकलांगों के लिए भी आदर्श विश्वविद्यालय के रूप मे उभर रहा है। विकलांगता मामलों के नोडल ऑफिसर और एसोशिएट प्रोफेसर अजय श्रीवास्तव ने कुलपति को सुगम्य पुस्तकालय के बारे मे विस्तरत जानकारी दी।

सुगम्य पुस्तकालय मे फिलहाल तीन कम्प्युटर लगाए गए हैं जिनमे कई तरह के टाकिंग सॉफ्टवेयर हैं। वहाँ इन्टरनेट की सुविधा भी दी गई है। अब दृष्टिबाधित विद्यार्थी पुस्तकालय की किसी भी पुस्तक को लेकर उसे वहाँ स्कैन कर के कम्प्युटर पर पढ़ सकते हैं। वे अंतर्राष्ट्रीय ऑन लाइन पुस्तकालय “बुकशेयर” की दो लाख 30 हज़ार पुस्तकें भी पढ़ पाएंगे। यही नहीं, उन्हें ऑन लाइन जर्नल भी उपलब्ध रहेंगे।

प्रोफेसर वाजपेयी ने कहा कि विश्वविद्यालय बिना किसी भेद भाव के सभी का है। उन्होने कहा कि हमने विकलांगों को समान अधिकार और अवसर प्रदान करने के लिए अनेक कदम उठाए हैं जिनमे रैम्प बनाना, दृष्टि बाधित विद्यार्थियों के लिए केंद्र सरकार की नई परीक्षा नीति लागू करना और उन्हें तीन घंटे की परीक्षा मे एक घंटे का अतिरिक्त समय देना शामिल है। विश्वविद्यालय की बसों मे विकलांग विद्यार्थियों को निशुल्क यात्रा की सुविधा भी दी है है। उन्हें शिक्षा एवं नौकरी मे तीन प्रतिशत आरक्षण भी दिया जाता है।

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