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हिमाचल में बढ़ा है मानवाधिकारों के हनन का ग्राफ, श्रम कानून लागू करने की मांग करने वाले मजदूर जेलों में बंद: सिंघा

शिमला- भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माक्र्सवादी), हिमाचल प्रदेश की राज्य कमेटी ने 68वें मानवाधिकार दिवस के उपलक्ष में बैठकों एवं सेमिनार के माध्यम से मानव अधिकारों के सम्बंध में चर्चा की। शिमला में पार्टी की बैठक में शिमला के पूर्व विधायक एवं पूर्व पार्टी राज्य सचिव राकेश सिंघा ने कार्यकर्ताओं को अवगत कराया कि दिसम्बर 10, 1948 को संयुक्त राष्ट्र संघ की आम सभा में इस दिन को सार्वजनिक तौर पर ‘मानवाधिकार दिवस’ के रूप में मनाने की घोषणा की। सिंघा ने खेद जताते हुए कहा कि इस वर्गीय विभाजित समाज में आज राज्य का तंत्र ही मानवाधिकारों के हनन का माध्यम बन गया है जो पर बहुमत के समाज की कीमत पर मुटठीभर अमीरों के मुनाफे को उच्चतम स्तर पर ले जाने की अनुमति देता है। और यही मानवाधिकारों के हनन का बुनियादि कारण है।

बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि मानवाधिकारों के हनन का ग्राफ हिमाचल प्रदेश में विशेषतौर पर बढ़ा है। राकेश सिंघा ने शौंगठोंग-कड़छम विद्युत परियोजना में कार्यरत मज़दूरों के अधिकारों के हनन के संदर्भ में कहा कि मज़दूरों का मानवाधिकारों के दायरे के अंदर अपने बुनियादि अधिकारों की मांग को भी इस तंत्र द्वारा कानून व्यवस्था की उल्लंघना की संज्ञा दी जाती है।

सिंघा ने कहा कि यह कितनी विडम्बना है कि अपने अधिकारों की मांग के लिए मज़दूरों को जेल की सलाखों के पीछे डाल दिया जाता है। जबकि मज़दूरों का दोष मात्र यह है कि वे श्रम कानूनों को लागू करने, अपने लिए न्युनतम वेतन, टनल के अंदर सुरक्षा प्रदान करने, मज़दूरों के रहन-सहन को बेहतर बनाने, वेतन स्लिप, ई.पी.एफ. कानून के तहत सुरक्षा प्रदान करने की मांग कर रहे थे। इन मांगों के लिए प्रदेश सरकार के इशारे पर प्रशासन उनके खिलाफ आई.पी.सी. की धारा 307 के तहत झूठे अपराधिक मुकदमे दायर करता है। मज़दूरों के खिलाफ की गई एफ.आई.आर. में दर्ज शिकायत को कोई भी कानून की जानकारी रखने वाला व्यक्ति भी यह कहेगा कि इस प्रकार के किसी भी अपराध की सुनवाई तो पंचायतों द्वारा की जा सकती है।

सिंघा ने कहा कि 2013 में मज़दूरों के नेता सोम देव को न्यूनतम वेतन की मांग करने पर पटेल कम्पनी द्वारा निकाल दिया गया जिस कारण से सोम देव ने आत्महत्या की। मानवाधिकारों की इस प्रकार की घोर उल्लंघना के अन्य भी कई सबूत सरकार के श्रम विभाग के पास मौजूद है जिसमें विभाग ने श्रम कानूनों की अवेहलना के लिए कम्पनी तथा ठेकेदारों के खिलाफ दर्ज किए है। ई.पी.एफ. कमीश्नर ने भी ठेकेदारों पर ई.पी.एफ. कानून के प्रावधानों को लागू न करने के खिलाफ केस दर्ज किये हैं।

स्थिति यह है कि आज इन मज़दूरों के बच्चों को दो वक्त की रोटी के लिए मोहताज होना पड़ रहा है क्योंकि इनके माता-पिता ही मज़दूरी व काम करके कमाने वाले थे जोकि आज जेलों में बंद हैं।

पूर्व विधायक एवं मज़दूरों के नेता राकेश सिंघा ने सरकार से तीन सवाल किए हैं कि प्रदेश सरकार बताए कि देश में शौंगठोंग-कड़छम परियोजना क्षेत्र के इलावा कहीं भी ऐसी कोई जगह है जहां पिछले 9 महीनों से धारा 144 लगाई गई हो?

सिंघा ने कहा कि प्रदेश सरकार इस सम्बंध में माननीय सर्वोच्च न्यायालय के दिल्ली सरकार के राम लीला मैदान में बाबा रामदेव के प्रदर्शन केस पर संज्ञान के तहत धारा 144 के संदर्भ में बनाये गए नियमों को मानने से क्यों इंनकार कर रही है?

सिंघा ने पूछा कि आखिर किसके इशारे पर किन्नौर प्रशासन को इस प्रकार के कठोर एवं निष्ठुर कानून को लागू करनेे की इजाज़त दी जा रही है? तथा ठेकेदारों को मज़दूरों की लूट की छूट देने की इजाज़त दी जा रही है?

सिंघा ने कहा भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माक्र्सवादी) इस बात पर हैरान है कि 20 सितम्बर, 2016 के माननीय उच्च न्यायालय ने आदेश पारित किये जिसमें कहा गया है कि मज़दूर हड़ताल खत्म करें तथा कम्पनी को सभी कानूनों को लागू करने, मज़दूरों को तीन महीने के अंदर (20 दिसम्बर, 2016 तक) वेतन भुगतान करने के निर्देश दिए हैं। जबकि इस जवाबदेही से बचने के लिए पटेल कम्पनी तथा इसके ठेकेदारों ने 900 मज़दूरों की सेवायें समाप्त करने का रास्ता चुना जो कि हि0प्र0 के इतिहास में आज से पहले कभी नहीं हुआ।

भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माक्र्सवादी), मानवाधिकार दिवस के अवसर पर कि है कि पटेल कम्पनी व इसके ठेकेदारों पर इस प्रकार से किए गए मानवाधिकारों के घोर उल्लंघन के लिए कड़ी कार्यवाही की जाए तथा निकाले गए सभी मज़दूरों के अधिकारों की रक्षा करते हुए उन्हें बहाल किया जाए।

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शिमला में दबंगों द्वारा दलित परिवार से मारपीट, न पुलिस ने एफआईआर दर्ज़ की, न डॉक्टर ने दिया उचित उपचार: दलित शोषण मुक्ति मंच

शिमला-हिमाचल प्रदेश दलित शोषण मुक्ति मंच शिमला के ढली थाना के अन्तर्गत आने वाले परिवार के साथ पड़ोस में रहने वाले दबंगों द्वारा जातिगत उत्पीड़न और मारपीट के मामले की कडी निन्दा शिमला है।

मंच ने आरोप लगाया है कि जब पीडित परिवार एफआईआर दर्ज करवाने के लिए ढली थाने में पहुंचा तो थाना प्रभारी ने भी एफआईआर दर्ज करने में आनाकानी की,जिस वजह से पीडित परिवार को ऑनलाइन एफआईआर दर्ज करवानी पड़ी। मंच ने कहा कि ढली थाना ने 18 घंटे तक एफआईआर तक दर्ज नहीं की गयी और पुलिस आरोपियों को पुलिस वैन में घुमाती रही।

उसके बाद पीडित परिवार जब उपचार के लिए आई.जी.एम.सी. पहुंचा तो उन्हें उचित उपचार नहीं मिला, पीडित लड़की कई घंटों तक स्ट्रेचर पर पड़ी खून से लतपथ दर्द से कहलाती रही। दलित शोषण मुक्ति मंच पुलिस और डॉक्टर के इस तरह की गैर जिम्मेदाराना रवैये के लिए कडी आलोचना की है और सरकार से मांग की है कि दोषी पुलिस कर्मियों और डॉक्टर के खिलाफ उचित कार्यवाही की जाऐ।



दलित शोषण मुक्ति मंच के शहरी संयोजक विवेक कश्यप व सह संयोजक राकेश कुमार ने कहा कि जब से प्रदेश में बीजेपी की सरकार सत्ता में आई है तब से दलितों पर अत्याचार बड़े है वो चाहे सिरमौर में केदार सिंह जिदान की हत्या हो,नेरवा में रजत की हत्या हो,कुल्लू घाटी के थाटीबीड़ की घटना हो या सोलन के लुहारघाट में एक दलित शिक्षक के साथ मारपीट का मामला हो,सरकार इन सब मामलों में न्याय दिलाने में विफल रही।

उन्होंने कहा कि इससे सरकार का दलित विरोधी रवैया सामने आया है। ढली मारपीट व छेडछाड मामले में ऐट्रोसिटी एक्ट लगने के बाद भी पुलिस अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं कर पाई है।

‌दलित शोषण मुक्ति मंच ( हि।प्र) सरकार से मांंग की है कि अपने काम में कोताही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों और डॉक्टर के खिलाफ उचित कार्यवाही की जाऐऔर मारपीट और छेड़छाड़ के आरोपियों को तुरन्त गिरफ्तार किया जाऐ। मंच ने चेतवानी दी है कि अगर सरकार दोषियों को तुरंत गिरफ्तार नहीं करती है तो दलित शोषण मुक्ति मंच शहर की जनता को लामबंद कर के एक उग्र आंदोलन करेगी।

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समय रहते पुलिस ने की होती मदद तो नहीं होता दुराचार, दोषियों के साथ जिम्मेवार पुलिस अधिकारियों पर भी दर्ज़ हो एफआईआर: गुड़िया न्याय मंच

शिमला-गुड़िया न्याय मंच ने शिमला शहर के बीचोंबीच बलात्कार के मामले में पुलिस की बेहद संवेदनहीन कार्यप्रणाली की कड़ी आलोचना की है व दोषियों के साथ जिम्मेवार पुलिस अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। मंच ने चेताया है कि अगर बलात्कार के दोषियों व जिम्मेवार पुलिस अधिकारियों को बचाने की कोशिश की गई तो मंच जनता को लामबंद करके आंदोलन करेगा।

मंच के सह संयोजक विजेंद्र मेहरा ने पुलिस की नाक के नीचे एक और लड़की के बलात्कार पर कड़ा रोष ज़ाहिर किया है। उन्होंने कहा है कि इस बेहद संवेदनशील मामले में बलात्कार के दोषियों के साथ ही जिम्मेवार पुलिस अधिकारियों पर तुरन्त एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। अगर पुलिस प्रशासन ने थोड़ी भी संवेदनशीलता दिखाई होती तो मानवता को शर्मशार करने वाला यह घिनौना कार्य नहीं होता।

मंच ने यह सवाल उठाया है कि जब यह लड़की पुलिस के पास मदद मांगने गई तो फिर उसे मदद क्यों नहीं मिली। मंच के सह संयोजक ने कहा कि अगर पुलिस ने इस लड़की की समय रहते मदद की होती तो इस लड़की से दुराचार नहीं होता और न ही दरिंदे अपने मंसूबों में कामयाब हो पाते। उन्होंने इस बलात्कार के लिए पूरी तरह पुलिस जिम्मेवार ठहराया है।

उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम से गुड़िया प्रकरण की तरह एक बार फिर से स्पष्ट हो गया है कि हिमाचल प्रदेश के थाने किसी भी तरह से आम जनता के लिए सुरक्षित नहीं हैं और न ही इन थानों में जाने पर जनता को सुरक्षा,न्याय व मदद मिलती है। यह घटनाक्रम एक बार पुनः गुड़िया प्रकरण की तरह पुलिस की बेहद संवेदनहीन कार्यप्रणाली की पोल खोलता है व उस पर काला धब्बा है।

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देवभूमि हिमाचल व शिमला जैसे शांत व सुरक्षित शहर में ऐसी दुष्कर्म की घटना होना कानून व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिन्ह: चौहान

शिमला– शिमला शहर मैं रविवार को एक 19 वर्षीया युवती के अपहरण व् चलती कर में दुष्कर्म की घटना को लेकर माहौल गरमा गया है।

जनता का गुस्सा भांप मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मंगलवार को एडीएम शिमला प्रभा राजीव को मजिस्ट्रियल जांच सौंप दी है और 24 घंटे में रिपोर्ट तलब की है। साथ ही दुष्कर्म की छानबीन के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शिमला प्रवीर ठाकुर के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया गया है। एसआईटी में सात सदस्य भी होंगे। ये एएसपी शिमला अभिषेक यादव, डीएसपी योगेश जोशी, इंस्पेक्टर राजकुमार, सब इंस्पेक्टर डिंपल, एसएचओ महिला थाना न्यू शिमला दयावती, एएसआई पुलिस चौकी संजौली रंजना और एएसआई राजीव कुमार होंगे।

विपक्षी पार्टी कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी(मार्क्सवादी) ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए शहर में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाये हैं।

कम्युनिस्ट पार्टी ने शिमला में युवती से हुए दुष्कर्म की शर्मसार करने वाली घटना को लेकर गम्भीर चिंता व्यक्त करती है। पार्टी ने कहा कि देवभूमि हिमाचल व शिमला जैसे शांत व सुरक्षित शहर में इस प्रकार की घटना का घटित होना कानून व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिन्ह लगाती है।

राज्य सचिवमण्डल के सदस्य संजय चौहान ने कहा कि पिछले कुछ समय से प्रदेश में इस प्रकार के अपराधियों घटनाओं की संख्या बढ़ रही है। हत्या व महिलाओं के प्रति अपराध जिसमें विशेष रूप से बलात्कार के मामलों में बहुत वृद्धि दर्ज की गई हैं। प्रदेश सरकार इस प्रकार के संगीन अपराधों को रोकने में पूरी तरह से विफल रही है।

चौहान ने ये भी कहा कि वर्ष 2017 में ‘गुडिया’ की निर्मम हत्या की घटना ने प्रदेश में कानून व्यवस्था की बिगड़ती स्तिथि को स्पष्ट रूप से दर्शाया था और तत्कालीन सरकार को इसका परिणाम भी भुगतना पड़ा था। परन्तु ये अत्यंत खेदजनक है कि अन्वेषण एजेंसियां आजतक इसका संतोषजनक परिणाम नहीं निकाल पाई है। जिससे आज प्रदेश में कानून व्यवस्था पर आम जनता असमंजस की स्थिति में है। जिस प्रकार से इस अत्यंत संवेदनशील घटना की पुलिस या सीबीआई ने जांच की और लगभग तीन वर्ष बीतने के बावजूद कोई ठोस परिणाम नहीं निकल पाने से प्रदेश में कानून व्यवस्था पर बड़ा प्रशन चिन्ह खड़ा होता है।

चौहान ने आरोप लगाया कि इसी लचर कानून व्यवस्था के कारण आये दिन अपराधी महिलाओं की हत्या, बलात्कार व मारपीट कर खुले घूमते हैं परंतु न जाने किन कारणों से पुलिस इन गंभीर मामलों में भी कार्यवाही नहीं करती है। कई मामलों में तो FIR दर्ज भी नहीं की जाती हैं जिससे अपराधियों के हौंसले बुलंद होते है और आम जनता को डर के साए में रहने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार के गठन के समय भी कानून व्यवस्था एक बड़ी समस्या थी और इसी मुद्दे को लेकर जनता ने सरकार को प्रदेश में सत्तासीन किया था और सरकार ने कानून व्यवस्था दरुस्त करने का वायदा किया था। परन्तु एक वर्ष से अधिक समय बीतने के बावजूद कानून व्यवस्था दरुस्त करना तो दूर की बात बन गई है बल्कि यह बद से बदतर होती जा रही है और सरकार इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रही हैं। जिससे कानून व्यवस्था पर सरकार की विफलता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

सी.पी.एम. ने मांग की है कि मांग करती हैं कि दुष्कर्म के लिए दोषियों को तुरंत पकड़ कर कड़ी कानूनी प्रक्रिया अमल में लाई जाए तथा लापरवाही करने वाले दोषी पुलिस अधिकारियों के विरूद्ध भी तुरन्त कार्यवाही की जाए। पार्टी ने यह भी मांग कि है कि पीड़ित छात्रा को कम से कम सरकार 10 लाख की राशी दे। कानून व्यवस्था को दरुस्त करने के लिए मुख्यमंत्री तुरंत ठोस कदम उठाये। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार तुरन्त दोषियों को पकड़ कर कानूनी कार्यवाही नहीं करती व कानून व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त नहीं करती तो सी।पी।एम। जनता को लामबन्द कर आंदोलन करेगी।

वंही दूसरी और कांग्रेस ने प्रदेश की बिगड़ती कानून व्यवस्था पर चिंता ब्यक्त करते हुए कहा है कि राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा की पूरी पोल खुल गई हैं।पुलिस प्रशासन गहरी नींद में है।दिन दहाड़े चोरियां ओर डकैती तो आम बात हो गई है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने कहा है कि इस से बड़ी पुलिस की लाचारी ओर क्या हो सकती है कि पीड़ित महिला ने पुलिस से सुरक्षा मांगी जो उसे नही दी गई।

राठौर ने इसे सरकार की कमजोरी बताते हुए कहा की भाजपा सरकार महिलाओं की सुरक्षा की बड़ी बड़ी बातें तो करती है पर सुरक्षा में जुटी पुलिस ने पूरी व्यवस्था की पोल खोल दी है।

राठौर ने दोषी पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने की मांग करते हुए आरोपियों को तुरंत सलाखों के पीछे करने को कहा है।

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