चम्बा
चम्बा जिला में दर्ज किया गया 3.4 तीव्रता का भूकंप, लाहौल में भी महसूस हुए हल्के झटके
शिमला- हिमाचल प्रदेश के चम्बा ज़िले में मौसम विभाग शिमला के अनुसार वीरवार देर रात करीब 9 बजकर 13 मिनट पर भूकंप के झटके महसूस किए गए। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 3.4 दर्ज की गई और इसका केंद्र जमीन के अंदर पांच किलोमीटर निचे था।
झटके महसूस होने पर कई लोग अपने घरों से बाहर निकलकर खुले स्थानों की ओर से गए। भूकंप से किसी तरह के बड़े नुकसान की सूचना नहीं है,मामूली नुक्सान की आशंका जताई गई है।
चम्बा में आए इस भूकंप का असर लाहौल में भी दर्ज किया गया,वहां पर भी इसके हल्के झटके महसूस किए गए। उपायुक्त लाहौल-स्पीति नीरज कुमार ने कहा कि भूकंप से किसी भी तरह के नुकसान की सूचना नहीं है।
आपको बता दें कि इससे पहले भी चंबा में भूकंप आते रहे हैं।
अन्य खबरे
चंबा में कशमल माफिया बेखौफ, लोगों का आरोप वन अधिकारी नहीं उठाते फोन, गांव वालों को करना पड़ रहा विभाग का काम
चंबा – 15 मार्च – 2025 – चंबा के मंसरुड वन परिक्षेत्र में कशमल की अवैध तस्करी का कार्य जारी है,लेकिन वन विभाग की तरफ से इस अवैध तस्करी को जड़ से खत्म करने में ज्यादा रुचि नहीं दिखाई जा रही है। वन विभाग का कार्य अब स्थानीय लोगों को करना पड़ रहा है। अवैध रुप से ले जा रहे कशमल की गाड़ियों को रोकने के लिए अब ग्रामीण खुद आगे आ रहे हैं। ग्रामिणों का आरोप है कि बार – बार वन विभाग को अवैध तस्करी के बारे में सूचित भी किया जाता है, लेकिन वन विभाग की तरफ से समय पर कोई उचित कार्रवाई नहीं की जाती।
ग्रामिणों ने पत्थर लगाकर रोकी कशमल से भरी गाड़ी
वन मण्डल चंबा के मंसरुड वन परिक्षेत्र की त्रयोदी बीट के काला वन जंगल में निजी भूमि से कशमल उखाड़ने पर रोक लगी हुई है। उसके बावजूद भी काला वन जंगल के टिक्करी पंचायत से कुछ स्थानीय लोगों और ठेकेदारों द्वारा कशमल को निजी भूमि और सरकारी भूमि से उखाड़ने का कार्य दिन – रात जारी है। ग्रामिणों का कहना है कि 13 मार्च को उन्होनें मिलकर कशमल से भरी एक गाड़ी को रोकने की कोशिश की,लेकिन वे उसमें असफल रहे। इसके बाद 14 मार्च को शाम के पांच बजे के करीब अवैध रुप से ले जा रहे कशमल की एक पिकअप को पत्थर लगाकर रोका गया।
कुछ स्थानीय निवासियों ने नाम प्रकाशित न करने की शर्त पर हिमाचल वॉचर से बात की। इनमें से एक का कहना था” काला वन जंगल में सरकारी भूमि से अवैध रुप से कशमल उखाड़ी जा रही है। हमने शाम के पांच बजे के करीब अवैध रुप से ले जा रहे कशमल की एक पिकअप को रास्ते में पत्थर लगा कर रोका। हमने वन विभाग को इसकी सूचना भी दी। हमने वन विभाग के गार्ड को कॉल किया तो उसने कहा कि मैं छुट्टी पर हूं , मेरा बच्चा बिमार है। जब हमने बीओ मैडम को कॉल किया तो उन्होंने कहा कि वह अकेले फील्ड पर नहीं आ सकती। हमने आरो को कॉल किया तो उन्होने कॉल ही नहीं उठाई। इसके बाद हमने डीएफओ और सीसीएफ को कॉल की तब जाकर शाम 8 बजे के करीब वन विभाग की ओर से गार्ड को भेजा गया। इस दौरान हमने गाड़ी के साथ ड्राइवर को पकड़ कर रखा। हमें लगभग 4 घंटो तक गार्ड के आने का इंतजार करना पड़ा ”
रेंज ऑफिसर नहीं उठाते फोन,करीब डेढ़ महीने से जारी है अवैध तस्करी
एक निवासी ने बताया कि अवैध तस्करी का यह कार्य करीब डेढ़ महीने से जारी है। इससे पहले भी कशमल से भरी करीब 15-20 पिकअप देखी गई हैं। उन्होंने रोष जताते हुए रेंज ऑफिसर पर फोन न उठाने का आरोप भी लगाया है।
एक अन्य स्थानीय निवासी ने कहा “चाहे जंगल तबाह हो जाए पर आरो कॉल नहीं उठाते हैं। जब तक गार्ड पहुंचता है तब तक गाड़ी निकल जाती है। गार्ड थोड़ी देर गाड़ी का पीछा करने बाद खाली हाथ लौट आता है .”
माफिया बेखौफ उखाड़ रहे कशमल, आवाज उठाने वालों को मिल रही धमकियां
ग्रामिणों का कहना है कि त्रयोदी बीट में कशमल उखाड़ने पर रोक लगी हुई है। लेकिन इसके बावजूद भी कुछ स्थानीय लोग ठेकेदारों के साथ मिलकर इस अवैध तस्करी को बेखौफ अंजाम दे रहे है। जब लोगों ने उन्हें यह कार्य बंद करने के लिए कहा तो उल्टा उन्हें धमकाया गया। वहींं लोगों ने वन विभाग पर उचित कार्य न करने का आरोप लगाया है।
ग्रामिणों का कहना है कि वे समय-समय पर क्षेत्र में हो रही अवैध तस्करी के बारे में विभाग को अवगत करवाते रहे हैं, लेकिन विभाग की तरफ से कोई उचित कार्रवाई देखने को नहीं मिली है। लोगों का आरोप है कि वह विभाग के ढीले-ढाले रवैये से परेशान हैं। लोगों की मांग है कि वन विभाग को काला वन जंगल में नाका लगाना चाहिए और अवैध तस्करी के कार्य को रोकना चाहिए। चंबा में वन भूमि कशमल की अवैध तस्करी के कारण तहस-नहस हो चुकी है।
एच डब्ल्यू कम्युनिटी
घोटाला: चंबा के पहाड़ों को बंजर कर रही कशमल की अवैध तस्करी, वन विभाग पर लगा भ्रष्टाचार का गंभीर आरोप
चंबा: पहले पेयजल घोटाला, फिर रेत-बजरी ढुलाई का घोटाला और अब चंबा जिला में वन विभाग पर भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं। पिछले कुछ समय से चंबा जिला में कशमल की जड़ों को अवैध रुप से उखाड़ने और उनकी तस्करी का मामला काफी चर्चा में है।
इसी कड़ी में चंबा के मंसरुड वन परिक्षेत्र में कशमल तस्करी का मामला सोशल मीडिया और खबरों में छाया हुआ है। मंसरुड वन परिक्षेत्र के निवासी उनके इलाकों में हो रही कशमल की अवैध तस्करी के खिलाफ खुल कर आवाज़ उठा रहे हैं और प्रशासन की कार्रवाई पर भी सवाल कर रहे हैं। लोगों में कशमल की अवैध तस्करी को लेकर काफी रोष देखने को मिल रहा है।
मसरुंड वन परिक्षेत्र की जनता का वन विभाग पर आरोप
लोगों का आरोप है कि वन माफिया निजी भूमि की आड़ में वन भूमि से भारी मात्रा में कशमल उखाड़ रहा है। यह भी आरोप है कि वन माफिया बड़े पैमाने पर रात के अंधेरे में कशमल की तस्करी कर रहा है जिस पर विभाग सही से कार्रवाई नहीं कर रहा। यह बड़ी हैरानी की बात है सरकारी जमीन से इतने बड़े पैमाने पर कशमल उखाड़ने का काम हो रहा था और वन विभाग को इसकी कोई खबर ही नहीं थी। उनका यह भी कहना है कि यह काम काफी समय से चला आ रहा है।
लोगों का यह भी आरोप है कि वन विभाग कहीं न कहीं इस सब में शामिल है। हांलाकि यह पहली बार नहीं है जब वन विभाग पर भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं। वन रक्षक होशियार सिंह मामले को हिमाचल की जनता अभी भी भूली नहीं है।
कशमल क्या है ?
इससे पहले की हम इस आरोपित घोटाले पर और बात करें आइए जान लेते हैं कि कशमल होता क्या है और इसकी तस्करी क्यों की जाती है।
कशमल एक झाड़ीदार औषधीय पौधा (झाड़ी) है जो हिमालयी क्षेत्र में पाया जाता है। इसकी जड़ों का इस्तेमाल आयुर्वेदिक दवाईयां बनाने में किया जाता है। पीलिया, मधुमेह और आंखों के संक्रमण के इलाज के लिए कशमल की जड़ों से दवाइयां बनाई जाती है। कैंसर के इलाज के लिए भी इस पर शोध किया जा रहा है।
कशमल सबसे ज्यादा वन भूमि पर पाया जाता है। कशमल निकालने के लिए कुछ कानून बनाए गए है। सरकारी ज़मीन से कशमल उखाड़ना अपराध है। सिर्फ निजी भूमि से ही कशमल उखाड़ने की अनुमति है। लेकिन निजी भूमि से भी कुल उपज का केवल 40% कशमल उखाड़ने की अनुमति है।
अगर आप अपनी निजी भूमि से कशमल उखाड़ना चाहते है तो इसके लिए आपको पहले वन विभाग से अनुमति लेनी होगी। इसके बाद वन विभाग जांच करता है कि आपकी जमीन पर कितनी कशमल है। अनुमति मिलने के बाद ही कशमल उखाड़ सकते है और बेच सकते हैं। विभाग इस सब का रिकॉर्ड रखता है। ठेकेदार किसानों से कशमल खरीदते है और दूसरे राज्यों में बेचते हैं।
निजी भूमि की आड़ में वन भूमि से उखाड़ी जा रही कशमल
मंसरुड वन परिक्षेत्र में लोगों का आरोप है कि वन भूमि से कशमल उखाड़ कर बेचने का काम अंधाधुंध तरीके किया जा रहा है पर मामले की जांच सही तरीके से नहीं की जा रही।
हिमाचल वॉचर ने इस मामले में जब स्थानीय लोगों से बातचीत की तो स्थानीय निवासी कपिल शर्मा ने बताया कि उन्होनें कईं दफा वन विभाग, आरो, और डीएफओ को इस अवैध खनन की शिकायतें भी भेजी, लेकिन इस मामले पर कोई खास कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने कहा कि लगातार सोशल मीडिया पर सबूत पेश करने के बावजूद कोई ढंग की कार्यवाही नहीं हुई।
वहीं 8 जनवरी को विजिलेंस विभाग की टीम ने एक गुप्त शिकायत मिलने पर मसरूण्ड रेंज का दौरा किया, जहां से टनों के हिसाब से कश्मल के ढे़र जब्त किए गए। इस दौरान कुछ मजदूर कशमल के टुकड़ों को गाड़ियों में भरते हुए भी पाए गए। कामगारों से पूछताछ भी की गई लेकिन टीम को मौके पर न तो कोई ठेकेदार मौजूद दिखा और न ही कशमल की खरीद-फराेख्त का कोई रजिस्टरी रिकॉर्ड मिला।
लगातार शिकायतों के बाद 10 जनवरी को चंबा वन मंडल अधिकारी कृतज्ञ कुमार ज़मीनी स्तर पर अपनी टीम के साथ जांच के लिए पहुंचें। उनका कहना था “वन भूमि पर किसी भी तरह का अवैध कशमल नहीं मिला है। वन विभाग हर गतिविधि पर नजर रखे हुए है, जगह-जगह नाके भी लगाए गए हैं। विभाग ने 4 जनवरी से कशमल के दोहन पर रोक लगा दी है। अगर कोई व्यक्ति कशमल को उखाड़ता या ढुलान करता पाया गया तो उस पर कार्रवाई होगी।”
इस पर कपिल शर्मा ने पत्रकार वार्ता में कहा कि “मसरूण्ड रेंज में टनों के हिसाब से वन भूमि से कश्मल का अवैध रूप से दोहन हुआ है लेकिन विभाग की टीम ने सिर्फ सड़क किनारे जाकर ही चेकिंग की, और वापिस आ गई।”
मसंरुड के स्थानीय निवासियों का कहना है कि कशमल के दोहन पर रोक लगने के बावजूद भी काम जारी रहा। लोग वन विभाग की कार्रवाई से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं है। लोगों ने खुद वन भूमि पर जाकर वहां से उखाड़ी गई कशमल की जड़ों की विडियोज सोशल मीडिया पर साझा भी किए।
यही हाल हिमगिरि रेंज का भी है। इससे पहले हिमगिरी रेंज में भी विजिलैंस विभाग ने 8 कविंटल अवैध कशमल जब्त की थी जबकि वहां भी कशमल उखाड़ने पर रोक लगाई जा चुकी थी। लेकिन उसके बाद भी सड़कों के किनारे जगह–जगह पर कशमल के ढेर देखने को मिले रहे थे।
वन विभाग की टीम ने मंसरुड का फिर से दौरा किया। कशमल की अवैध डंपिग के साथ कशमल से भरी गाड़ियां भी देखने को मिली। रिकॉर्ड चेक किए गए तो उनमें भी कुछ खास जानकारी नहीं मिली कि किसके नाम पर यह कशमल उखाड़ी गई है।
ग्रामीणों का आरोप है कि जब उन्होने एकजुट होकर खुद वन विभाग की टीम को वन भूमि से उखाड़ी गई कशमल के सबूत दिखाए तो उस वक्त टीम के पास बोलने के लिए कुछ नहीं था।
वहीं सोशल मीडिया पर गांव की एक महिला विडियो में वन विभाग के अधिकारियों के सामने यह बताती हुई नजर आई कि किस तरह अभी भी वन माफिया अवैध रुप से वन भूमि से कशमल चुरा कर ले जा रहे है। महिला ने साफ-साफ आरोप लगाते हुए कहा कि वन गार्ड भी अवैध कार्यों में शामिल है।
ग्रामीणों का कहना है कि तस्करों ने वन भूमि से करीब 400-500 साल पुरानी कशमल की जड़ों को भी उखाड़ लिया है। वन भूमि पूरी तरह से तहस-नहस कर दी गई है। फिर भी वन विभाग ने इस पर समय रहते कोई कार्रवाई नहीं की।
इसी बीच 24 जनवरी को हुई बैठक में मंत्रिमंडल ने कशमल के निष्कर्षण पर लगी रोक और कशमल की परिवहन की अवधि को 15 फरवरी तक बढ़ा दिया है। इस फैसले को ग्रामीणों ने उचित नहीं बताया है। उनका कहना है कि, इस दौरान और भारी मात्रा में कशमल के अवैध दोहन की आशंका है और कशमल के जितने भी ढेर लगे है उनकी पूरी जांच के बाद ही उनके ढुलान की अनुमति मिलनी चाहिए। लोगों का कहना है कि निजी भूमि पर उतना कशमल है ही नहीं जितना गाड़ियों में भरा जा रहा है और डंपिग में देखा जा रहा है।
लोग पूछ रहे हैं कि आखिर क्यों वन विभाग इतने नाके लगाने और पैट्रोलिंग के बाद भी मंसरुड में हो रहे कशमल के अवैध कटान को नहीं रोक पा रहा है। लोगों का यह भी आरोप है कि वन विभाग सिर्फ नाम की कार्रवाई करता है। इतनी शिकायतें भेजने के बाद भी सही से एक्शन क्यूं नहीं लिया गया? जितनी भी डंपिंग पड़ी है उनकी जांच क्यों नहीं की जा रही?
वन माफिया तीसा से हिमगिरी ब्लॉक में पहुंचा रहा कशमल
हाल ही में एक और खबर देखने को मिलती है जिससे एक बात तो सपष्ट है कि चंबा में वन माफिया बेखौफ और सक्रिय है। रात के अंधेरे में कशमल का वन भूमि से दोहन किया जा रहा है। 27 जनवरी को तीसा पुलिस ने रात को कशमल की गाड़ी के साथ पाँच लोगों को गिरफतार किया जो कशमल को अवैध रुप से ले जा रहे थे। यह तस्कर तीसा से हिमगीरी ब्लॉक में कशमल पहुंचा रहे थे।
इसी तरह सलूनी में कशमल से भरी एक गाड़ी को जब वन विभाग की टीम ने रुकने का ईशारा किया तो गाड़ी चैक पोस्ट का बैरियर तोड़ कर ही निकल गई। हांलाकि विभाग की टीम ने करीब डेढ़ किलोमीटर की दूरी पर गाड़ी को कब्जे में ले लिया था।
मसरुंड वन परिक्षेत्र की जनता ने बुलाई चिंतन बैठक
मसंरुड वन परिक्षेत्र की जनता कशमल की अवैध तस्करी से परेशान हो चुकी है। इस विषय पर ग्रामीणों ने एक चिंतन बैठक भी की और लोगों को जागरुक भी किया कि उनके क्षेत्र में इन दिनों कशमल उखाड़ने के नाम पर अवैध कार्य चल रहा है। लोग सिर्फ कशमल के अवैध दोहन से ही परेशान नहीं है। लोगों का कहना है कि ठेकेदारों द्वारा उन्हें ठगा जा रहा है। ठेकेदार लोगों से 10-20 रुपए प्रति किलो के भाव से में कशमल खरीदते है और खुद वही कशमल बाहर के राज्यों में 500-600 रुपए किलो में बेचते है।
कशमल के अवैध कटान पर्यावरण के लिए बना बड़ा खतरा
कशमल का अवैध कटान पर्यावरण के लिए भी एक बहुत बड़ा खतरा है। जड़ेरा पंचायत के पर्यावरणविद रत्नचंद का कहना है कि कशमल एक समृद्ध झाड़ी है, जिसका पर्यावरण के लिए एक अहम योगदान भी है। कशमल का मूल्यांकन कुछ रुपयों से नहीं किया जा सकता। आने वाले से समय में कशमल के दोहन का बुरा प्रभाव प्रकृति पर देखने को मिलेगा। कशमल की जड़े काफी गहराई मे ज़मीन के अंदर तक समाई होती है। यह जड़ें मिट्टी को जकड़ कर रखती है। इस पर लगे फल जंगली जानवरों और पक्षियों का भोजन है, जिसके कारण किसानों की फसलें जानवरों से भी बची रहती है। कशमल के अवैध दोहन से भूमि कटाव जैसी समस्यांए देखने को मिलेगी और यह पौधा खत्म होने की कगार तक पहुंच सकता है। उनका कहना है कि यह अवैध तस्करी का कार्य जल्द से जल्द बंद होना चाहिए।
वहीं एक दैनिक अंग्रेजी अखबार के अनुसार चंबा के वन संरक्षक अभिलाष दामोदरन ने कश्मल के बड़े पैमाने पर निष्कर्षण से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग जो निजी संपत्ति से कश्मल निष्कर्षण के लिए परमिट प्राप्त करते हैं, वे सरकारी भूमि में अतिक्रमण करते हैं और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की गई है। इस खबर के अनुसार एक क्विंटल कश्मल की जड़ों से एक किलोग्राम पाउडर बनता है, जिसे बाजार में एक लाख रुपये प्रति किलोग्राम से अधिक की कीमत पर बेचा जाता है और इसकी कीमत काफी हद तक उत्पाद की गुणवत्ता और मांग पर निर्भर करती है।
आवाज़ उठाने पर ग्रामीणों को मिल रही धमकियां
स्थानाीय लोगों ने सरकार से इस मामले पर गंभीरता दिखाने की मांग की है। उनका कहना है कि इस तरह कशमल खत्म होने की कगार पर पहुंच जाएगी। कशमल ग्रामीणों के लिए एक रोजगार का साधन है और उनके पालतू जानवरों के लिए चारे का काम भी करता है।
ग्रामीणों ने हिमाचल वॉचर से बातचीत के दौरान बताया कि उन्हें कशमल की अवैध तस्करी के खिलाफ आवाज़ उठाने पर अब धमकियां भी दी जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ स्थानीय लोग और ठेकेदार जो अवैध कार्य में लिप्त है वे उनकी आवाज़ बंद करने के लिए पुलिस में झूठी शिकायतें दर्ज करवा रहे हैं।
ग्रामीणों नें भी इस संबध में उन लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई है। ग्रामीणों के अनुसार एसपी अभिषेक यादव ने उन्हें आशवासन दिया है कि वे इस मामले की पूरी छानबीन करेंगे। वहीं ग्रामीणों का कहना है कि वे सब पुलिस के साथ मिलकर पूरे मामले की छानबीन में मदद करने के लिए तैयार हैं और कशमल के वन भूमि से हो रहे अवैध दोहन के सारे साक्ष्य उनके सामने पेश करेंगे।
ग्रामीण वन विभाग की कार्रवाई से संतुष्ट नहीं है। उनका आरोप है कि वन विभाग आंखे मूंद कर कशमल का वन भूमि से दोहन देखता रहा। उनका यह भी आरोप है कि सरकार इस मामले में वन विभाग को जांच का जिम्मा तो बिल्कुल भी न सौंपे क्योकि उन्हें वन विभाग से कोई निष्पक्ष कार्रवाई की उम्मीद नहीं है।
उनकी मांग है कि अभी जितने भी कशमल के ढेर लगे है उनकी जांच किए बिना किसी भी गाड़ी को भरने की अनुमति न दी जाए। उनका यह भी कहना है कि अगर इस मामले में अब कोई निष्पक्ष जांच नहीं करवाई गई तो मसरुंड वन परिक्षेत्र की सभी पंचायतें धरना प्रदर्शन करने के लिए तैयार हैं। उनका कहना है कि जब तक इस मामले में सही से एक्शन नहीं लिया जाता तब तक वे चुप नहीं बैठेंगे।
अन्य खबरे
पुलिस की समयोचित कार्रवाई के बावजूद भाजपा का प्रदर्शन व आरोपी का घर जलाना ओछी राजनीति : मुख्यमंत्री
चंबा – मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंदर सिंह सुक्खू ने चम्बा जिला के सलूणी में हुए हत्याकांड के मामले में भारतीय जनता पार्टी द्वारा किए जा रहे प्रदर्शन पर गहरा क्षोभ व्यक्त करते हुए कहा कि यह शायद देश का पहला ऐसा मामला है जिसमें सभी आरोपियों को पकड़ा जा चुका है और पुलिस की समयोचित कार्रवाई के बावजूद भाजपा इस पर शोर-शराबा जारी रखे हुए है। उनका यह प्रदर्शन पूर्णतया अवांच्छित है और इसे न्यायसंगत नहीं कहा जा सकता।
मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले में शामिल सभी लोगों की गिरफ्तारी के बावजूद घटना के पाँच दिनों के बाद भाजपा युवा मोर्चा से जुड़े लोगों ने आरोपी के घर को आग की भेंट चढ़ा दिया।
प्रदेश सरकार की ओर से बार-बार आश्वस्त किया गया है कि इस मामले में संलिप्त सभी दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने कहा कि आरोपियों की गिरफ्तारी के बावजूद विरोध प्रदर्शन समझ से परे है और भाजपा इस मामले में ओछी राजनीति कर रही है।
मुख्यमंत्री सुक्खू ने कहा कि इस मामले की संवदेनशीलता को देखते हुए पुलिस ने चौबीस घंटों के भीतर सभी आरोपियों को हिरासत में ले लिया। उन्होंने कहा कि आरोपियों की गिरफ्तारी तथा सरकार द्वारा राष्ट्रीय जांच एजैंसी से मामले की जांच करवाने सम्बंधी मांग स्वीकार करने के बावजूद भाजपा द्वारा विरोध प्रदर्शन जारी रखना तर्कहीन है।
मुख्यमंत्री नें यह भी कहा कि केंद्र में सत्ता में होने के बावजूद भाजपा जांच को मुद्दा बना रही है जबकि नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के लिए एक फोन कॉल पर यह जांच शुरू करवाना कोई बड़ी बात नहीं है। उन्होंने कहा कि इससे प्रतीत हो रहा है कि इस घटना को राजनीतिक रंग देते हुए भाजपा आगामी लोकसभा चुनाव-2024 को ध्यान में रखते हुए ऐसी तरकीबें अपना रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि बेहतर यह होता कि भाजपा प्रदेश हित से जुड़े मामलों एवं हिमाचल के अधिकारों के लिए केंद्र के समक्ष आवाज उठाती, जिससे कि प्रदेशवासियों का भी भला होगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के हितों को प्राथमिकता देने के लिए आन्दोलन में कांग्रेस पार्टी भी अपना पूर्ण सहयोग देगी। राज्य के हितों की रक्षा करने की दिशा में प्रदेश सरकार तथा विपक्ष की साझा जिम्मेदारी पर बल देते हुए उन्होंने जल उपकर तथा विभिन्न जल विद्युत परियोजनाओं में निःशुल्क बिजली की रॉयल्टी बढ़ाने जैसे मुद्दों पर भाजपा को प्रदेश सरकार का साथ देने का परामर्श भी दिया।
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