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अकादमी के शिखर पुरस्कारों के वितरण में हेरा-फेरी, साल पूरा होने से पहले ही बाटें जा रहे साहित्य पुरस्कार:गुरुदत

शिमला- हिमाचल कला, संस्कृति-भाषा अकादमी के सचिव की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार वर्ष 2017 के तीन शिखर सम्मानों के लिए आगामी 26 अगस्त तक उपलब्धियों के विवरण सहित प्रविष्टियां मांगी गई हैं। उल्लेखनीय है कि 2016 के शिखर पुरस्कार गत् मार्च 2017 में दिए गए थे और अब पांच महीने बाद 2017 के पुरस्कार देने की भी तैयारी है, जबकि वर्ष 2017 के अभी चार महीने शेष हैं।

किसी भी वर्ष के पुरस्कारों के लिए प्रविष्टियां वर्ष पूरा होने के बाद ही आमंत्रित की जाती है, क्योंकि साहित्यकार और कलाकार वर्ष के अंत तक नई उपलब्धियां हासिल कर सकते हैं।

हिमाचल सर्वहितकारी संघ के अध्यक्ष एवं साहित्यकार गुरुदत शर्मा ने कहा कि किसी वर्ष के पुरस्कार अग्रिम रूप से देना किसी भी सूरत में नियमानुकूल नहीं कहे जा सकते। इस तरह तो अकादमी आगामी वर्षों के पुरस्कार भी अग्रिम रूप से दे देगी। पुरस्कार देना लाखों की राशि बांटना ही नहीं होता, बल्कि साहित्यकारों-कलाकारों की नियत अवधि के भीतर की रचनात्मक उपलब्धियों का सही मूल्यांकन होना चाहिए।

गुरुदत शर्मा ने कहा कि साहित्य के पिछले शिखर सम्मान को लेकर भी विवाद हुआ था, तब बिना सूचना दिए चुपचाप अकादमी के चंद सदस्यों को बैठाकर ही लाख रुपये के पुरस्कार बांट दिए गए थे।

इस बार अग्रिम रूप से पुरस्कृत करने का सीधा मतलब है कि वर्ष के अंत में होने वाले चुनावों से पहले ही वे पुरस्कार भी बांट देने हैं जो कायदे से वर्ष 2017 की उपलब्धियों का मूल्यांकन करके वर्ष 2018 में दिए जाने चाहिए। अकादमी के अधिकारी शायद ये मानकर चल रहे हैं कि आगे ये सरकार नहीं आएगी, इसलिए अभी अग्रिम मनमानी कर लें।

इस संदर्भ में गुरुदत शर्मा ने कहा कि किसी भी पुरस्कार की प्रविष्टियां मांगने के लिए कोई भी संस्था बाकायदा विज्ञापन जारी करती है, जिसमें नियमों आदि का उल्लेख भी किया जाता है। इस तरह प्रेसनोट जारी करके बेगार टालने का मतलब है कि इस योजना में बहुत जल्दी में पिछली बार की तरह मनमानी की जानी है।

साहित्यकार गुरुदत शर्मा ने कहा कि संसथा की ओर से अकादमी के अध्यक्ष तथा प्रदेश के मुख्यमंत्री को पत्र लिखा गया है कि इस सबसे बड़े पुरस्कार के नियम पहले प्रकाशित करके जाहिर किए जाएं और वर्ष 2017 के पुरस्कार साल पूरा होने पर देने के निर्देश जारी किए जाएं ताकि इस अकादमी की कार्यप्रणाली मजाक न बने।

उन्होंने कहा कि किसी पुरस्कार के लिए प्रकाशित साहित्य का मूल्यांकन जरूरी है। शिखर पुरस्कार के लिए कोई पुस्तकें नहीं मांगी जा रही। इसलिए इसमें मनमानी होने की पूरी संभावना है।

शर्मा ने कहा कि अकादमी के संविधान के अनुसार कार्यकारिणी के अध्यक्ष हिमाचल सरकार के भाषा-संस्कृति सचिव होते हैं लेकिन इस पद को किनारे करके संस्था के सचिव का पद भी नियमानुसार नहीं भरा गया। इसलिए अकादमी में चंद लोगों की मनमानी चल रही है।

उन्होंने कहा कि कम से कम साहित्य एवं कला-संस्कृति के क्षेत्र में तो उचित नियमानुसार काम होना चाहिए। गुरुदत शर्मा ने प्रदेश के साहित्यकारों व कलाकारों से भी अनुरोध किया कि अकादमी में चल रही मनमानी का विरोध करके इसके अनियमित कार्यक्रमों का बहिष्कार करें।

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10 कार्यकर्ताओं के निष्कासन पर ऐबीवीपी का धरना प्रदर्शन,विश्वविद्यालय पर एक तरफा कार्यवाही का लगाया आरोप

ABVP Protest at HPU over suspension of members 2

शिमला– आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद इकाई ने विश्वविद्यालय में पिंक पेटल्स चौक पर धरना प्रदर्शन किया । इकाई सचिव अंकित चंदेल ने जानकारी देते हुए बताया की पिछले कल विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से एक तनशाही फैसला निकाला गया जिसमें 10 ऐबीवीपी कार्यकर्ताओं को विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया गया।

गौरतलव है की पिछले 11 जुलाई को विद्यार्थी परिषद ने कैम्पस मे धरना प्रदर्शन किया था जिसके चलते 10 छात्रों का निष्काशन कर दिया है।

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धरने को संबोधित करते हुए इकाई सचिव अंकित चन्देल ने बताया की एक तरफ जब कर्मचारियों द्वारा कुलपति कार्यालय में नारेबाजी की जाती है तो उन कर्मचारियों क खिलाफ कुलपति साहब की कोई प्रतिक्रिया नही आती, परन्तु जब ऐबीवीपी कैम्प्स में धरना प्रदर्शन करते है तो उन्हें तुरन्त प्रभाव से निष्कासित कर दिया जाता है जोकि सरासर एकतरफा कार्यवाही है।

चन्देल ने कहा कि विश्वविद्यालय अपनी कमियों को छुपाने क लिए तरह-2 के हथकण्डे अपना रहा है। जहाँ अधूरे परिणामों की वजह से प्रदेश भर के छात्र परेशानी में हैं वहीँ प्रशासन अपने मुंह मिया मिठु बनने में कोई कसर नही छोड़ता।

ABVP Protest at HPU over suspension of members

चन्देल ने कहा कि सभी को ज्ञात है विवि में नौ महीने में पीएचडी (P.hD) और एमसीऐ (MCA) में फर्जी तरीके से प्रवेश के मामले सामने आते है, और इन सभी गडवड़ियों के विरोध करने वाले छात्र संगठनों की आवाज को दबाने का प्रयास विश्वविद्यालय प्रशासन् कर रहा है।

धरने क माध्यम से प्रशासन को चेताते हुये परिषद ने मांग उठाई विश्वविद्यालय अपना काम करे न कि छात्र संगठनों के कार्य मे दखल दे। ऐबीवीपी ने चेतावनी दी है कि जल्द से जल्द परिषद कार्यकर्ताओं का निष्कासन् वापिस नही करता है तो प्रदेश स्तरीय आंदोलन करने में कोई गूरेज़ नही होगाI ऐबीवीपी ने साथ ही यूजी UG के सभी परीक्षा परणामों को पूरा करने की मांग भी प्रशासन के सामने रखी है।

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सेब के सर्मथन मुल्य में मात्र 50 पैसे बढ़ौतरी बागवानों से भद्दा मजाकः राठौर

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शिमला -हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा सेब के सर्मथन मुल्य में की गई मात्र 50 पैसे की बढ़ौतरी को बागवानों के साथ किया गया भद्दा मजाक करार दिया है।

आज शिमला से जारी प्रेस वयान में कुलदीप सिंह राठौर ने बताया कि वर्तमान समय में जब बागवानों को अपनी फसल तैयार करने के लिए भारी मंहगाई का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि जी.एस.टी के चलते सेब से संबंधित पैकिंग से लेकर फफूंद नाशक दवाईयां एवं अपनी फसलों को मंण्ड़ियों तक पहुॅचाने के लिए किराया भी कई गुणा बढ़ गया है इसके चलते सेब के सर्मथन मुल्य कम से कम 10 रूपये होना चाहिए।

कुलदीप राठौर ने कहा कि सेब इलाकों में बहुत जगह सड़कों की हालत खराब पड़ी है और सेब को मण्ड़ियों तक पहुॅचाने वाले ट्रक व गाड़ियों के मालिक खराव सडकों पर गाडियाॅं भेजने को मना कर रहे हैं इसलिए सरकार को चाहिए कि ख़राब सडकों को जल्दी से जल्दी ठीक करवायें।

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हिमाचल सरकार पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे : कर्मचारी नेता

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शिमला -हिमाचल प्रदेश कर्मचारी महासंघ के पूर्व अध्यक्ष सुरेन्द्र मनकोटिया, पूर्व सयुक्त सचिव सेन राम नेगी,पूर्व प्रेस सचिव हरीश गुलेरिया, गैर शिक्षक महासंघ के महासचिव दीप राम शर्मा ,इंदिरागांधी आयुर्विज्ञान मेडिकल कॉलेज के पूर्व महासचिव आत्मा राम शर्मा ने प्रदेश सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद करने के निर्णय की आलोचना करते हुए इसे कर्मचारी विरोधी बताया है।

कर्मचारी नेताओं का कहना है कि जब जब प्रदेश में भाजपा सरकार सत्ता में आई तब तब प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद किया गया,जो कि कर्मचारियों के साथ अन्याय है।

कर्मचारी नेताओं ने जयराम सरकार की आलोचना करते हुए कहा है कि भाजपा कभी भी कर्मचारी हितेषी नही रही है।पूर्व में धूमल सरकार ने भी सत्ता में आते ही इसे बंद किया था अब बर्तमान में जयराम सरकार ने भी ऐसा ही किया है।उनका कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रख कर इसे खोला था।इसे खोलने का एक ही उद्देश्य था कि जो सरकार के किसी भी गलत फैंसले को चुनौती देने के लिए स्वतंत्र था और उसे जल्द और सस्ता न्याय मिल जाता था।

नेताओं का कहना है कि अब ऐसा नही होगा।किसी भी कर्मचारी को न्याय के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना होगा जहां पहले ही हजारों मामले सुनवाई के लिए लंबित पड़े है।

कर्मचारी नेताओं ने मुख्यमंत्री जयराम से आग्रह किया है कि वह इस मामले पर पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे। इसे उन्हें अपनी किसी भी प्रतिष्ठा का प्रश्न नही बनना चाहिए।

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