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सभी चित्र हिमाचल वॉचर

शिमला उमंग फाउंडेशन द्वारा विकलांग लड़की अनीतू का मामला उठाए जाने और राष्ट्रीय महिला आयोग के संज्ञान लेने के बाद आज उसे शिमला लाकर दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में उसकी डॉक्टरी जांच की गई। बाद में उसे मशोबरा स्थित राज्य सरकार के नारी सेवा सदन भेजा दिया गया। वह जीवन में पहली बार दुर्गम गांव कुंगल बाल्टी से बाहर आई और पहली बार उसे डॉक्टरों ने देखा। डॉक्टरों ने कहा कि वह मंदबुद्धि है और शारीरिक रूप से भी विकलांग है।

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जाँच के लिए जाती अनीतू

उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव ने बताया कि रामपुर के तहसील कल्याण अधिकारी शशि ठाकुर उप तहसील ननखड़ी में अनीतू के गांव कल रात में ही पहुँच गए थे। अनीतू के साथ उसकी दो मौसियां पार्वती और बिंदु भी आई हैं।

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अनीतू की दो मौसियां पार्वती और बिंदु डीडीयू अस्पताल में

अनीतू को दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल के मेडिसिन विभाग के डॉ. राकेश शांडिल ने देखा। इस मौके पर हड्डीरोग विशेषज्ञ डॉ. लोकेन्द्र मोकटा और चिकित्सा अधीक्षक भी उपस्थित थीं। डॉ. शांडिल और डॉ. मोकटा का कहना था कि अनीतू को तुरंत किसी दवा इलाज की जरूरत नहीं है।

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डीडीयू में नीतू की जाँच करते डॉक्टर

जिला कल्याण अधिकारी केशू राम गर्ग ने कहा कि फिलहाल अनीतू को मशोबरा के नारी सेवा ददन में अस्थाई तौर पर भर्ती किया है। बाद में उसे कुल्लू के कलाथ में एक स्वयंसेवी संस्था द्वारा चलाये जारहे अनाथ महिलाओं के आश्रम में भेज दिया जाएगा। इस मौके पर उमंग फाउंडेशन की और से अजय श्रीवास्तव के अलावा ट्रस्टी विमला ठाकुर, सुरेन्द्र कुमार और हिमाचल वॉचर से तरुण शारदा भी मौजूद थे।

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अनीतू की दो मौसियां पार्वती और बिंदु डीडीयू अस्पताल में

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