आईजीएमसी स्टॉक में मिली खून लगी व खराब सिरिंज, पहले भी आ चुका है यूज्ड सिरिंज का मामला

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igmc shimla

शिमला- आईजीएमसी अस्पताल में खराब सिरिंज का मामला सामने आया है। आईजीएमसी में पहुंचे सिरिंज के स्टॉक में कई सिरिंज खराब पाई गई। इसका खुलासा तब हुआ, जब बुधवार को आपातकाल में पहुंचे सिरिंज के स्टॉक में कुछ सिरिंज खराब निकलीं। सूत्रों के अनुसार आईजीएमसी में पहुंचे (पांच एमएल) सिरिंज के स्टॉक में जहां एक सिरिंज की सूई मुड़ी हुई थी, जबकि एक अन्य सिरिंज में कुछ बाल मिले हैं। खराब सप्लाई मिलने के बाद आईजीएमसी प्रशासन ने तुरंत सिरिंज की सप्लाई को रोक दी। स्टॉक को भी वापस कर दिया।

जान से क्यों किया जा रहा खिलवाड़

आईजीएमसी में खराब सिरिंज आने का मतलब सीधे तौर पर मरीजों की जान से खिलवाड़ हो सकता है। हालांकि बताया जा रहा है कि इसमें एक सिरिंज में कुछ खून के धब्बे भी थे, मगर अधिकारियों का दावा है कि सिरिंज में वैक्यूम नहीं बन रहा था। ऐसे में सप्लाई को बंद किया गया है। मामले में अभी तक जांच के आदेश नहीं दिए गए हैं। माना जा रहा है कि कंपनी को एक मोहलत देकर छोड़ दिया गया है।

सिविल सप्लाई को दिया है काम

आईजीएमसी में सिरिंज की सप्लाई का कार्य सिविल सप्लाई काे दिया गया है। सिविल सप्लाई ही कंपनी को सिरिंज सप्लाई के लिए टेंडर करती है। रोजाना आईजीएमसी में आपातकाल समेत अन्य वार्डों में आने वाले सैकंडों मरीजों का ब्लड इन्हीं सिरिंज से लिया जाता है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि सिविल सप्लाई आईजीएमसी में खराब सिरिंज की सप्लाई कर रहा है। यह सिरिंज आईजीएमसी के अपातकाल के अलावा आॅपरेशन थियेटर, वार्डों में में भी सप्लाई की जाती हैं।

प्रशासन की लापरवाही

खराब सिरिंज मामले की आईजीएमसी के विभिन्न वार्डों में दिनभर चर्चा रही। हर वार्ड में नर्सें व डाॅक्टरों के बीच खराब सिरिंज का मामला गर्माया रहा। हालांकि खुलकर इस मामले में कोई सामने नहीं आया। सूत्रों की माने तो इस तरह की सिरिंज पहले भी कई बार आईजीएमसी में आ चुकी है। अभी तक प्रशासन ने इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया है। मामले में अधिकारियों का तर्क यह भी है कि आईजीएमसी में कई नर्सिंग काॅलेज से प्रशिक्षु नर्सें आती हैं। उन्हें ठीक ढंग से इंजेक्शन लगाना नहीं आता। ऐसे में सप्लाई के खराब होने के बारे में भी कुछ नहीं कहा जा सकता।

पहले भी आ चुका है यूज्ड सिरिंज का मामला

आईजीएमसी में इससे पहले भी यूज्ड सिरिंज का मामला आ चुका है। इससे पहले भी सितंबर, 2014 एक मरीज का तीमारदार ट्यूब काउंटर से सिरिंज खरीद कर लाया था, जैसे ही माइक्रोबॉयोलॉजी विभाग के लैब तकनीशियन ने सिरिंज का पैकेट खोला तो उसमें खून की कुछ बूंदें मौजूद थी। यह सिरिंज एक निजी काउंटर से लाई गई थी। उस समय भी प्रशासन ने काउंटर को सील कर दिया था। इस मामले में पुलिस में एफआईआर भी दर्ज की गई थी। कई दिनों तक मामले ने तूल पकड़ा था। अब दोबारा से खराब सिरिंज का मामला आने से सवालिया निशान उठने लगे हैं।

Photo: Trib Wpix/ Representational Image

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