विधायकों, मंत्रियों के वेतन में 40-70% बढ़ोतरी लेकिन पंचायत सदस्यों के भत्ते में महज 25 रुपये

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पहले पंचायत सदस्यों को 200 रुपये मिलते थे, अब इसे बढ़ाकर 225 रुपये किया गया है, अब विधायकों और मंत्रियों के वेतन भत्तों में अत्यधिक वृद्धि पर विरोध और तेज हो गया है,जनता के नुमाइंदों को अपनी जेब से पैसा खर्च करके जनता के बीच जाना पड़ रहा है

शिमला- प्रदेश सरकार ने एक्ट में संशोधन कर मंत्री, सीपीएस और विधायकों के वेतन और भत्तों में 40 से 70 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी लेकिन पंचायत सदस्यों के भत्ते में महज 25 रुपये की बढ़ोतरी की है। इन सदस्यों को यह भत्ता भी तभी मुहैया होगा जब यह बैठक में भाग लेंगे।

पहले पंचायत सदस्यों को 200 रुपये मिलते थे, अब इसे बढ़ाकर 225 रुपये किया गया है। इसी तरह मेयर, डिप्टी मेयर, जिला परिषद अध्यक्ष और नगर पंचायत अध्यक्षों के मानदेय में नाममात्र बढ़ोतरी की है। पांच साल से लेकर अब तक इनके मानदेय में 1500 रुपये से लेकर दो हजार रुपये तक की बढ़ोतरी की है।

इन नुमाइंदों की ओर से यह मामला सरकार के समक्ष भी उठाया गया लेकिन सरकार ने सिर से बला टालकर उनके मानदेय में आंशिक बढ़ोतरी की। जबकि यह नुमाइंदे भी विधायकों की तर्ज पर अपने अपने क्षेत्रों में सेवाएं देते हैं।

हिमाचल में जनता के नुमाइंदों के मानदेय और वेतन में अलग-अलग मापदंड है। प्रदेश सरकार ने वर्ष 2016-17 में जिला परिषद अध्यक्ष के मानदेय में मात्र 15 सौ रुपये की बढ़ोतरी की। इसकी तरह से उपाध्यक्ष का मानदेय 4500 से बढ़ाकर 6000 रुपये किया गया।

जानिए किसका कितना मानदेय बढ़ा

पंचायत समिति अध्यक्ष का मानदेय 3500 से बढ़ाकर 5000 रुपये जबकि उपाध्यक्ष का 2400 से बढ़ाकर 3500 रुपये किया गया। प्रधान के मानदेय में महज 900 रुपये की बढ़ोतरी की है। इन्हें अब 3000 रुपये मानदेय किया गया।

इसी तरह उपप्रधान का मानदेय 1800 रुपये से बढ़ाकर 2200 रुपये किया गया है। शहरी निकाय की बात करें तो मेयर को पहले 6500 रुपये मानदेय मिलता था, इसे अब 8000 रुपये जबकि डिप्टी मेयर के लिए 4500 रुपये से बढ़ाकर 6000 रुपये मानदेय किया गया है।

नगर पंचायत अध्यक्ष का मानदेय 2500 रुपये से बढ़ाकर 3500 रुपये जबकि उपाध्यक्ष का मानदेय 2000 रुपये से बढ़ाकर 2800 रुपये किया गया। कई सालों से वेतन-भत्तों में कम बढ़ोतरी को लेकर पंचायतीराज संस्थाओं के प्रतिनिधि सरकार के समक्ष विरोध भी जता चुके हैं। अब विधायकों और मंत्रियों के वेतन भत्तों में अत्यधिक वृद्धि पर विरोध और तेज हो गया है।

न के बराबर है मानदेय, प्रतिनिधियों ने जताया विरोध

जिला परिषद अध्यक्ष धर्मिला हरनोट ने कहा कि जिला परिषद अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और सदस्यों का मानदेय न के बराबर है। डेवलपमेंट ग्रांट बंद है। 14 वें वित्तायोग का पैसा सीधे पंचायतों को जाना है। जनता के नुमाइंदों को अपनी जेब से पैसा खर्च करके जनता के बीच जाना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि पंचायतों में एमएलए की अपेक्षा परिषद के सदस्य ज्यादा जाते हैं। पंचायत समिति अध्यक्ष ठियोग मदनलाल वर्मा ने कहा कि विधायकों के मानदेय बढ़ाने में सत्ता पक्ष और विपक्ष में सहमति बन जाती है, लेकिन जिला परिषद और पंचायत समिति के लिए किसी भी तरह के बजट का प्रावधान नहीं किया गया है। जनता के बीच जाना मुश्किल हो गया है।

Photo: Amar Ujala

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