‘‘हिम रंग महोत्सव-2016’’ का गेयटी थियेटर में शुभारम्भ, मंच पे दिखेगी हिमाचल के विभिन्न रंगकर्मियों की प्रतिभायें

2
360

शिमला- राज्य स्तरीय नाट्य उत्सव ‘‘हिम रंग महोत्सव-2016’’ का शुभारम्भ गेयटी थियेटर में 19 मार्च को किया गया! यह आयोजन (19-27 मार्च) विश्वभर के रंगकर्मियों द्वारा प्रत्येक वर्ष 27 मार्च को विश्व रंगमंच दिवस के उपलक्ष्य पर धूमधाम से मनाया जाता है।

him-rang-mahostav-shimla

पहले दिन की प्रस्तुुति में एकलब्य कला मंच बनगढ़ हि0प्र0 पुलिस, ऊना द्वारा नाटक ‘‘बेब्बे’’ मंचित किया किया। जिसके लेखक मोहन राकेश तथा निर्देशक श्री अरविन्द कौशल है।

नाटक सिपाही की मां से प्रेरित है। यह घटना एक पंजाबी परिवेश के परिवार में घटित होती है जिसमें यह दर्शाया गया है कि एक सिपाही जो कि वर्ष 1999 में कारगिल में तैनात है उस दौरान भारत पाकिस्तान के बीच कारगिल क्षेत्र में युद्ध शुरू हो जाने के कारण वह जवान लम्बे समय से घर छुट्टी नही आ पाया है तथा न ही उसकी कोई खबर घर तक पहुंची है। ऐसे हालात में सिपाही के घर परिवार के सदस्यों की मनोस्थिति विशेषतः सिपाही की मां की मनोस्थिति व समाजिक गतिविधियों का इस पर प्रभाव जिसमें एक मातृत्व भाव का चित्रण किया गया है। बेब्बे यानी सिपाही की मां, नीदों में भी अपने बेटे के आने के सपने देखती है। मां (बेब्बे) के लिए सरहदें देश कुछ मायने नही देखते सिर्फ भावनाएं अहमियत रखती है। फिर चाहे बेटा किसी पाकिस्तानी मां का हो या हिन्दोस्तानी मां का। इन सभी का चित्रण इस नाटक के माध्यम से ‘एकलब्य कलामंच बनगढ़’ हिमाचल प्रदेश पुलिस द्वारा किया गया है।

इसके अलावा “गैएटी शिमला के एम्फी थिएटर में ” चंगर संस्कृति कला मण्डल, काँगड़ा द्वारा “भगत” का मंचन किया गया! भगत एक प्राचीन थिएटर कला का एक हिस्सा है जिसमे संगीत, नाट्य और नृत्य द्वारा पौराणिक धार्मिक कथाओं का बखान किया जाता है! यह करियाला का ही एक रूप है!”

गैएटी शिमला के एम्फी थिएटर में आज 19 मार्च 2016 को " चंगर संस्कृति कला मण्डल, काँगड़ा द्वारा "भगत" का मंचन किया गया. भगत …

Posted by Suresh Sharma on Saturday, March 19, 2016

गेयटी पे्रक्षागृह में उपस्थित समस्त रंगप्रेमियों को नाटक द्वारा भाव विभोर किया गया।

‘‘हिम रंग महोत्सव-2016’’ की पहली कड़ी में दोपहर बाद ब्रिजेश्वर लोक नाट्य करयाला मंच, शिमला द्वारा सुप्रसिद्ध लोकनाट्य ‘‘करयाला’’ गेयटी सांस्कृतिक परिसर के खुले रंगमंच एम्फी थियेटर में प्रस्तुत किया गया। लोक नाट्य करयाला हिमाचल प्रदेश के जिला शिमला, सिरमौर व सोलन में दैविक कार्य व शादी (ब्याह) और खुशी के मौके पर किया जाता है। इसे जिला बिलासपुर में धाज्जा व कांगड़ा, मण्डी में भगत भी कहा जाता हैं
him-rang-mahostav-shimla-4

करियाला के अधिष्ठाता (आराध्य देव) देवता बिजेश्वर को माना जाता है इसे चन्द्रावली व काहन के नृत्य से आरम्भ किया जाता है कि जो देवता बिजेश्वर की नायिका मानी जाती है व काहन इसका अंगरक्षक माना जाता है। करियाला के हास्य स्वांग, संवाद व संगीत का मिश्रण रहता है तथा समय पर आधारित रागों पर बनें गीतों को सुबह तक बीच-बीच में गाया जाता है।

him-rang-mahostav-shimla-3

इस अवसर में श्री बिहारी लाल शर्मा सांस्कृतिक आयोजक, भाषा एवं संस्कृति विभाग तथा इस नाट्य समारोह में समीक्षक के रूप में श्रीयुत श्रीनिवास जोशी, डाॅ० ओम प्रकाश सारस्वत, श्री सुदर्शन वशिष्ठ तथा श्री अशोक हंस उपस्थित थे। जो कि प्रदेश रंगमंच के प्रतिनिधि हस्ताक्षर हैं।

him-rang-mahostav-shimla-2

हिमाचल वॉचर हिंदी के एंड्रायड ऐप के लिए यहां क्लिक करें

2 COMMENTS

Comments are closed.