राज्य स्तरीय नाट्य उत्सव का 9 दिवसीय हिम रंग महोत्सव 2016 का शुभारम्भ

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Art and Culture Department Himachal Pradesh Shimla

शिमला- भाषा एवं संस्कृति विभाग, प्रदेश के विभिन्न जिलों में सक्रिय नाट्य एवं लोकनाट्य दलों को प्रदेश में नाट्य गतिविधियों, के प्रचार-प्रसार एवं प्रदेश के रंगकर्मियों एवं नाटय दलों को मंच प्रदान करने के उदेश्य से राज्य स्तरीय नाट्य उत्सव ‘‘हिम रंग महोत्सव-2016’’ का आयोजन गेयटी थियेटर में 19-27 मार्च, 2016 तक किया जा रहा है। यह आयोजन विश्वभर के रंगकर्मियों द्वारा प्रत्येक वर्ष 27 मार्च को विश्व रंगमंच दिवस के उपलक्ष्य पर धूमधाम से मनाया जाता है।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि प्रेम शर्मा, उपाध्यक्ष हिमाचल भाषा कला एवं संस्कृति अकादमी द्वारा दीप प्रज्वलित कर नौ दिवसीय हिम रंग महोत्सव का शुभारम्भ किया। इस अवसर पर अरुण कुमार शर्मा, निदेशक, भाषा एवं संस्कृति विभाग, संग्रहालयाध्यक्ष महेन्द्र सिंह नेगी राज्य संग्रहालय शिमला तथा इस नाटय समारोह में समीक्षक के रूप में श्रीयुत श्रीनिवास जोशी, डा० ओम प्रकाश सारस्वत, सुदर्शन वशिष्ठ तथा अशोक हंस उपस्थित थे। जो कि प्रदेश रंगमंच के प्रतिनिधि हस्ताक्षर हैं।

आज की प्रस्तुति में उड़ान थियेटर ग्रूप, बिलासपुर द्वारा नाटक ‘‘मासूमियत’’ मंचित किया किया। जिसके लेखक अभिषेक सोनी तथा निर्देशक अभिषेक ड़ोगरा है। नाटक मासूमियत यानि एक भोलापन खुशी और प्यारा बचपन जिसे हर बच्चा बड़े ही प्यार और हंसते-खेलते बिताता है।

ये जिन्दगी का ऐसा वक्त होता है जिसमें न तो किसी प्रकार की कोई चिंता होती हैं और न ही कोई जिम्मेदारी। लेकिन यदि इस वक्त को बच्चों से छीन लिया जाए या उनका हंसना खेलता जीवन कही गायब हो जाए तो कुछ ऐसे ही वाक्यों को दर्शाता है नाटक-मासूमियत।

नाटक दर्शाता है कि किस तरह से बच्चों के बचपन व उनकी खुशियों का गला घोंट दिया जाता है और मां-बाप के बिना एक बच्चा अपनी जिन्दगी को जीने के लिए मजबूर हो जाता है। अब जब बच्चों को जो खुशियां मिलनी चाहिए वे उनसे महरूम रह जाएं तो बच्चों की जिंदगी पर क्या फर्फ पड़ता है और कैसे बच्चा अपने जीवन को बिताता है। इन्हीं पहलुओं को प्रस्तुत करता है नाटक मासूमियत।

नाटक के अंत में मुख्य अतिथि द्वारा लोक परम्परा के विकास में लोकनाट्य के योगदान को सराहा तथा रंगमंचिय गतिविधियों के प्रचार-प्रसार हेतु इस प्रकार के आयोजनों को जिला स्तर पर भी करने का आवाहन किया ताकि रंगकर्म का प्रचार-प्रसार जन-जन तक हो सके।

हिम रंग महोत्सव 2016 की पहली कड़ी में दोपहर बाद चंगर सांस्कृतिक कला मंच, कांगड़ा द्वारा सुप्रसिद्ध लोकनाट्य ‘‘भगत’’ गेयटी सांस्कृतिक परिसर के खुले रंगमंच एम्फी थियेटर में प्रस्तुत किया गया। लोकनाट्य ‘‘भगत’’ भगवान श्री कृष्ण की साकार भक्ति का प्रतीक है। इस लोकनाट्य का प्रारम्भ ब्रजभूमि में की गई भगवान कृष्ण की रास लीलाओं से माना जाता है। इस लोकनाट्य के आरम्भ में भगवान श्री कृष्ण द्वारा वृन्दावन में गोपियों के साथ किये गए संवाद, गीत व नृत्य प्रस्तुत किये जाते हैं।

लोकनाट्य भगत को रास भी कहा जाता है। हिमाचल में कांगड़ा, चम्बा व हमीरपुर के क्षेत्रों में यह परम्परा आज भी प्रचलित है। भक्तिकाल से आधुनिक काल तक लोकनाट्य का ग्रामीण जनता में काफी अधिक प्रचार-प्रसार रहा है। गांव के लोग कभी विवाह व बच्चे के जन्म एवं कभी मन्नत पूरी होने पर भगत लोकनाट्य का आयोजन भगतियों द्वारा करवाते हैं।

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