शिमला इको स्कूलों के लिए 2 दिवसीय पर्यावरण आॅडिट प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन

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himachal science and technology department

शिमला- हिमाचल राज्य विज्ञान एवं प्राद्यौगिकी एवं पर्यावरण परिषद शिमला, शिक्षा विभाग विभाग एवं विज्ञान एवं पर्यावरण केन्द्र नई दिल्ली के विषय विषेषज्ञों के द्वारा शिमला के इको स्कूलों के लिए दो दिवसीय (15व 16 मार्च) पर्यावरण आॅडिट प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन राज्य स्वास्थय एवं परिवार कल्याण संस्थान परिमहल के सभागार में किया जा रहा है।

राज्य विज्ञान एवं प्राद्यौगिकी एवं पर्यावरण परिषद शिमला ने हिमाचल के प्रत्येक जिले में 250 इको क्लब स्थापित किए हैं। राज्य में कुल 3000 इको क्लब स्कूलों में व 93 इको क्लब काॅलेजों में स्थापित किए गए हैं।

Environment

प्रशिक्षण कार्यशाला के मुख्याथिती निदेषक पर्यावरण विज्ञान एंव प्रौद्योगिकी विभाग अर्चना शर्मा ने अपने भाषण मे उपस्थित बच्चों एवं शिक्षकों को भूमि जल व उर्जा आॅडिट पर कार्य करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने ने कहा कि जो इको क्लब स्कूल पर्यावरण आॅडिट पर अच्छा कार्य करने पर उन्हें केन्द्र विज्ञान एवं पर्यावरण नई दिल्ली में माॅडल देखने हेतू भेजा जायेगा एवं पुरस्कृत भी किया जाएगा।

संयुक्त सदस्य सचिव राज्य विज्ञान एवं पर्यावरण परिषद कुनाल सत्यार्थी ने बच्चों एवं शिक्षकों को पर्यावरण आॅडिट पर दो दिवसीय कार्यशाला में अधिक से अधिक जानकारी ग्रहण करने के लिए प्रेरित किया। रंजीता मैनन, अजंता, व अदिति शर्मा प्रोग्राम निदेशक केन्द्र विज्ञान एवं पर्यावरण नई दिल्ली ने ग्रीन स्कूल प्रोग्राम पर विस्तार से बताया। प्रशिक्षण कार्यशाला में परिषद के वैज्ञानिकों व शिमला के लगभग 20 सरकारी स्कूलों के 60 प्रतिभागी भाग ले रहे हैं।

State Health and Family Welfare Training Centre Parimahal Shimla

इस कार्यशाला के दौरान ग्रीन स्कूल टीम नई दिल्ली के द्वारा जल वायु भूमि उर्जा भोजन व कचरा प्रंबधन पर स्कूलों में पर्यावरण आॅडिट के बारे में विस्तृत जानकारी दी जा रही है। ग्रीन स्कूल प्रोग्राम एक पर्यावरण शिक्षा कार्यक्रम है जिसे व्यावहारिक तथा विचार उत्तेजक गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों को पर्यावरण के प्रति संवेदनशील करने के लिए निर्देषित किया गया है। यह एक पर्यावरण प्रबंधन प्रणाली भी है जो विद्यार्थियों के माध्यम से प्राकृतिक संसाधन के दोहन की स्कूल परिसर के भीतर आॅडिट भी करता है तथा बहुमूल्य संसाधनों के व्यर्थ होने को व्यावहारिक समाधानों द्वारा कम करने के लिए स्कूलों को अच्छा पर्यावरण प्रबंधक बनने में सहायता करता है।

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