पर्यावरण में बदलाव के कारण किन्नौर के जंगलों में लगी भीषण आग, करोड़ों की अमूल्य वन सम्पदा राख

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चित्र: किन्नौर पेज/फेसबुक

किन्नौर – पर्यावरण में बदलाव आने के कारण प्रदेश का सबसे सर्द और दुर्गम जनजातीय क्षेत्र किन्नौर के जंगलो में पिछले एक महीने से भयानक आग लगी हुई है जिस कारण पुरे ज़िले के जंगल आग की चपेट में आ गए हैं। आग लगने के कारण सबसे अधिक नुक्सान चिलगोजा के दुर्लभ पेड़ों को हुआ है। चिलगोजा के जिस ये पेड़ भारत में केवल किन्नौर में पाए जाते हैं जबकि एशिया में इनका दूसरा ठिकाना अफगानिस्तान में है। आग से देवदार, चिलगोजा और चीड़ के हजारों पेड़ जलकर खाक हो चुके हैं तथा करोड़ों की अमूल्य वन सम्पदा आग में राख हो गयी है। हालांकि आग पर काबू पाने के लिए अग्निशामन विभाग के कर्मचारी सहित स्थानीय लोग जुटे हुए हैं लेकिन आग पर काबू नहीं पाया जा सका है।

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चित्र: किन्नौर पेज/फेसबुक

जिला में सूखे जैसे हालात, घरों के जलने का बढ़ा खतरा

किन्नौर में इस साल केवल सामान्य से कम मानसून के दौरान बारिश हुई है जिससे जिला में सूखे जैसे हालात हैं। मौसम विभाग के आंकड़ों के मुताबिक किन्नौर जिला में इस साल मानसून के दौरान सामान्य से 60 फीसदी कम वर्षा हुई है। वहीं जंगलों में लगी इस भयंकर आग के कारण पूरे जिला में धुआं ही धुआं है। जंगलों में लगी आग से स्थानीय लोग भी खोफ के साये में हैं। लोगों को अब घरों के जलने का खतरा पैदा हो गया है। लोग सरकार से आग पर काबू पाने की गुहार लगा रहे हैं लेकिन प्रदेश सरकार जंगलों में लगी आग पर काबू पाने के लिए कोई कारगर उपाय नहीं निकाल पा रही है जिससे दिन प्रतिदिन आग भयानक रूप लेती जा रही है।

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