शिमला शहर में फिर से सामने आया हरे-भरे देवदार के कटान का मामला, बढ़ती शिकायतों के बावजूद वन विभाग का सुस्त रवैया जारी

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Tree felling Bharari Shimla

शिमला- बिना अनुमति पेड़ काटने के मामले राजधानी में थम नहीं रहे हैं। राजधानी के भीड़भाड़ वाले क्षेत्र भराड़ी के पास निजी जमीन पर एक देवदार के पेड़ पर कुल्हाड़ी चला दी, जिसकी विभाग को खबर नहीं है। दो दिन बाद जब विभाग को इसके बारे में सूचना दी तो विभाग ने डीआर काट कर कार्रवाई का हवाला देकर पल्ला झाड़ लिया है।

पेड़ की कीमत 70 हजार रुपये आंकी गई है। यदि शहर के बीचोंबीच भीड़ वाले क्षेत्र में इसी तरह पेड़ कटान किया जा रहा है तो इसका अंदाजा लगाना अति सहज हो जाएगा कि शहर से दूर बिना आबादी वाले क्षेत्र में पेड़ों की क्या स्थिति रहती है।

भराड़ी क्षेत्र में अश्वनी जैन ने बिना अनुमति के पेड़ काटा है। डीआर काटकर मामले के चालान कोर्ट में पेश किया जाएगा। इसके अलावा कोई भी कार्रवाई नहीं हुई है।

इंद्र सिंह, डीएफओ

वन विभाग केवल डीआर काटकर कार्रवाई कर देता है। शहर में एनजीटी के नियमों के बाद भी पेड़ क्यों कट रहे हैं। विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। अगर लोग विभाग को सूचना न देते तो विभाग को पता भी नहीं चलता।

संजय चौहान,महापौर, नगर निगम

पहले भी कट चुके हैं शिमला में पेड़

पेड़ों के काटने का मामला राजधानी शिमला में नया नहीं है। बात चाहे शोघी के पास कटे 400 से अधिक पेड़ो की हो या पंथाघाटी में तेंज़िन अस्पताल के पास काटे 35 गए पेड़ की जिसमे अधिकतर पेड़ रबिनिया के थे। लोगों ने महापौर को शिकायत कर अवगत करवाया। इसके बाद महापौर ने विभाग को सूचित किया और विभाग ने मौके पर पहुंच कर कार्रवाई करते हुए काटे गए पेड़ों की डैमेज रिपोर्ट काटी।

वहीं कुछ समय पहले छोटा शिमला के स्ट्रॉबेरी में भी देवदार का पेड़ काटने का मामल सामने आया था। नालदेहरा में देवदार के 11 पेड़ काटे गए थे। उसमें भी वन विभाग ने पंचायत प्रतिनिधियों के खिलाफ डीआर काटी थी। कोर्ट परिसर चक्कर में चार पेड़ काटे गए थे। सभी मामलों में विभाग केवल डीआर काटकर अपना काम पूरा समझ लेता है। पेड़ कटान को कैसे रोका जाए, इसकी ओर कोई खास पहल नहीं की गई है।

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