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बेघर मनोरोगियों के अधिकारों की ख़बरों का हिमाचल में व्यापक असर, लोग पुलिस को दे रहे रोगियों की खबर, पर अधिकारी कर रहे आनाकानी

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हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेशों के बाद भी बेघर मानसिक रोगियों को बचाने में  हिमाचल पुलिस अधिकारी  कर रहे आनाकानी, कोर्ट की अवमानना का नहीं कोई डर

शिमला- शिमला की गैर-सरकारी संस्था, उमंग फाउंडेशन, का आरोप है की हिमाचल प्रदेश में जिला पुलिस अधीक्षकों पर 2015 में उच्च न्यायाल द्वारा शिमला निवासी, सुभाष कुमार, द्वारा सडकों पर बेसहारा भटकते मानसिक रोगयीओं के मौलिक अधिकारों की सुरक्षा हेतु की गई याचिका पर दिए गए आदेशों का भी कोई फर्क नहीं दिख रहा है!

हिमाचल प्रदेश में सड़कों पर घूमने वाले बेसहारा मनोरोगियों के मौलिक अधिकारों के संरक्षण के लिए अभियान के बारे में छपी खबरों का व्यापक असर हुआ है। आम लोग अपने आसपास के बेसहारा मनोरोगियों के बारे में स्थानीय पुलिस एवं संस्था को फोन पर सूचना दे रहे हैं। लेकिन पुलिस का रवैया नकारात्मक बना हुआ है। संस्था ने संबंधित जिला पुलिस अधीक्षकों को रविवार को इस बारे में पत्र लिखा है और चेताया है कि यदि पुलिस ने मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम के अंतर्गत बेसहारा मनोरोगियों के मानवाधिकार संरक्षण की कार्यवाही नहीं की तो हाईकोर्ट में अदालत की अवमानना का मामला दायर किया जाएगा।

संस्था ने चेतावनी दी कि यदि पुलिस ने मनोरोगियों से संबंधित सूचनाओं पर कार्रवाई न की तो वह हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट में अदालत की अवमानना का मामला दायर करेंगे।

समाचार पत्रों और सोशल मीडिया में बेसहारा मनोरोगियों के अधिकारों की खबर पढ़ने के बाद चंबा सोलन, कुल्लू, सिरमौर, बिलासपुर, धर्मशाला, ज्वाला जी बैजनाथ, शाहपुर ,सुंदर नगर, बद्दी, कुमार सेन, पौंटा साहिब, सुन्नी आदि स्थानों से उनके पास फोन आए। फोन करने वालों ने अपने क्षेत्र में बेसहारा मनोरोगियों की दयनीय हालत के बारे में बताया। उनमें से कई मनोरोगी तो डस्टबिन से खाना निकाल कर खाने को मजबूर हैं । लगभग सभी लोगों ने कहा कि सूचना देने के बावजूद पुलिस कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।

चंबा जिले के गांव सिद्धपुरा निवासी सेवानिवृत्त पुलिस कर्मचारी जीत सिंह ने बताया कि वहां पॉलिटेक्निक संस्थान के पास एक मनोरोगी रहता है। वहां पॉलिटेक्निक संस्थान के कैंपस और आसपास घूमता है तथा लोगों से बिस्कुट और रोटी मांग कर खा लेता है। उसकी उम्र करीब 30 साल है और शायद बिहार का रहने वाला है । उन्होंने कहा कि जब इसकी सूचना उन्होंने स्थानीय थाने में दी तो पुलिस कर्मचारियों ने उनका ही मजाक उड़ाया और कोई कार्यवाही नहीं की।

धर्मशाला से रविंदर ने बताया की पुलिस थाने के ठीक सामने लगभग 45 वर्षीय मनोरोगी रहता है जो डस्टबिन से खाना ढूंढ कर खाता है लेकिन पुलिस सब कुछ जानने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं करती। उन्होंने बताया कि इसी तरह चामुंडा नगरी रोड पर लगभग 25 वर्षीय मनोरोगी दयनीय हालत में घूमता दिखता है । बद्दी से वीर सिंह ठाकुर ने कहा की नालागढ़ में बस स्टैंड के पास करीब 40 वर्ष का एक बेसहारा मनोरोगी रहता है जो दर दर की ठोकरें खाने पर मजबूर है।

सोलन से सतीश सिक्का ने बताया की सुबाथू रोड पर लाइट वाले चौक से 2 किलोमीटर दूर एक मनोरोगी काफी समय से रह रहा है जो सड़क पर सोता है और कूड़ेदान से खाना बीनकर खाता है ।लोग अक्सर उसको तंग करते हैं और कूड़ेदान से भी खाना नहीं निकालने देते। कुल्लू से सुदर्शना चौहान ने कहा कि कटराई-जटेड़ रोड पर लगभग 35 वर्षीय मनोरोगी रहता है और सड़क पर ही सोता है।

सोलन जिले संजय शर्मा ने बताया की में कुनिहार नालागढ़ रोड पर राम शहर की ओर जाने वाले रास्ते पर झंडू गांव में एक मनोरोगी रहता है जो श्मशान घाट के पास सोता है ।बैजनाथ से भरत शर्मा ने फोन पर बताया की मंडी रोड पर पेट्रोल पंप के पास करीब 40 वर्षीय मनोरोगी काफी समय से रह रहा है जो पेट्रोल पंप के आसपास घूमता दिखता है। जिला शिमला के कुमार से कपिल शर्मा ने कहा कि वहां शणाद गाँव का नरेश मनोरोगी होने के बाद दयनीय हालत में रहता है। वह अपने घर जाने की बजाए इधर-उधर से खाना मांग कर गुजर बसर करता है।

कांगड़ा जिले के रैत में करीब 7 वर्ष की दक्षिण भारत की एक मनोरोगी महिला बुरी हालत में रह रही है उसके पास ना तो पर्याप्त कपड़े हैं और नहीं सिर ढकने को छत। रैत से गुरनाम सिंह ने बताया कि उसकी बोली कोई नहीं समझ सकता। उन्होंने कहा की इस महिला को तुरंत सहारे की जरूरत है।

पौंटा साहिब के पास बद्रीपुर में आंगनवाड़ी वर्कर बलजीत कौर ने कहा की नजदीकी गांव भोपुर में करीब 25 साल का मनोरोगी लड़का खराब हालत में सड़क पर ही पड़ा रहता है।

ज्वालाजी से सपना ने बताया की बस स्टैंड के पास कई मनोरोगी बेसहारा हालत में रहते हैं जिन्हें इलाज की जरूरत है। ढली शिमला से रवि कुमार दलित ने बताया कि संजौली में एक नेपाली युवक नशे के कारण मानसिक संतुलन खो कर इधर-उधर चिल्लाता रहता है पुलिस वालों ने पहले उसे पकड़ा और कुछ देर बाद छोड़ दिया जबकि वह पूरी तरह से मनोरोगी है।

संस्था ने कहा कि इन सभी मामलों में स्थानीय पुलिस का नकारात्मक रवैया देखते हुए उन्होंने संबंधित जिला पुलिस अधीक्षकों को पत्र लिखकर मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम के अंतर्गत कार्यवाही करने का अनुरोध किया है ।

इस कानून के मुताबिक संबंधित थाना अध्यक्ष का दायित्व है कि वह बेसहारा मनोरोगी को देखकर उसे पुलिस संरक्षण में ले और नजदीकी न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में 24 घंटे के भीतर पेश करें। इसके बाद अदालत मनोरोगी को मनोचिकित्सक को दिखाने का आदेश पारित करती है। उसका इलाज एवं पुनर्वास निशुल्क करना सरकार की जिम्मेदारी होती है। मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम की धारा 23 और 24 के सख्ती से पालन के लिए 4 जून 2015 को हाई कोर्ट बिल्कुल स्पष्ट आदेश जारी कर चुका है।

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हिमाचल की तीन ग्राम पंचायतों में 435 एकड़ भूमि पर लगे 76,000 से अधिक सेब के पौधे

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शिमला- डॉ यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के विस्तार शिक्षा निदेशालय में पहाड़ी कृषि एवं ग्रामीण विकास एजेंसी(हार्प), शिमला द्वारा एक अनुभव-साझाकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया।

इस कार्यशाला में जिला किन्नौर के निचार विकास खंड के रूपी, छोटा कम्बा और नाथपा ग्राम पंचायतों के 34 किसानों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर जीएम नाबार्ड डॉ. सुधांशु मिश्रा मुख्य अतिथि रहे जबकि नौणी विवि के अनुसंधान निदेशक डॉ रविंदर शर्मा ने विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत की।

संस्था के अध्यक्ष डॉ. आर एस रतन ने कहा कि यह कार्यक्रम एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना के तहत रूपी, छोटा कम्बा और नाथपा ग्राम पंचायतों में वर्ष 2014 से आयोजित किया जा रहा है। परियोजना को नाबार्ड द्वारा वित्त पोषित किया गया है और इसे हार्प द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।

उन्होंने यह बताया कि यह एक बागवानी आधारित आजीविका कार्यक्रम है जिसे किसानों की भागीदारी से लागू किया गया है। इन तीन ग्राम पंचायतों में 435 एकड़ भूमि पर 76,000 से अधिक सेब के पौधे लगाए गए हैं और 607 परिवार लाभान्वित हुए हैं।

डॉ. सुधांशु मिश्रा ने यह भी कहा कि नाबार्ड हमेशा सामाजिक-आर्थिक उत्थान कार्यक्रमों के संचालन में आगे रहा है। उन्होंने इस कार्यशाला में भाग लेने वाले किसानों से अपने सहयोग से विभिन्न कार्यक्रमों को सफल बनाने का आग्रह किया।

अनुसंधान निदेशक डॉ. रविंदर शर्मा और विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. दिवेंद्र गुप्ता ने नाबार्ड और हार्प के प्रयासों की सराहना की और किसानों को आश्वासन दिया कि विश्वविद्यालय किसानों को तकनीकी रूप से समर्थन देने के लिए हमेशा तैयार है।

डॉ. नरेद्र कुमार ठाकुर ने कहा कि हार्प ने कृषक समुदाय के समन्वय से दुर्गम क्षेत्रों में कठिन परिस्थितियों में काम किया है। इस अवसर पर एक किसान-वैज्ञानिक परिचर्चा का भी आयोजन किया गया जिसमें भाग लेने वाले किसानों के तकनीकी प्रश्नों को संबोधित किया गया।

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हिमाचल सरकार पुलिसकर्मियों का कर रही है शोषण

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पुलिसकर्मियों की डयूटी बेहद सख्त है,कई-कई बार तो चौबीसों घण्टे वर्दी व जूता उनके शरीर में बंधा रहता है।थानों में खाने की व्यवस्था तीन के बजाए दो टाइम ही है,राजधानी शिमला के कुछ थानों के पास अपनी खुद की गाड़ी तक नहीं है,हैड कॉन्स्टेबल से एएसआई बनने के लिए सत्रह से बीस वर्ष भी लग जाते हैं।

शिमला सीटू राज्य कमेटी ने प्रदेश सरकार पर कर्मचारी विरोधी होने का आरोप लगाया है। कमेटी ने यह कहा है कि वह हिमाचल प्रदेश के पुलिसकर्मियों की मांगों का पूर्ण समर्थन करती है। आरोप लगाते हुए सीटू ने कहा है कि प्रदेश सरकार पुलिसकर्मियों का शोषण कर रही है।

राज्य कमेटी ने प्रदेश सरकार से यह मांग की है कि वर्ष 2013 के बाद नियुक्त पुलिसकर्मियों को पहले की भांति 5910 रुपये के बजाए 10300 रुपये संशोधित वेतन लागू किया जाए व उनकी अन्य सभी मांगों को बिना किसी विलंब के पूरा किया जाए।

सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा व महासचिव प्रेम गौतम ने प्रदेश सरकार पर कर्मचारी विरोधी होने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जेसीसी बैठक में भी कर्मचारियों की प्रमुख मांगों को अनदेखा किया गया है। उन्होंने कहा कि जेसीसी बैठक में पुलिसकर्मियों की मांगों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है।

सीटू कमेटी ने कहा कि सबसे मुश्किल डयूटी करने वाले व चौबीस घण्टे डयूटी में कार्यरत पुलिसकर्मियों को इस बैठक से मायूसी ही हाथ लगी है। इसी से आक्रोशित होकर पुलिसकर्मी मुख्यमंत्री आवास पहुंचे थे। उनके द्वारा पिछले कुछ दिनों से मैस के खाने के बॉयकॉट से उनकी पीड़ा का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि पुलिस कर्मियों के साथ ही सभी सरकारी कर्मचारी नवउदारवादी नीतियों की मार से अछूते नहीं है। कमेटी ने कहा कि पुलिसकर्मियों की डयूटी बेहद सख्त है। कई-कई बार तो चौबीसों घण्टे वर्दी व जूता उनके शरीर में बंधा रहता है।

कमेटी ने यह भी कहा है कि थानों में स्टेशनरी के लिए बेहद कम पैसा है व आईओ को केस की पूरी फ़ाइल का सैंकड़ों रुपये का खर्चा अपनी ही जेब से करना पड़ता है। थानों में खाने की व्यवस्था तीन के बजाए दो टाइम ही है। मैस मनी केवल दो सौ दस रुपये महीना है जबकि मैस में पूरा महीना खाना खाने का खर्चा दो हज़ार रुपये से ज़्यादा आता है। यह प्रति डाइट केवल साढ़े तीन रुपये बनता है, जोकि पुलिस जवानों के साथ घोर मज़ाक है। यह स्थिति मिड डे मील के लिए आबंटित राशि से भी कम है।

उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के जमाने के बने बहुत सारे थानों की स्थिति खंडहर की तरह प्रतीत होती है जहां पर कार्यालयों को टाइलें लगाकर तो चमका दिया गया है परन्तु कस्टडी कक्षों,बाथरूमों,बैरकों,स्टोरों,मेस की स्थिति बहुत बुरी है। इन वजहों से भी पुलिस जवान भारी मानसिक तनाव में रहते हैं।

सीटू ने कहा कि पुलिस में स्टाफ कि बहुत कमी है या यूं कह लें कि बेहद कम है व कुल अनुमानित नियुक्तियों की तुलना में आधे जवान ही भर्ती किये गए हैं जबकि प्रदेश की जनसंख्या पहले की तुलना में काफी बढ़ चुकी है यहाँ तक पुलिस के पास रिलीवर भी नहीं है।

आरोप लगाते हुए कमेटी ने कहा कि प्रदेश की राजधानी शिमला के कुछ थानों के पास अपनी खुद की गाड़ी तक नहीं है। वहीं पुलिस कर्मी निरन्तर ओवरटाइम डयूटी करते हैं। इसकी एवज में उन्हें केवल एक महीना ज़्यादा वेतन दिया जाता है। इस से प्रत्येक पुलिसकर्मी को वर्तमान वेतन की तुलना में दस से बारह हज़ार रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है। उन्हें लगभग नब्बे साप्ताहिक अवकाश,सेकंड सैटरडे,राष्ट्रीय व त्योहार व अन्य छुट्टियों के मुकाबले में केवल पन्द्रह स्पेशल लीव दी जाती है।

सीटू कमेटी ने यह भी कहा कि वर्ष 2007 में हिमाचल प्रदेश में बने पुलिस एक्ट के पन्द्रह साल बीतने पर भी नियम नहीं बन पाए हैं। इस एक्ट के अनुसार पुलिसकर्मियों को सुविधा तो दी नहीं जाती है परन्तु कर्मियों को दंडित करने के लिए इसके प्रावधान बगैर नियमों के भी लागू किये जा रहे हैं जिसमें एक दिन डयूटी से अनुपस्थित रहने पर तीन दिन का वेतन काटना भी शामिल है। पुलिसकर्मियों की प्रोमोशन में भी कई विसंगतियां हैं व इसका टाइम पीरियड भी बहुत लंबा है। हैड कॉन्स्टेबल से एएसआई बनने के लिए सत्रह से बीस वर्ष भी लग जाते हैं।

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किन्नौर में लापता पर्यटकों में से 2 और के शव बरामद, 2 की तालाश जारी,आभी तक कुल 7 शव बरामद

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शिमला रिकोंगपिओ में 14 अक्तुबर को उत्तरकाशी के हर्षिल से छितकुल की ट्रैकिंग पर निकले 11 पर्यटकों में से लापता चार पर्वतारोहीयों में से दो  पर्वतारोहियों के शवो को आई.टी.बी.पी व पुलिस दल द्वारा पिछले कल सांगला लाया गया था जहां सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सांगला में दोनों शवों का पोस्टमार्टम किया गया।

यह जानकारी देते हुए उपायुक्त किन्नौर अपूर्व देवगन ने बताया कि इन दोनों की पहचान कर ली गई है जिनमे मे एक उतरकाशी व दूसरा पश्चिम बंगाल से सम्बंधित था।

उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन किन्नौर द्वारा आज एक शव वाहन द्वारा उतरकाशी को भेज दिया गया है जहाँ शव को जिला प्रशासन उतरकाशी को सौंपा जाएगा। जब कि दूसरा शव वाहन द्वारा शिमला भेजा गया है जिसे शिमला में मृतक के परिजनों को सौंपा जायेगा।

उपायुक्त अपूर्व देवगन ने बताया कि अभी भी लापता दो  पर्यटकों की तलाश आई.टी.बी.पी के जवानों द्वारा जारी है। उल्लेखनीय है कि गत दिनों उतरकाशी से छितकुल के लिये 11 पर्वतारोही ट्रेकिंग पर निकले थे जो बर्फबारी के कारण लमखंगा दर्रे में फंस गये थे जिसकी सूचना मिलने पर जिला प्रशासन द्वारा सेना के हेलीकॉप्टर व आई.टी.बी.पी के जवानों की सहायता से राहत व बचाव कार्य आरम्भ किया था। सेना व आई.टी.बी.पी के जवानों ने 21 अक्टूबर को दो पर्यटकों को सुरक्षित ढूंढ निकाला था। इसी दौरान उन्हें अलग अलग स्थानों पर पाँच ट्रेकरों के शव ढूंढ निकलने में सफलता मिली थी। जबकि 4 पर्यटक लापता थे जिसमे से राहत व बचाव दल को 22 अक्तुबर को 2 शव ढूढ़ निकालने में सफलता मिली थी। अभी भी दो पर्यटक लापता हैं जिनकी राहत व बचाव दल द्वारा तलाश जारी है।

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