शिमला स्तिथ संस्था की मदद से लापता मनोरोगी मजदूर लौटा घर

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मनोरोगी मजदूर रणवीर

शिमला- उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले से लापता हुआ एक दलित मनोरोगी मजदूर उमंग फाउंडेशन के प्रयासों से फिर अपने परिवार के पास लौट गया। वह पिछले सात महीने तक वृंदावन, हरिद्वार, पांवटा साहिब आदि स्थानों पर भटकता रहा और कुछ दिन पूर्व पैदल शिमला पहुँचा था। उसे साथ ले जाने के लिए आज यहां आये उसके किशोर बेटे ने भावुक होकर कहा- हमने तो पिता को मृत मान कर उम्मीद छोड़ दी थी। लेकिन हिमाचल सचमुच देवभूमि है और यहां के लोग देवता हैं जिन्होंने मेरे पिता को फिर से मिला दिया।

उमंग फाउंडेशन के ट्रस्टी और हिमाचल प्रदेश विश्विविद्यालय में पीएचडी स्कॉलर सुरेंदर कुमार को रणवीर सिंह(55) समरहिल के पास सांगटी में 23 जून को अत्यंत खराब हालत में मिला था। उन्होंने जब उससे बात की तो पता लगा कि उसकी दिमागी हालत सामान्य नहीँ है। उन्होंने तुरंत अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भजनदेव नेगी को फोन कर के मदद मांगी। नेगी के निर्देश पर पुलिस उसे समरहिल चौकी ले गई।

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सुरेंदर कुमार रणवीर और उनके परिवार के साथ

सुरेंदर कुमार ने बताया कि रणवीर से बात करने पर उसने अपना जिला बुलंदशहर और थाना अरनिया बताया। इसके बाद खुद सुरेंदर ने इंटरनेट के माध्यम से बुलंदशहर पुलिस के नंबर ढूंढ कर फोन करना शुरू किया। इस काम में समरहिल चौकी के मुंशी खेमराज और एएसआई अश्वनी कुमार ने भी पूरा सहयोग दिया।

बेसहारा मनोरोगी को समरहिल चौकी में इन लोगों ने चार दिन तक न सिर्फ रणवीर को बड़े प्यार से रखा बल्कि उसे नहलाया, शेव कराई और साफ कपड़े पहनने को भी दिए। पुलिस का यह मानवीय चेहरा देखकर स्वयं रणवीर भी हैरान था। तीन दिन की मशक्कत के बाद बुलंदशहर पुलिस से जो सुराग मिले उनसे सुरेंदर कुमार ने रणवीर के इकलौते बेटे अमित (18) और बहनोई बृजलाल का मोबाइल नम्बर ढूंढ निकाला। आज ये दोनों उसे लेने समरहिल चौकी पहुँचे तो सभी की आंखे भर आईं।

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रणवीर के बेटे अमित ने कहा कि “ये तो मेरे पिता का नया जन्म है”। हम उम्मीद खो चुके थे। मेरी माँ पहले ही गुज़र चुकी हैं। पिता दिमागी तौर पर बीमार हैं और उनका इलाज चल रहा था। उनके लापता हो जाने के बाद मैं अनाथ हो गया और 12वीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ कर मुझे मज़दूरी करनी पड़ी।

शिमला में सहारा मिलने के बाद जब कुछ हौसला बढ़ा तो रणवीर ने दिमाग पर ज़ोर डालकर बताया कि वह बुलंद शहर से वृंदावन, हरिद्वार होकर पांवटा पहुंचा। वहां से शिमला पैदल आया। कई लोगों ने मदद की और खाना, चप्पलें व कम्बल भी दिया। आज रणवीर अपने बेटे और बहनोई के साथ बुलंदशहर के लिए रवाना हो गया।

सुरेंदर कुमार ने बताया कि इस वर्ष जनवरी से उमंग फाउंडेशन ने सड़कों पर भटकते बेसहारा मनोरोगियों को बचाने का अभियान शुरू किया था। इसके अंतर्गत दर्जनों बेसहारा मनोरोगियों को पुलिस की मदद से मानसिक स्वास्थ्य कानून के अंतर्गत बचाकर मनोरोग अस्पताल या उनके घर पहुँचाया जा चुका है। उन्होंने अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भजनदेव नेगी, और समरहिल चौकी के कर्मचारियों द्वारा की गई मदद के लिए उनका आभार जताया।

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