स्थानीय निवासी ने उठाई चमाकड़ी पुल रेनशेल्टर में मिले मनरोगी के इलाज व पुनर्वास की मांग

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Himachal Homeless
चमाकड़ी पुल के पास रेन शेल्टर में बैठा बेसहारा मनोरोगी

शिमला- पुलिस और प्रशासन मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम के अंतर्गत बेसहारा मनोरोगियों के प्रति अपना कानूनी दायित्व निभाते नहीं दीखते। ऐसा प्रतीत होता है कि बेसहारा, बेघर मानसिक रोगियों के प्रति यह सब अपनी मानवता भूल गए हैं! लेकिन कुछ आम लोग ऐसे भी है जो इंसानियत के नाते इन बेसहारा लोगों की जिंदगी बचाने के लिए अपना फर्ज निभाते हैं।

शिमला से करीब 60 किलोमीटर दूर बिलासपुर मार्ग पर सोलन जिले में चमाकड़ी पुल के पास एक रेन शेल्टर में रह रहे गुमनाम मनोरोगी की सेवा का जिम्मा स्थानीय निवासी संजय ठाकुर उठा रहे हैं। वे बस अड्डे के निकट ढाबा चलाते हैं। अब उमंग फाउंडेशन ने सोलन के उपायुक्त राकेश कंवर को पत्र लिखकर यह मांग की है कि उसे मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम के अंतर्गत पुलिस संरक्षण में लेकर जुडिशियल मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश किया जाए ताकि अदालत के आदेश पर उसका इलाज एवं पुनर्वास किया जा सके।

Shimla Highway Dhaba
बेसहारा मनोरोगी की निस्वार्थ भाव से सेवा करने वाले स्थानीय निवासी संजय ठाकुर

उमंग फाउंडेशन के ट्रस्टी सुरेंद्र कुमार को इस बेसहारा मनोरोगी का पता सोशल मीडिया के जरिये चला जिसके बाद फाउंडेशन के ट्रस्टी उसके पास गए जहाँ उन्होंने देखा कि संजय ठाकुर नामक स्थानीय निवासी बेसहारा मनोरोगी की सेवा कर रहा है। संजय ना केवल उस व्यक्ति के लिए खाने पीने का इंतजाम किया है बल्कि ठण्ड से राहत देने के लिए उसे रजाई और कपड़े भी उपलब्ध करवाया हैं।

संजय का कहना है कि यह मासूम मनोरोगी न तो अपना नाम बताता है और न ही किसी चीज की मांग करता है। बस चुपचाप बैठा रहता है। उन्होंने कहा कि अक्सर आसपास के लोग उन्हें मनोरोगी के साथ देखते हैं और थोड़ी बहुत पूछताछ के बाद आगे बढ़ जाते हैं । उन्होंने कहा कि वे इंसानियत के नाते उसके साथ जुड़े हैं और यदि प्रशासन उसके इलाज तथा पुनर्वास का दायित्व निभाए तो उन्हें खुशी होगी।

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