HP Employee vinod kumar suspended

शिमला- कुछ दिन पहले प्रेस वार्ता कर कई घोटालों का खुलासा करने वाले कर्मचारी परिसंघ के अध्यक्ष विनोद कुमार को राज्य सरकार ने निलंबित कर दिया है। बागवानी निदेशक डॉ. एचएस बाजवा ने शुक्रवार को विनोद कुमार के निलंबन के आदेश जारी कर दिए हैं। आदेश के तहत निलंबन के साथ ही सरकार ने उन्हें चंबा स्थित डिप्टी डायरेक्टर कार्यालय से अटैच कर दिया है। खास बात यह है कि उनके निलंबन से पहले ही बागवानी निदेशालय ने शिमला से उन्हें सिरमौर स्थानांतरित किया था।

इस पर वह तबादले के खिलाफ हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक ट्रिब्यूनल चले गए। अभी मामला निस्तांरित हुआ भी नहीं था कि निदेशालय ने उन्हें निलंबित कर दिया है। बता दें, इससे पहले 2013 में विनोद कुमार को पांगी स्थानांतरित किया गया!

लेकिन वहां से भी कोर्ट के आदेश पर ऑर्डर निरस्त कर दिया गया। इसके बाद 2015 में भी उन्हें किन्नौर ट्रांसफर कर दिया, जिसे बाद में निदेशालय को वापस लेना पड़ा था।

सोसायटी ने किया 90 लाख का गड़बड़झाला

परिसंघ अध्यक्ष ने विनोद कुमार ने कहा कि उद्यान विभाग में कर्मचारी गैर कृषि एवं बचत सहकारी सोसायटी में पिछले चार सालों से बड़ा गड़बड़झाला चला हुआ है। सहकारी सभा से लिए गए 90 लाख के ऋण को कर्मचारियों ने तो अदा कर दिया, लेकिन अराजपत्रित कर्मचारी महासंघ से जुड़े लोग जो इस सोसायटी के पदाधिकारी भी हैं, ने इस पैसे को जमा ही नहीं करवाया।

उन्होंने लाखों रुपए के इस गड़बड़झाले को लेकर बैंक और सोसायटी की ओर से एफआईआर दर्ज न करना बड़े सवाल खड़े करता है। इस मामले को लेकर वे शपथ पत्र के साथ एफआईआर दर्ज करवाएंगे। वे खुद भी इस सोसायटी के सदस्य हैं। बैंक के एमडी ने इस पैसे की रिकवरी को लेकर पत्र भी लिखा है। बावजूद इसके ये राशि जमा नहीं करवाई जा रही है।

कर्मियों की प्रताड़ना को लेकर सौपूंगा चार्जशीट

कर्मचारी परिसंघ के अध्यक्ष विनोद कुमार ने कहा कि राज्य सरकार लगातार कर्मचारियों की प्रताड़ना कर रही है। उनका ही चार सालों में तीन बार तबादला किया गया है। उन्होंने कहा कि नाहन में भी एक रिटायर्ड अधिकारी लगातार आरोप लगा रहा है कि सचिवालय में बैठकर कुछ लोग पैसे लेकर तबादले करवा रहे हैं।

उन्होंने कहा कि इस तरह के कई मामलों को इक्ट्ठा करने के बाद वे इसकी चार्जशीट तैयार करेंगे। इस चार्जशीट को राज्यपाल को सौंपेंगे। राज्यपाल से आग्रह किया जाएगा कि इन सारे मामलों की जांच करवाएं, ताकि कर्मचारियों को राहत मिल सके। उन्होंने महासंघ पर आरोप लगाते हुए कहा कि महासंघ अध्यक्ष खुले मंच से राजनीतिक बयानबाजी कर रहे हैं और सरकार उनकी पीठ थपथपा रहीं है।

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