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हिमाचल परिवहन की खस्ताहाल बसें, कर्मियों की कमी, पूर्व सूचना बिना रूटों का बंद करना लोगों के लिए बन रहा आफत

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Poor HRTC Bus Conditions and Services

शिमला- 20 जून को बंजार में और हाल ही की 1 जुलाई को खलिनी के पास झिंझिडी में हुए दो हालिया बस हादसों ने न केवल सरकार की सुरक्षित आवागमन प्रदान करने में असमर्थता को उजागर किया है, बल्कि इन दुर्घटनाओं के पीछे के वास्तविक कारण की पहचान करने के लिए इसका मायोपिक (नाकाफी) दृष्टिकोण भी बताया है। यह कहना है ठियोग विधानसभा क्षेत्र के विधायक और भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) के वरिष्ठ नेता राकेश सिंघा का।

सिंघा ने प्रबंध निदेशक, हिमाचल सड़क परिवहन निगम, के माध्यम से एक ज्ञापन सौंप कर 11 जुलाई से पहले आवश्यक मुद्दों के तहत एक बैठक बुलाने के लिए सरकार को नोटिस भेजा है।

इस ज्ञापन में कहा गया है कि पूरे राज्य में ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में यात्रा करने वाले यात्रियों की संख्या में हो रही वृद्धि और बस सेवाओं की संख्या में निरंतर में भारी अंतर है। इस अंतर को दूर करने के लिए निर्मित और स्वीकृत सड़कों पर न केवल अतिरिक्त बसें चलाने की आवश्यकता होती है बल्कि आवागमन के वर्तमान सार्वजनिक और निजी मोड को कुशलतापूर्वक और सुरक्षित रूप से चलाने के लिए अतिरिक्त कर्मचारियों की भी आवश्यकता होती है।

सिंघा ने कहा कि इस ज्ञापन का मसौदा तैयार करते समय, पूरे राज्य के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन अगर शिमला जिले के परिवहन डिपो में से कुछ में कर्मियों की चल रही कमी की जांच की जाती है, तो यह राज्य में मौजूद गंभीर स्थिति के बारे में वैश्विक दृष्टिकोण पेश करेगा।

हिमाचल प्रदेश के शिमला लोकल डिपो में अभी 240 बसें ही चल पा रही है जबकि शिमला लोकल डिपो के तहत 283 स्वीकृत बस रूट हैं, 111 चालक और 98 परिचालक कम हैं और कर्मचारियों की अत्यधिक कमी को देखते हुए 12 मार्गों को स्थायी रूप से निलंबित कर दिया गया है। तारादेवी डिपो के तहत ड्राइवरों की कमी 55 है और कंडक्टरों का आंकड़ा 65 पर है।

सिंघा ने ज्ञापन में कहा कि रोहड़ू डिपो में स्थिति समान रूप से दयनीय है, जहां 24 बसें शून्य मान बुक में हैं यानी तय दूरी चल चुकी है और अब और चलने की स्थिति में नही है और इन बसों को एच आर टी सी सड़को पर दौड़ा रहा है जबकि इन बसों को कबाड़खाने में होना चाहिए था। इस डिपो के तहत 16 बसें 9 साल से अधिक पुरानी हैं और अभी भी चल रही हैं और हर कोई जानता है कि राज्य के अंदरूनी हिस्सों में सड़कों की स्थिति क्या है। इसके अलावा ड्राइवरों की कमी का आंकड़ा 49 है और परिचालकों की 46 है।

रामपुर डिपो के तहत जीरो वैल्यू बुक बसों की संख्या 11 है और ड्राइवरों और कंडक्टरों की कमी क्रमशः 60 और 42 है।

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परिवहन की इस तरह की दयनीय स्थिति के साथ राज्य में बस सेवाओं को सुरक्षित और सुचारू रूप से चलाना संभव नहीं है। HRTC प्रबंधन राज्य में लगातार हो रहे हादसों को रोकने में नाकामयाब हो गया है। बार-बार होने वाली “मजिस्ट्रियल पूछताछ” दुर्घटनाओं की संख्या को कम करने के लिए कोई परिणाम नहीं दे पाई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूछताछ केवल लोगो को दिखाने और सरकारी रिकॉर्ड के लिए की जा रही है किसी को कभी भी चूक के लिए दंडित नहीं किया जाता और प्रमुख कमियों को दूर करने के लिए कभी कोई कदम नहीं उठाया जाता है।

उन्होंने आगे कहा है कि एचआरटीसी के हालिया फैसले जिसमे “बसो में क्षमता से अधिक सवारियां न बिठाए जाने का फैसला हुआ” उससे लोगों को अधिक असुविधा हुई है। हर दिन लगभग 3 लाख छात्र इन बसों से सफर करते है लेकिन नवीनतम निर्णय के बाद वे ऐसा करने में असमर्थ हुए हैं। हजारों कर्मचारी अपने कार्यालयों तक पहुंचने में असमर्थ हैं।

उनका ये भी कहना है कि लोगों को पूर्व सूचना दिए बिना हर रोज सौ रूटों को निलंबित किया जा रहा है। यह विशेष रूप से बीमार व्यक्तियों, महिलाओं, बुजुर्गों व किसानों के लिए कठिनाइयों का कारण बना है जो अपने खेत का उत्पादन इस सार्वजनिक परिवहन से बाजार तक पहुंचते हैं। अकेले ठियोग में कई बस मार्गों को अभी निलंबित किया जा रहा है इन मार्गों में शिमला-सांभर, शिमला-अलवा, शिमला-गगनघट्टी, शिमला-माहीपुल वाया तल्ली, शिमला-मुंडो, ठियोग जारई, शिमला-श्यामनगर वाया कोटगढ़ व अन्य मुख्य है।

सिंघा ने कहा है कि ड्राइवरों व कंडक्टरों की नई भर्ती करके स्टाफ में चल रही कमी को पूरा करने के अलावा,
इन समस्याओं का कोई अस्थायी समाधान या “स्टॉप गैप सॉल्यूशन” नहीं हो सकता है, इसके अलावा उन बसों की कबाड़ में भेज दिया जाना चाहिए जो “शून्य बुक वैल्यू” यानी नकारा हो चुकी है और साथ ही नए वाहनों की खरीद की जानी चाहिए, यही इसका स्थाई समाधान होगा।

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हिमाचल की तीन ग्राम पंचायतों में 435 एकड़ भूमि पर लगे 76,000 से अधिक सेब के पौधे

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nauni university himachal pradesh

शिमला- डॉ यशवंत सिंह परमार औद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, नौणी के विस्तार शिक्षा निदेशालय में पहाड़ी कृषि एवं ग्रामीण विकास एजेंसी(हार्प), शिमला द्वारा एक अनुभव-साझाकरण कार्यशाला का आयोजन किया गया।

इस कार्यशाला में जिला किन्नौर के निचार विकास खंड के रूपी, छोटा कम्बा और नाथपा ग्राम पंचायतों के 34 किसानों ने हिस्सा लिया। इस अवसर पर जीएम नाबार्ड डॉ. सुधांशु मिश्रा मुख्य अतिथि रहे जबकि नौणी विवि के अनुसंधान निदेशक डॉ रविंदर शर्मा ने विशिष्ट अतिथि के रूप में शिरकत की।

संस्था के अध्यक्ष डॉ. आर एस रतन ने कहा कि यह कार्यक्रम एकीकृत आदिवासी विकास परियोजना के तहत रूपी, छोटा कम्बा और नाथपा ग्राम पंचायतों में वर्ष 2014 से आयोजित किया जा रहा है। परियोजना को नाबार्ड द्वारा वित्त पोषित किया गया है और इसे हार्प द्वारा कार्यान्वित किया जा रहा है।

उन्होंने यह बताया कि यह एक बागवानी आधारित आजीविका कार्यक्रम है जिसे किसानों की भागीदारी से लागू किया गया है। इन तीन ग्राम पंचायतों में 435 एकड़ भूमि पर 76,000 से अधिक सेब के पौधे लगाए गए हैं और 607 परिवार लाभान्वित हुए हैं।

डॉ. सुधांशु मिश्रा ने यह भी कहा कि नाबार्ड हमेशा सामाजिक-आर्थिक उत्थान कार्यक्रमों के संचालन में आगे रहा है। उन्होंने इस कार्यशाला में भाग लेने वाले किसानों से अपने सहयोग से विभिन्न कार्यक्रमों को सफल बनाने का आग्रह किया।

अनुसंधान निदेशक डॉ. रविंदर शर्मा और विस्तार शिक्षा निदेशक डॉ. दिवेंद्र गुप्ता ने नाबार्ड और हार्प के प्रयासों की सराहना की और किसानों को आश्वासन दिया कि विश्वविद्यालय किसानों को तकनीकी रूप से समर्थन देने के लिए हमेशा तैयार है।

डॉ. नरेद्र कुमार ठाकुर ने कहा कि हार्प ने कृषक समुदाय के समन्वय से दुर्गम क्षेत्रों में कठिन परिस्थितियों में काम किया है। इस अवसर पर एक किसान-वैज्ञानिक परिचर्चा का भी आयोजन किया गया जिसमें भाग लेने वाले किसानों के तकनीकी प्रश्नों को संबोधित किया गया।

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हिमाचल सरकार पुलिसकर्मियों का कर रही है शोषण

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hp police

पुलिसकर्मियों की डयूटी बेहद सख्त है,कई-कई बार तो चौबीसों घण्टे वर्दी व जूता उनके शरीर में बंधा रहता है।थानों में खाने की व्यवस्था तीन के बजाए दो टाइम ही है,राजधानी शिमला के कुछ थानों के पास अपनी खुद की गाड़ी तक नहीं है,हैड कॉन्स्टेबल से एएसआई बनने के लिए सत्रह से बीस वर्ष भी लग जाते हैं।

शिमला सीटू राज्य कमेटी ने प्रदेश सरकार पर कर्मचारी विरोधी होने का आरोप लगाया है। कमेटी ने यह कहा है कि वह हिमाचल प्रदेश के पुलिसकर्मियों की मांगों का पूर्ण समर्थन करती है। आरोप लगाते हुए सीटू ने कहा है कि प्रदेश सरकार पुलिसकर्मियों का शोषण कर रही है।

राज्य कमेटी ने प्रदेश सरकार से यह मांग की है कि वर्ष 2013 के बाद नियुक्त पुलिसकर्मियों को पहले की भांति 5910 रुपये के बजाए 10300 रुपये संशोधित वेतन लागू किया जाए व उनकी अन्य सभी मांगों को बिना किसी विलंब के पूरा किया जाए।

सीटू प्रदेशाध्यक्ष विजेंद्र मेहरा व महासचिव प्रेम गौतम ने प्रदेश सरकार पर कर्मचारी विरोधी होने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि जेसीसी बैठक में भी कर्मचारियों की प्रमुख मांगों को अनदेखा किया गया है। उन्होंने कहा कि जेसीसी बैठक में पुलिसकर्मियों की मांगों को पूरी तरह दरकिनार कर दिया गया है।

सीटू कमेटी ने कहा कि सबसे मुश्किल डयूटी करने वाले व चौबीस घण्टे डयूटी में कार्यरत पुलिसकर्मियों को इस बैठक से मायूसी ही हाथ लगी है। इसी से आक्रोशित होकर पुलिसकर्मी मुख्यमंत्री आवास पहुंचे थे। उनके द्वारा पिछले कुछ दिनों से मैस के खाने के बॉयकॉट से उनकी पीड़ा का अंदाज़ा लगाया जा सकता है।

उन्होंने कहा कि पुलिस कर्मियों के साथ ही सभी सरकारी कर्मचारी नवउदारवादी नीतियों की मार से अछूते नहीं है। कमेटी ने कहा कि पुलिसकर्मियों की डयूटी बेहद सख्त है। कई-कई बार तो चौबीसों घण्टे वर्दी व जूता उनके शरीर में बंधा रहता है।

कमेटी ने यह भी कहा है कि थानों में स्टेशनरी के लिए बेहद कम पैसा है व आईओ को केस की पूरी फ़ाइल का सैंकड़ों रुपये का खर्चा अपनी ही जेब से करना पड़ता है। थानों में खाने की व्यवस्था तीन के बजाए दो टाइम ही है। मैस मनी केवल दो सौ दस रुपये महीना है जबकि मैस में पूरा महीना खाना खाने का खर्चा दो हज़ार रुपये से ज़्यादा आता है। यह प्रति डाइट केवल साढ़े तीन रुपये बनता है, जोकि पुलिस जवानों के साथ घोर मज़ाक है। यह स्थिति मिड डे मील के लिए आबंटित राशि से भी कम है।

उन्होंने कहा कि अंग्रेजों के जमाने के बने बहुत सारे थानों की स्थिति खंडहर की तरह प्रतीत होती है जहां पर कार्यालयों को टाइलें लगाकर तो चमका दिया गया है परन्तु कस्टडी कक्षों,बाथरूमों,बैरकों,स्टोरों,मेस की स्थिति बहुत बुरी है। इन वजहों से भी पुलिस जवान भारी मानसिक तनाव में रहते हैं।

सीटू ने कहा कि पुलिस में स्टाफ कि बहुत कमी है या यूं कह लें कि बेहद कम है व कुल अनुमानित नियुक्तियों की तुलना में आधे जवान ही भर्ती किये गए हैं जबकि प्रदेश की जनसंख्या पहले की तुलना में काफी बढ़ चुकी है यहाँ तक पुलिस के पास रिलीवर भी नहीं है।

आरोप लगाते हुए कमेटी ने कहा कि प्रदेश की राजधानी शिमला के कुछ थानों के पास अपनी खुद की गाड़ी तक नहीं है। वहीं पुलिस कर्मी निरन्तर ओवरटाइम डयूटी करते हैं। इसकी एवज में उन्हें केवल एक महीना ज़्यादा वेतन दिया जाता है। इस से प्रत्येक पुलिसकर्मी को वर्तमान वेतन की तुलना में दस से बारह हज़ार रुपये का नुकसान उठाना पड़ता है। उन्हें लगभग नब्बे साप्ताहिक अवकाश,सेकंड सैटरडे,राष्ट्रीय व त्योहार व अन्य छुट्टियों के मुकाबले में केवल पन्द्रह स्पेशल लीव दी जाती है।

सीटू कमेटी ने यह भी कहा कि वर्ष 2007 में हिमाचल प्रदेश में बने पुलिस एक्ट के पन्द्रह साल बीतने पर भी नियम नहीं बन पाए हैं। इस एक्ट के अनुसार पुलिसकर्मियों को सुविधा तो दी नहीं जाती है परन्तु कर्मियों को दंडित करने के लिए इसके प्रावधान बगैर नियमों के भी लागू किये जा रहे हैं जिसमें एक दिन डयूटी से अनुपस्थित रहने पर तीन दिन का वेतन काटना भी शामिल है। पुलिसकर्मियों की प्रोमोशन में भी कई विसंगतियां हैं व इसका टाइम पीरियड भी बहुत लंबा है। हैड कॉन्स्टेबल से एएसआई बनने के लिए सत्रह से बीस वर्ष भी लग जाते हैं।

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किन्नौर में लापता पर्यटकों में से 2 और के शव बरामद, 2 की तालाश जारी,आभी तक कुल 7 शव बरामद

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kinnaur trekker deaths

शिमला रिकोंगपिओ में 14 अक्तुबर को उत्तरकाशी के हर्षिल से छितकुल की ट्रैकिंग पर निकले 11 पर्यटकों में से लापता चार पर्वतारोहीयों में से दो  पर्वतारोहियों के शवो को आई.टी.बी.पी व पुलिस दल द्वारा पिछले कल सांगला लाया गया था जहां सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र सांगला में दोनों शवों का पोस्टमार्टम किया गया।

यह जानकारी देते हुए उपायुक्त किन्नौर अपूर्व देवगन ने बताया कि इन दोनों की पहचान कर ली गई है जिनमे मे एक उतरकाशी व दूसरा पश्चिम बंगाल से सम्बंधित था।

उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन किन्नौर द्वारा आज एक शव वाहन द्वारा उतरकाशी को भेज दिया गया है जहाँ शव को जिला प्रशासन उतरकाशी को सौंपा जाएगा। जब कि दूसरा शव वाहन द्वारा शिमला भेजा गया है जिसे शिमला में मृतक के परिजनों को सौंपा जायेगा।

उपायुक्त अपूर्व देवगन ने बताया कि अभी भी लापता दो  पर्यटकों की तलाश आई.टी.बी.पी के जवानों द्वारा जारी है। उल्लेखनीय है कि गत दिनों उतरकाशी से छितकुल के लिये 11 पर्वतारोही ट्रेकिंग पर निकले थे जो बर्फबारी के कारण लमखंगा दर्रे में फंस गये थे जिसकी सूचना मिलने पर जिला प्रशासन द्वारा सेना के हेलीकॉप्टर व आई.टी.बी.पी के जवानों की सहायता से राहत व बचाव कार्य आरम्भ किया था। सेना व आई.टी.बी.पी के जवानों ने 21 अक्टूबर को दो पर्यटकों को सुरक्षित ढूंढ निकाला था। इसी दौरान उन्हें अलग अलग स्थानों पर पाँच ट्रेकरों के शव ढूंढ निकलने में सफलता मिली थी। जबकि 4 पर्यटक लापता थे जिसमे से राहत व बचाव दल को 22 अक्तुबर को 2 शव ढूढ़ निकालने में सफलता मिली थी। अभी भी दो पर्यटक लापता हैं जिनकी राहत व बचाव दल द्वारा तलाश जारी है।

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