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2 हफ्ते से धधक रहे किन्नौर के जंगल , चिलगोजा और दियार समेत करोड़ों की वन सम्पदा जल कर राख

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किन्नौर- हिमाचल प्रदेश के किन्नौर जिला मुख्यालय के साथ लगते क्षेत्र की 3 पंचायतों के जंगल 2 हफ्तों से धधक रहे हैं लेकिन सरकारी स्तर पर आग पर काबू पाने के कोई पुख्ता इंतजाम अब तक नही हुए हैं। इस घटनाक्रम में वन विभाग की कार्यप्रणाली पर भी प्रश्न चिन्ह लग गया है। क्षेत्र के लोगों के अनुसार विलुप्तप्राय: चिलगोजा और दियार के हजारों छोटे-बड़े पेड़ अब तक आग की भेंट चढ़ चुके हैं। करोड़ों की वन सम्पदा स्वाह हुई है। हालांकि आग बुझाने के लिए स्थानीय लोगों के साथ आईटीबीपी, होमगार्ड, वन और अग्निशमक विभाग ने भी प्रयास किए लेकिन आग अब भी बेकाबू है।

जैसा की आपको पता होगा की जंगलो में आग लगना कोई नई बात नही हैं। प्रदेश की राजधानी शिमला के जंगल भी बरसो से भयानक आग की चपेट में आ रहे है तथा इन जगंलो में रह रहे स्थानीय लोग भी अपने खेतो में आग लगा देते है जो की भड़क कर जंगलो के भीतर पहुँच जाती है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि प्रदेश सरकार के पास जंगलो में लगने वाली आग पर काबू पाने के लिए कोई पुख्ता इंतेज़ाम नहीं है! जंगलो में आग लगने से वहां रह रहे पशु, पक्षियों, वन सम्पदा को तो नुकसान पहुंचता ही है बल्कि जान पर भी खतरा मंडराने लगता है। अगर पर्यावरण की दृष्टि से भी यह नुकसान दायक है।
पढ़ें:शिमला के जंगल फिर भयानक आग की चपेट में, करोड़ों रुपये का नुकसान
लोगों का कहना है कि 6 नवम्बर को पूर्वणी के जंगल में आग लगी जिसकी सूचना उन्होंने वन विभाग को दी। लोगों ने वनरक्षक को मौके का मुआयना करने के लिए कहा लेकिन वनरक्षक ने इसे गम्भीरता से नहीं लिया। 7 नवम्बर को तूफान के करण आग ने जंगल के बड़े हिस्से को घेर लिया और धीरे-धीरे आग बेकाबू होती गई। वन विभाग द्वारा सकारात्मक प्रयास न किए जाने का भी लोग आरोप लगा रहे हैं।
लोगों का यह भी कहना है कि हजारों पेड़-पौधे इस क्षेत्र में जल गए लेकिन वन विभाग के अधिकारी क्षेत्र में अब तक नहीं पहुंचे हैं।

बताया जा रहा है कि आग पूर्वणी, आशपा, किब्बर से होते हुए रिब्बा के जंगलों तक पहुंची। उसके बाद उसने जिला मुख्यालय के ठीक सामने पोवारी के जंगलों को अपनी चपेट में ले लिया। 2 दर्जन से अधिक आईटीबीपी के जवान व होमगार्ड के जवान भी आग बुझाने में लगे रहे लेकिन वन विभाग अपने आधा दर्जन कर्मी भी इस आगजनी को काबू पाने के लिए नही भेज पाया है। रिब्बा, पूर्वणी और पोवारी के लोग भी यथासम्भव आग बुझाने जा रहे हैं। जंगल में पानी की उपलब्धता न होने और आधुनिक उपकरण न होने से सभी प्रयास विफल साबित हो रहे हैं।

र्वणी पंचायत के प्रधान शेर सिंह और उपप्रधान महेश ने बताया कि 6 नवम्बर से जंगल में आग लगी है। आग को बुझाने के लिए ग्रामीण लगातार प्रयास कर रहे हैं। इसके अलावा आईटीबीपी, होमगार्ड और वन विभाग के क्षेत्रीय कर्मी भी इस प्रयास में जुटे हैं लेकिन आग पर काबू पाना मुश्किल हो गया है। वहीं इस बारे वन अरण्यपाल रामपुर अनिल ठाकुर ने बताया कि आग को बुझाने का प्रयास किया जा रहा है लेकिन विकट क्षेत्र होने के कारण आग पर काबू पाना मुश्किल है।

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10 कार्यकर्ताओं के निष्कासन पर ऐबीवीपी का धरना प्रदर्शन,विश्वविद्यालय पर एक तरफा कार्यवाही का लगाया आरोप

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शिमला– आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद इकाई ने विश्वविद्यालय में पिंक पेटल्स चौक पर धरना प्रदर्शन किया । इकाई सचिव अंकित चंदेल ने जानकारी देते हुए बताया की पिछले कल विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से एक तनशाही फैसला निकाला गया जिसमें 10 ऐबीवीपी कार्यकर्ताओं को विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया गया।

गौरतलव है की पिछले 11 जुलाई को विद्यार्थी परिषद ने कैम्पस मे धरना प्रदर्शन किया था जिसके चलते 10 छात्रों का निष्काशन कर दिया है।

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धरने को संबोधित करते हुए इकाई सचिव अंकित चन्देल ने बताया की एक तरफ जब कर्मचारियों द्वारा कुलपति कार्यालय में नारेबाजी की जाती है तो उन कर्मचारियों क खिलाफ कुलपति साहब की कोई प्रतिक्रिया नही आती, परन्तु जब ऐबीवीपी कैम्प्स में धरना प्रदर्शन करते है तो उन्हें तुरन्त प्रभाव से निष्कासित कर दिया जाता है जोकि सरासर एकतरफा कार्यवाही है।

चन्देल ने कहा कि विश्वविद्यालय अपनी कमियों को छुपाने क लिए तरह-2 के हथकण्डे अपना रहा है। जहाँ अधूरे परिणामों की वजह से प्रदेश भर के छात्र परेशानी में हैं वहीँ प्रशासन अपने मुंह मिया मिठु बनने में कोई कसर नही छोड़ता।

ABVP Protest at HPU over suspension of members

चन्देल ने कहा कि सभी को ज्ञात है विवि में नौ महीने में पीएचडी (P.hD) और एमसीऐ (MCA) में फर्जी तरीके से प्रवेश के मामले सामने आते है, और इन सभी गडवड़ियों के विरोध करने वाले छात्र संगठनों की आवाज को दबाने का प्रयास विश्वविद्यालय प्रशासन् कर रहा है।

धरने क माध्यम से प्रशासन को चेताते हुये परिषद ने मांग उठाई विश्वविद्यालय अपना काम करे न कि छात्र संगठनों के कार्य मे दखल दे। ऐबीवीपी ने चेतावनी दी है कि जल्द से जल्द परिषद कार्यकर्ताओं का निष्कासन् वापिस नही करता है तो प्रदेश स्तरीय आंदोलन करने में कोई गूरेज़ नही होगाI ऐबीवीपी ने साथ ही यूजी UG के सभी परीक्षा परणामों को पूरा करने की मांग भी प्रशासन के सामने रखी है।

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सेब के सर्मथन मुल्य में मात्र 50 पैसे बढ़ौतरी बागवानों से भद्दा मजाकः राठौर

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शिमला -हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा सेब के सर्मथन मुल्य में की गई मात्र 50 पैसे की बढ़ौतरी को बागवानों के साथ किया गया भद्दा मजाक करार दिया है।

आज शिमला से जारी प्रेस वयान में कुलदीप सिंह राठौर ने बताया कि वर्तमान समय में जब बागवानों को अपनी फसल तैयार करने के लिए भारी मंहगाई का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि जी.एस.टी के चलते सेब से संबंधित पैकिंग से लेकर फफूंद नाशक दवाईयां एवं अपनी फसलों को मंण्ड़ियों तक पहुॅचाने के लिए किराया भी कई गुणा बढ़ गया है इसके चलते सेब के सर्मथन मुल्य कम से कम 10 रूपये होना चाहिए।

कुलदीप राठौर ने कहा कि सेब इलाकों में बहुत जगह सड़कों की हालत खराब पड़ी है और सेब को मण्ड़ियों तक पहुॅचाने वाले ट्रक व गाड़ियों के मालिक खराव सडकों पर गाडियाॅं भेजने को मना कर रहे हैं इसलिए सरकार को चाहिए कि ख़राब सडकों को जल्दी से जल्दी ठीक करवायें।

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हिमाचल सरकार पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे : कर्मचारी नेता

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शिमला -हिमाचल प्रदेश कर्मचारी महासंघ के पूर्व अध्यक्ष सुरेन्द्र मनकोटिया, पूर्व सयुक्त सचिव सेन राम नेगी,पूर्व प्रेस सचिव हरीश गुलेरिया, गैर शिक्षक महासंघ के महासचिव दीप राम शर्मा ,इंदिरागांधी आयुर्विज्ञान मेडिकल कॉलेज के पूर्व महासचिव आत्मा राम शर्मा ने प्रदेश सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद करने के निर्णय की आलोचना करते हुए इसे कर्मचारी विरोधी बताया है।

कर्मचारी नेताओं का कहना है कि जब जब प्रदेश में भाजपा सरकार सत्ता में आई तब तब प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद किया गया,जो कि कर्मचारियों के साथ अन्याय है।

कर्मचारी नेताओं ने जयराम सरकार की आलोचना करते हुए कहा है कि भाजपा कभी भी कर्मचारी हितेषी नही रही है।पूर्व में धूमल सरकार ने भी सत्ता में आते ही इसे बंद किया था अब बर्तमान में जयराम सरकार ने भी ऐसा ही किया है।उनका कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रख कर इसे खोला था।इसे खोलने का एक ही उद्देश्य था कि जो सरकार के किसी भी गलत फैंसले को चुनौती देने के लिए स्वतंत्र था और उसे जल्द और सस्ता न्याय मिल जाता था।

नेताओं का कहना है कि अब ऐसा नही होगा।किसी भी कर्मचारी को न्याय के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना होगा जहां पहले ही हजारों मामले सुनवाई के लिए लंबित पड़े है।

कर्मचारी नेताओं ने मुख्यमंत्री जयराम से आग्रह किया है कि वह इस मामले पर पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे। इसे उन्हें अपनी किसी भी प्रतिष्ठा का प्रश्न नही बनना चाहिए।

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