हिमाचल की 8 नदियों का पानी प्रदूषित, सबसे अधिक प्रदूषित हिस्सा ब्यास नदी का

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शिमला- केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने देश भर की नदियों मॉनीटरिंग की तो कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। पूरे देश में जहां 275 नदियाें का पानी प्रदूषित पाया गया। वहीं हिमाचल की 8 नदियों का पानी भी तय मानकों के हिसाब से सही नहीं पाया गया। सूबे की ब्यास, टौंस, सिरसा, स्वां, सुखना, सुकेती खड्ड, बिनवा और मारकंडा नदियों के पानी में बॉयोलॉजीकल ऑक्सीजन डिमांड तय मानकों से कम पाया गया।

सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के अनुसार इस दूषित पानी में किसी भी तरह के जीव-जंतुओं के अलावा मनुष्यों के लिए भी ठीक नहीं माना जाता है। मनुष्य अगर लगातार इस पानी का सेवन करें तो वह कई गंभीर बीमारियों का शिकार हो जाएगा।

ब्यास नदी सबसे ज्यादा 80 किलोमीटर एरिया में प्रदूषित होकर बह रही है। हिमाचल की आठ नदियों के 12 स्ट्रैच को प्रदूषित आंका गया है। इन 12 स्थानों में नदी के जल में सुधार लाने के लिए कार्य करने की जरूरत पर बल दिया जा रहा है। हिमाचल की आठ नदियों का 136 किलाेमीटर का स्ट्रैच प्रदूषित पाया गया है।
कहां पर कितना हिस्सा प्रदूषित

नदी प्रदूषित स्ट्रैच कस्बा किलोमीटर
ब्यास कुल्लू से गोपीपूर स्नोट, कुल्लू 80
टौंस किलाड़ से तिलवारी डांडा, हरिपूर 10
सिरसा नालगढ़ से सोलन सोरी, रडयाली 6
स्वां ऊना से संतोषगढ अरनैला, प्रेमनगर 10
सुखना सुखना से परमाणू भगवानपूरा, किशनगढ 15
सुकेती मंडी से बैहना समखेतर,करतापूर 6
बिनवा पपरोला से बैजनाथ खतरेहड 5
मारकंडा कालाअंब से नारायणपूर कालाअंब, आगली 4

इसमें से ब्यास नदी का सबसे अधिक 80 किलोमीटर का स्ट्रेच प्रदूषित पाया गया है। पानी में बायोकेमिकल ऑक्सीजन की मात्रा अधिक होने का मतलब यह है कि पानी में किसी ऑक्सीजन की कमी है और किसी प्रकार का जीव इसमें जीवित नहीं रह सकता। देश भर में सीपीसीबी की ओर से मॉनिटर की गई नदियों में से 275 नदियों में प्रदूषण पाया गया है। सीपीसीबी ने 29 राज्यों और 6 केंद्र शासित राज्यों की 445 नदियों को मॉनिटर किया था। इनमें से 302 स्ट्रैच में बीओडी के स्तर को सही नहीं आंका गया है।

प्रदूषण के कारण

नदियों में जल प्रदूषण का मुख्य कारण नदियों में फैक्ट्रियों से निकलने वाला वेस्ट और सीवरेज है। नदियों में प्लास्टिक और कूड़ा कचरा फेंके जाने से प्रदूषण बढ़ गया है। नदियों में मरे हुए पशु, नदियों के किनारे मल जल का त्याग करने और पशुओं को नहलाना से भी पानी की गुणवत्ता में असर पड़ता है।

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