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चम्बा की पाठशाला में कहीं 15 बच्चों लिए 3 अध्यापक, तो कहीं 44 बच्चों को पढ़ा रहा सिर्फ 1अध्यापक

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इकलौता अध्यापक महज स्कूल को खोलकर बच्चों को बिठाने व उनके लिए दोपहर के भोजन की व्यवस्था करने तक ही सीमित होकर रह गया है

चम्बा- डल्हौजी विधानसभा क्षेत्र के दायरे में आने वाले राजकीय प्राथमिक पाठशाला लदवाह में शिक्षा ग्रहण कर रहे 44 बच्चों के लिए नियुक्त 2 अध्यापकों में से एक को राजकीय प्राथमिक पाठशाला जन्ना में शिक्षा विभाग ने तैनात कर लदवाह स्कूल की शिक्षा व्यवस्था को पटरी से नीचे लाने का काम किया है।

जन्ना स्कूल में पहले से ही 2 अध्यापक मौजूद हैं, वहीं अब वहां 3 अध्यापक 15 बच्चों को पढ़ाने का काम कर रहे हैं, ऐसे में जिला प्रशासन लदवाह स्कूल में शिक्षा की गाड़ी को फिर से पटरी पर लाने के लिए जन्ना स्कूल में तैनात अध्यापक को दोबारा स्कूल में भेजने के शिक्षा विभाग को निर्देश जारी करे। यह बात राजकीय प्राथमिक पाठशाला लदवाह की स्कूल प्रबंधन समिति अध्यक्ष रेखा देवी की अगुवाई में अन्य सदस्यों ने एडीएम चम्बा को इस संदर्भ में अपना मांग पत्र सौंपते हुए कही।

स्कूल की प्रबंधन समिति की अध्यक्ष ने बताया कि लदवाह स्कूल में 44 बच्चों पर 2 अध्यापक तैनात थे तो स्कूल की शिक्षा व्यवस्था सुचारू बनी हुई थी लेकिन जब से यहां के एक अध्यापक को जन्ना में तैनात किया है तो इस स्कूल के दोपहर के भोजन की व्यवस्था के साथ एक अध्यापक द्वारा 5 कक्षाओं को शिक्षा देना बेहद मुश्किल हो रहा है। सही शब्दों में कहें तो इकलौता अध्यापक महज स्कूल को खोलकर बच्चों को बिठाने व उनके लिए दोपहर के भोजन की व्यवस्था करने तक ही सीमित होकर रह गया है।

जन्ना स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रहे महज 15 बच्चों के लिए पहले से ही वहां पर 2 अध्यापक नियुक्त थे लेकिन लदवाह स्कूल से एक अध्यापक को जन्ना के लिए स्थानांतरित करने से जन्ना से बदले गए अध्यापक अदालत में चले गए हैं, ऐसे में अब उक्त स्कूल में वर्तमान में 3 शिक्षक हो गए हैं।

प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि ऐसे में तबादलों के इस खेल में लदवाह स्कूल में शिक्षा ग्रहण कर रहे बच्चों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। इस बात को ध्यान में रखते हुए जिला प्रशासन शिक्षा विभाग को लदवाह से बदले गए अध्यापक के तबादला आदेश को रद्द करने के आदेश जारी करे ताकि इस स्कूल के 44 बच्चों की प्रभावित हुई पढ़ाई फिर से सुचारू हो पाए।

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10 कार्यकर्ताओं के निष्कासन पर ऐबीवीपी का धरना प्रदर्शन,विश्वविद्यालय पर एक तरफा कार्यवाही का लगाया आरोप

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शिमला– आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद इकाई ने विश्वविद्यालय में पिंक पेटल्स चौक पर धरना प्रदर्शन किया । इकाई सचिव अंकित चंदेल ने जानकारी देते हुए बताया की पिछले कल विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से एक तनशाही फैसला निकाला गया जिसमें 10 ऐबीवीपी कार्यकर्ताओं को विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया गया।

गौरतलव है की पिछले 11 जुलाई को विद्यार्थी परिषद ने कैम्पस मे धरना प्रदर्शन किया था जिसके चलते 10 छात्रों का निष्काशन कर दिया है।

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धरने को संबोधित करते हुए इकाई सचिव अंकित चन्देल ने बताया की एक तरफ जब कर्मचारियों द्वारा कुलपति कार्यालय में नारेबाजी की जाती है तो उन कर्मचारियों क खिलाफ कुलपति साहब की कोई प्रतिक्रिया नही आती, परन्तु जब ऐबीवीपी कैम्प्स में धरना प्रदर्शन करते है तो उन्हें तुरन्त प्रभाव से निष्कासित कर दिया जाता है जोकि सरासर एकतरफा कार्यवाही है।

चन्देल ने कहा कि विश्वविद्यालय अपनी कमियों को छुपाने क लिए तरह-2 के हथकण्डे अपना रहा है। जहाँ अधूरे परिणामों की वजह से प्रदेश भर के छात्र परेशानी में हैं वहीँ प्रशासन अपने मुंह मिया मिठु बनने में कोई कसर नही छोड़ता।

ABVP Protest at HPU over suspension of members

चन्देल ने कहा कि सभी को ज्ञात है विवि में नौ महीने में पीएचडी (P.hD) और एमसीऐ (MCA) में फर्जी तरीके से प्रवेश के मामले सामने आते है, और इन सभी गडवड़ियों के विरोध करने वाले छात्र संगठनों की आवाज को दबाने का प्रयास विश्वविद्यालय प्रशासन् कर रहा है।

धरने क माध्यम से प्रशासन को चेताते हुये परिषद ने मांग उठाई विश्वविद्यालय अपना काम करे न कि छात्र संगठनों के कार्य मे दखल दे। ऐबीवीपी ने चेतावनी दी है कि जल्द से जल्द परिषद कार्यकर्ताओं का निष्कासन् वापिस नही करता है तो प्रदेश स्तरीय आंदोलन करने में कोई गूरेज़ नही होगाI ऐबीवीपी ने साथ ही यूजी UG के सभी परीक्षा परणामों को पूरा करने की मांग भी प्रशासन के सामने रखी है।

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सेब के सर्मथन मुल्य में मात्र 50 पैसे बढ़ौतरी बागवानों से भद्दा मजाकः राठौर

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शिमला -हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा सेब के सर्मथन मुल्य में की गई मात्र 50 पैसे की बढ़ौतरी को बागवानों के साथ किया गया भद्दा मजाक करार दिया है।

आज शिमला से जारी प्रेस वयान में कुलदीप सिंह राठौर ने बताया कि वर्तमान समय में जब बागवानों को अपनी फसल तैयार करने के लिए भारी मंहगाई का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि जी.एस.टी के चलते सेब से संबंधित पैकिंग से लेकर फफूंद नाशक दवाईयां एवं अपनी फसलों को मंण्ड़ियों तक पहुॅचाने के लिए किराया भी कई गुणा बढ़ गया है इसके चलते सेब के सर्मथन मुल्य कम से कम 10 रूपये होना चाहिए।

कुलदीप राठौर ने कहा कि सेब इलाकों में बहुत जगह सड़कों की हालत खराब पड़ी है और सेब को मण्ड़ियों तक पहुॅचाने वाले ट्रक व गाड़ियों के मालिक खराव सडकों पर गाडियाॅं भेजने को मना कर रहे हैं इसलिए सरकार को चाहिए कि ख़राब सडकों को जल्दी से जल्दी ठीक करवायें।

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हिमाचल सरकार पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे : कर्मचारी नेता

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शिमला -हिमाचल प्रदेश कर्मचारी महासंघ के पूर्व अध्यक्ष सुरेन्द्र मनकोटिया, पूर्व सयुक्त सचिव सेन राम नेगी,पूर्व प्रेस सचिव हरीश गुलेरिया, गैर शिक्षक महासंघ के महासचिव दीप राम शर्मा ,इंदिरागांधी आयुर्विज्ञान मेडिकल कॉलेज के पूर्व महासचिव आत्मा राम शर्मा ने प्रदेश सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद करने के निर्णय की आलोचना करते हुए इसे कर्मचारी विरोधी बताया है।

कर्मचारी नेताओं का कहना है कि जब जब प्रदेश में भाजपा सरकार सत्ता में आई तब तब प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद किया गया,जो कि कर्मचारियों के साथ अन्याय है।

कर्मचारी नेताओं ने जयराम सरकार की आलोचना करते हुए कहा है कि भाजपा कभी भी कर्मचारी हितेषी नही रही है।पूर्व में धूमल सरकार ने भी सत्ता में आते ही इसे बंद किया था अब बर्तमान में जयराम सरकार ने भी ऐसा ही किया है।उनका कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रख कर इसे खोला था।इसे खोलने का एक ही उद्देश्य था कि जो सरकार के किसी भी गलत फैंसले को चुनौती देने के लिए स्वतंत्र था और उसे जल्द और सस्ता न्याय मिल जाता था।

नेताओं का कहना है कि अब ऐसा नही होगा।किसी भी कर्मचारी को न्याय के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना होगा जहां पहले ही हजारों मामले सुनवाई के लिए लंबित पड़े है।

कर्मचारी नेताओं ने मुख्यमंत्री जयराम से आग्रह किया है कि वह इस मामले पर पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे। इसे उन्हें अपनी किसी भी प्रतिष्ठा का प्रश्न नही बनना चाहिए।

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