रिपोर्ट में खुलासा, दिवाली पर लोगों को खिला दी घटिया मिठाई

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चित्र: Wikiwand/Representational

सोलन- फेस्टिवल सीजन के दौरान जिला भर से मिठाइयों के 09 सैंपल अधोमानक निकले हैं। इनमें खोया से बनी मिठाइयों के अलावा पनीर के भी सैंपल शामिल हैं। स्वास्थ्य विभाग ने कारोबारियों को नोटिस जारी कर एक माह के भीतर स्थिति स्पष्ट करने को कहा है। कारोबारी फेल सैंपल की जांच खुद मनमर्जी की प्रयोगशाला से करवा सकता है। अन्यथा विभाग नियमानुसार जुर्माने की कार्रवाई शुरू कर देगा।

दीवाली, करवाचौथ और भाईदूज के दौरान भरे इन सैंपलों की रिपोर्ट आने से पहले कई उपभोक्ता इनका सेवन कर चुके हैं। हैरत की बात है कि स्वास्थ्य विभाग कह रहा है कि इस पूरे त्योहारी सीजन में नौ सैंपल भरे हैं और नौ के नौ ही फेल निकले हैं। कई मिठाइयों में धूल मिट्टी के कण तो कई में जरूरत से अधिक सिंथेटिक कलर का यूज हुआ है। सिंथेटिक कलर के अधिक सेवन से स्किन इनफेक्शन, थ्रोट इनफेक्शन और पेट दर्द की समस्या हो सकती है।
यहां के सैंपल निकले फेल

खाद्य सुरक्षा अधिकारी लीलाधर सिंह ने त्योहारी सीजन के दौरान सोलन समेत नालागढ़ और बद्दी में कुल नौ सैंपल लिए गए थे, यह सभी सैंपल फेल निकले हैं। कहा कि क्षेत्रीय अस्पताल सोलन के खाद्य सुरक्षा विभाग द्वारा पिछले माह दिवाली, धनतेरस, भाईदूज और अन्य त्योहारों पर सोलन शहर के माल रोड और नालागढ़-बद्दी रोड पर स्थित मिठाई की नौ दुकानों से विभिन्न मिठाइयों के सैंपल भरे थे। विभाग द्वारा सभी कारोबारियों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इसमें 30 दिन के अंदर सभी कारोबारियों को जवाब देने को कहा है।

यह निकली हैं खामियां

चमचम मिठाई में मानव शरीर को नुकसान पहुंचाने वाले केमिकल यानी सिंथेटिक कलर अधिक पाए गए हैं। दुकानदारों द्वारा यह चमचम मिठाई को खूबसूरत बनाने के लिए उपयोग में लाई जाती है। पनीर और खोया में पाए जाने वाला फेट कंटेंट 35 प्रतिशत पाया गया। यह तय मानकों से कहीं ज्यादा है। इसके साथ ही लैब में जांच के बाद पेठे को बनाने में उपयोग होने वाली चीजें सब स्टैंडर्ड की पाई गई। लड्डू, बर्फी जैसी मिठाइयों में धूल और मिट्टी के आंश पाए गए।

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