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अपंगता प्रमाण पत्र जारी करने के लिए सोलनऔर चम्बा में लगेंगे निःशुल्क चिकित्सा शिविर

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शिमला- सोलन जिले में दिव्यांगो को चिन्हित कर प्रमाणपत्र जारी करने के लिए शीघ्र ही सघन अभियान आरम्भ किया जा रहा है। उपायुक्त राकेश कंवर ने कहा कि जिले में इस दिशा में नवम्बर महीने में सभी विकास खण्डों में कुल 12 निःशुल्क चिकित्सा शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में केवल उन्हीं दिव्यांगो के प्रमाणपत्र जारी किए जाएंगे जिनके प्रमाणपत्र अभी बनाए जाने शेष हैं। प्रमाणपत्र धारकों को इन शिविरों में आने की आवश्यकता नहीं है।

जानकारी देते हुए उपायुक्त ने बताया कि 3 नवम्बर, 10 नवम्बर, 16 नवम्बर, 17 नवम्बर तथा 24 नवम्बर 2016 को क्षेत्रीय अस्पताल सोलन, 05 नवम्बर, 12 नवम्बर, 25 तथा 26 नवम्बर, 2016 को को सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र नालागढ़, 19 नवम्बर, 2016 को नागरिक अस्पताल कुनिहार, 21 नवम्बर, 2016 को प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पटट्। महलोग, 23 नवम्बर, 2016 को नागरिक अस्पताल कण्डाघाट में यह शिविर आयोजित किए जाएंगे। सभी शिविर प्रातः 10:30 बजे से शाम 04: 00 बजे तक आयोजित किए जाएंगे। उन्होंने जिले के सभी नागरिकों से अपील की है कि अपने आस-पास के क्षेत्र के सभी दिव्यांगो को इन शिविरों में आने के लिए प्रेरित करें।इन शिविरों में विशेषज्ञ चिकित्सक उपलब्ध रहेंगे ताकि पात्र दिव्यांगों की जांच के उपरान्त उन्हें प्रमाण पत्र जारी किए जा सकें।

उपायुक्त सोलन ने कहा कि 03 दिसम्बर, 2016 को विश्व विकलांगता दिवस से पूर्व सोलन जिले के सभी पात्र दिव्यांग व्यक्तियों की पहचान कर उन्हें प्रमाण पत्र जारी किए जाएंगे। इस दिशा में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग तथा जिला कल्याण अधिकारी द्वारा नियमित रूप से शिविर आयोजित किए जाते हैं। प्रदेश सरकार के इस महत्त्वाकांक्षी अभियान में जहां जिले के सभी शारीरिक एवं मानसिक रूप से अक्षम व्यक्तियों को चिन्हित किया जाएगा वहीं इस वर्ग के कल्याण के लिए कार्यन्वित की जा रही योजनाओं से सभी को लाभान्वित करने में भी सहायता मिलेगी।

इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए लगाए जाने वाले शिविरों की सफलता के लिए आंगनवाड़ी तथा आशा कार्यकर्ताओं को इनसे जोड़ा जाएगा। आंगनवाड़ी तथा आशा कार्यकर्ता जिले की सभी पंचायतों एवं गांवों मं दिव्यांग व्यक्तियों की पहचान कर उन्हें इन शिविरोे में पंहुचने के लिए प्रेरित करेंगी। उन्होंने जिला कार्यक्रम अधिकारी, जिला कल्याण अधिकारी, उप निदेशक उच्च तथा प्रारम्भिक शिक्षा तथा सर्व शिक्षा अभियान को निर्देश दिये कि सभी विद्यालयों एवं पंचायतों में विकलांग व्यक्ति चिन्हित करें ताकि सभी को अविलम्ब पहचान पत्र जारी किए जा सकें।

जिले में 5 स्थानों पर लगेंगे अपंगता प्रमाण पत्र शिविर, लोग उठायें पूरा लाभ: उपायुक्त

वहीं चम्बा में भी इस अपंगता प्रमाणपत्र शिविरों का आयोजन किया जा रहा है यह शिविर राज्य सरकार द्वारा जारी विशेष निर्देशों की अनुपालना के तहत लगाए जा रहे हैं ।इन शिविरों के आयोजन से जुड़े प्रबंधों की समीक्षा करते हुए उपायुक्त सुदेश मोख्टा ने आज बताया कि लोगों को उनके घर द्वार पर यह सुविधा मिलेगी।

इन शिविरों के सफल आयोजन को ध्यान में रखते हुए संबंधित उपमंडलों के उपमंडलाधिकारी (नागरिक) समन्वय करेंगे। उपायुक्त चम्बा ने बताया कि पहला शिविर भरमौर स्थित अस्पताल में 4 नवंबर को लगेगा। सलूणी में यह शिविर 8 को, तीसा में 9 को,चूड़ी में 22 को और समोट में 29 नवंबर को आयोजित किए जाएंगे। शिविर सुबह 10 बजे शुरू होकर शाम 4 बजे तक चलेगा। शिविर के दौरान विभिन्न प्रकार की अपंगता को लेकर प्रमाण पत्र जारी किए जाएंगे। शिविर में विशेषज्ञ डॉक्टर मौजूद रहेंगे।

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आढ़तियों के विरुद्ध चल रहे धोखाधड़ी के मुकदमें, फिर भी सरकार ने कारोबार करने की दे दी अनुमति

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शिमला– किसान संघर्ष समिति की बैठक 19 जुलाई को गुम्मा, कोटखाई में आयोजित की गई। इसकी अध्यक्षता सुशील चौहान की ने की तथा इसमे समिति के सचिव संजय चौहान विशेष रूप से उपस्थित रहे। बैठक में किसानों व बागवानों के ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा की

बैठक में बागवानों ने अवगत करवाया कि जिन आढ़तियों ने बागवानों का बकाया भुगतान करना है व उनके विरुद्ध शिकायत दर्ज की गई है, इनमें से कुछ आढ़तियों ने दुकाने खोल कर अपना कारोबार आरम्भ कर दिया है। जबकि ए पी एम सी कह रही हैं कि ऐसे आढ़तियों व कारोबारियों को कारोबार नहीं करने दिया जाएगा। इससे ए पी एम सी की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा है और वह इनको कारोबार की इनको कैसे इजाजत दे रही हैं जबकि इनके विरुद्ध मुकदमे चल रहे हैं और कार्यवाही की जानी हैं।

बागवानों ने कहा कि इसके अलावा ए पी एम सी, अधिनियम, 2005 के प्रावधानों को भी लागू नहीं किया जा रहा है। अधिनियम की धारा 39 की उपधारा 2 के नियम xxi में स्पष्ट प्रावधान है कि जो भी कारोबारी होगा उसको लाइसेंस जारी करने से पहले नकद में सुरक्षा के रूप में बैंक गारंटी लेनी है परंतु ए पी एम सी के द्वारा कोई भी ऐसी व्यवस्था नहीं की है जिससे बागवानों को मण्डियों में धोखाधड़ी का शिकार न होना पड़े। ए पी एम सी निर्देश जारी कर रही हैं कि आढ़ती खरीददार की जांच करवाएगा और पता लगाएं कि वह सही है या नहीं। जोकि ए पी एम सी अपने विधिवत दायित्व को निभाने से भाग रही हैं। क्योंकि किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य सुनिश्चित करना ए पी एम सी का वैधानिक दायित्व हैं।

बागवानों ने कहा कि ए पी एम सी अधिनियम, 2005 की धारा 39 की उपधारा 2 के नियम xix में स्पष्ट प्रावधान है कि किसान बागवान का जिस दिन ही उत्पाद बिकेगा उसी दिन उसका भुगतान किया जाए। परन्तु ए पी एम सी का ये बयान कि यदि 15 दिन तक आढ़ती या खरीददार भुगतान नही करता तो उसके बाद उसके विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी। यह ए पी एम सी अधिनियम, 2005 की खुले तौर पर अवहेलना हैं। इससे ए पी एम सी की मंशा पर सवालिया निशान लगाता है।

बागवानों ने बैठक में ये भी अवगत करवाया कि सरकार द्वारा मजदूरी के रूप में 5 रुपये प्रति पेटी की जो दर तय की गई है कई मण्डियों में यह 25 से 30 रुपए तक ली जा रही हैं। बागवानों ने गत वर्ष भी सरकार व ए पी एम सी से इस बारे शिकायत की थी। परन्तु इस पर भी अभी तक कोई रोक नहीं लगाई गई है।

बैठक में कुछ बागवानों ने अवगत करवाया कि SIT के माध्यम से कुछ बागवानो का आढ़तियों के द्वारा भुगतान भी किया गया है और कुछ बागवानों की बकाया राशी 20 जुलाई, 2019 तक दी जायेगी।

बैठक में कोटखाई के 4 ऐसे बागवान भी थे जिन्होंने भी आढ़तियों से और पैसे लेने है। यह कुल रकम 6,91,605 रुपये बनती हैं।

बैठक में निर्णय लिया गया कि इनकी ओर से भी दोषी आढ़तियों के विरुद्ध मुकदमा दायर किया जाएगा।

बैठक में निर्णय लिया गया कि सरकार किसान संघर्ष समिति द्वारा 24 जून, 2019 को दिये गए मांगपत्र पर शीघ्र कार्यवाही करें। तथा ए पी एम सी की लचर कार्यप्रणाली को सुचारू करने के लिए सख्त आदेश करें ताकि किसानों व बागवानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य मिल सके और उनको मण्डियों में धोखाधड़ी व शोषण से बचाया जा सके। यदि सरकार इन माँगो पर तुरन्त ठोस कदम नहीं उठती है तो किसान संघर्ष समिति अन्य किसान संगठनों के साथ मिलकर आंदोलन करेगी

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सेब के सर्मथन मुल्य में मात्र 50 पैसे बढ़ौतरी बागवानों से भद्दा मजाकः राठौर

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शिमला -हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा सेब के सर्मथन मुल्य में की गई मात्र 50 पैसे की बढ़ौतरी को बागवानों के साथ किया गया भद्दा मजाक करार दिया है।

आज शिमला से जारी प्रेस वयान में कुलदीप सिंह राठौर ने बताया कि वर्तमान समय में जब बागवानों को अपनी फसल तैयार करने के लिए भारी मंहगाई का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि जी.एस.टी के चलते सेब से संबंधित पैकिंग से लेकर फफूंद नाशक दवाईयां एवं अपनी फसलों को मंण्ड़ियों तक पहुॅचाने के लिए किराया भी कई गुणा बढ़ गया है इसके चलते सेब के सर्मथन मुल्य कम से कम 10 रूपये होना चाहिए।

कुलदीप राठौर ने कहा कि सेब इलाकों में बहुत जगह सड़कों की हालत खराब पड़ी है और सेब को मण्ड़ियों तक पहुॅचाने वाले ट्रक व गाड़ियों के मालिक खराव सडकों पर गाडियाॅं भेजने को मना कर रहे हैं इसलिए सरकार को चाहिए कि ख़राब सडकों को जल्दी से जल्दी ठीक करवायें।

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हिमाचल सरकार पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे : कर्मचारी नेता

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शिमला -हिमाचल प्रदेश कर्मचारी महासंघ के पूर्व अध्यक्ष सुरेन्द्र मनकोटिया, पूर्व सयुक्त सचिव सेन राम नेगी,पूर्व प्रेस सचिव हरीश गुलेरिया, गैर शिक्षक महासंघ के महासचिव दीप राम शर्मा ,इंदिरागांधी आयुर्विज्ञान मेडिकल कॉलेज के पूर्व महासचिव आत्मा राम शर्मा ने प्रदेश सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद करने के निर्णय की आलोचना करते हुए इसे कर्मचारी विरोधी बताया है।

कर्मचारी नेताओं का कहना है कि जब जब प्रदेश में भाजपा सरकार सत्ता में आई तब तब प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद किया गया,जो कि कर्मचारियों के साथ अन्याय है।

कर्मचारी नेताओं ने जयराम सरकार की आलोचना करते हुए कहा है कि भाजपा कभी भी कर्मचारी हितेषी नही रही है।पूर्व में धूमल सरकार ने भी सत्ता में आते ही इसे बंद किया था अब बर्तमान में जयराम सरकार ने भी ऐसा ही किया है।उनका कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रख कर इसे खोला था।इसे खोलने का एक ही उद्देश्य था कि जो सरकार के किसी भी गलत फैंसले को चुनौती देने के लिए स्वतंत्र था और उसे जल्द और सस्ता न्याय मिल जाता था।

नेताओं का कहना है कि अब ऐसा नही होगा।किसी भी कर्मचारी को न्याय के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना होगा जहां पहले ही हजारों मामले सुनवाई के लिए लंबित पड़े है।

कर्मचारी नेताओं ने मुख्यमंत्री जयराम से आग्रह किया है कि वह इस मामले पर पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे। इसे उन्हें अपनी किसी भी प्रतिष्ठा का प्रश्न नही बनना चाहिए।

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