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10 दिन के अंदर फल और सब्जियों के दाम तय करें परचून विक्रेता: चंबा उपायुक्त

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फल और सब्जियों के दामों पर लगेगा नियंत्रण, दाम तय करने को लेकर उपायुक्त ने दिया 10 दिनों का वक्त, उपायुक्त ने केरोसिन तेल डिपो को लेकर भी मांगी रिपोर्ट”

चंबा- फल और सब्जियों के परचून विक्रेताओं के लिए प्रशासन ने दाम तय करने की दिशा में कदम उठाते हुए खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग को निर्देश जारी करते हुए 10 दिनों का समय दिया है। मंगलवार को उपायुक्त सुदेश मोख्टा की अध्यक्षता में संपन्न जिलास्तरीय सार्वजनिक वितरण कमेटी की बैठक में यह फैसला लिया गया ।

उपायुक्त ने कहा कि जिले में फल और सब्जियों के दाम तय किये जाने चाहिए ताकि उपभोक्ताओं को सहूलियत रहे और उन्हें इनके लिए अधिक दाम ना चुकाने पड़े ।उपायुक्त ने जिला नियंत्रक को निर्देश देते हुए कहा कि वह 10 दिनों के भीतर दामों को नियंत्रित करने की व्यवस्था लागू करने को लेकर आवश्यक कदम उठाएं। उन्होंने कहा कि यह व्यवस्था लागू होने के बाद चंबा के मुख्य बाजार में डिजिटल स्क्रीन स्थापित करने को लेकर भी कदम उठाए जाए ताकि उपभोक्ताओं को रोज के दामों की जानकारी इसके माध्यम से मिलती रहे।

उपायुक्त ने यह भी कहा कि नागरिक आपूर्ति निगम यह सुनिश्चित करे कि हर महीने की 10 तारीख तक राशन की सप्लाई उचित मूल्य की दुकानों तक पहुंच जाए ताकि उपभोक्ता अपना कोटा समय पर ले पाएं। उन्होंने बताया कि मिड डे मील योजना के तहत स्कूलों को दिया जाने वाला राशन हर हाल में समय पर उपलब्ध हो जाना चाहिए ताकि स्कूली बच्चों को मिड डे मील को लेकर कोई परेशानी ना हो।

कमेटी के गैर सरकारी सदस्य द्वारा उठाए गए मुद्दे पर उपायुक्त ने जिला नियंत्रक को निर्देश देते हुए कहा कि चंबा शहर के सुल्तानपुर क्षेत्र में केरोसीन तेल के जिन तीन डिपो धारकों की बात कही गई है उस मामले की छानबीन कर के रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। उपायुक्त ने कहा कि 1 जून से लेकर 20 अक्टूबर तक जिले में सार्वजनिक वितरण व्यवस्था के तहत उपभोक्ताओं को 13 करोड़ 92 लाख रुपए की आवश्यक वस्तुएं मुहैया करवाई गई है ।उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया की जिले में विशेषकर दुर्गम क्षेत्रों में सार्वजनिक वितरण व्यवस्था को चाक-चौबंद करने की जरूरत है ।

उपायुक्त ने कहा कि ऐसे क्षेत्रों में राशन का कोटा निर्धारित मात्रा में समय पर उपभोक्ताओं को मिल जाना चाहिए। खाद्य ,नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग और नागरिक आपूर्ति निगम इस दिशा में निरंतर मॉनिटरिंग करते रहें। खच्चरों पर सामान ढोए जाने के भाडे में बढ़ोतरी करने के मुद्दे पर भी उपायुक्त ने जिला नियंत्रक को निर्देश देते हुए कहा कि वह वृद्धि की प्रतिशतता के प्रस्ताव को व्यवहारिक पहलुओं के मद्देनजर तैयार करके कमेटी के समक्ष प्रस्तुत करें ताकि जिले में खच्चरों से सामान ढोए जाने के मौजूदा भाड़े में बदलाव किया जा सके।

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10 कार्यकर्ताओं के निष्कासन पर ऐबीवीपी का धरना प्रदर्शन,विश्वविद्यालय पर एक तरफा कार्यवाही का लगाया आरोप

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शिमला– आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद इकाई ने विश्वविद्यालय में पिंक पेटल्स चौक पर धरना प्रदर्शन किया । इकाई सचिव अंकित चंदेल ने जानकारी देते हुए बताया की पिछले कल विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से एक तनशाही फैसला निकाला गया जिसमें 10 ऐबीवीपी कार्यकर्ताओं को विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया गया।

गौरतलव है की पिछले 11 जुलाई को विद्यार्थी परिषद ने कैम्पस मे धरना प्रदर्शन किया था जिसके चलते 10 छात्रों का निष्काशन कर दिया है।

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धरने को संबोधित करते हुए इकाई सचिव अंकित चन्देल ने बताया की एक तरफ जब कर्मचारियों द्वारा कुलपति कार्यालय में नारेबाजी की जाती है तो उन कर्मचारियों क खिलाफ कुलपति साहब की कोई प्रतिक्रिया नही आती, परन्तु जब ऐबीवीपी कैम्प्स में धरना प्रदर्शन करते है तो उन्हें तुरन्त प्रभाव से निष्कासित कर दिया जाता है जोकि सरासर एकतरफा कार्यवाही है।

चन्देल ने कहा कि विश्वविद्यालय अपनी कमियों को छुपाने क लिए तरह-2 के हथकण्डे अपना रहा है। जहाँ अधूरे परिणामों की वजह से प्रदेश भर के छात्र परेशानी में हैं वहीँ प्रशासन अपने मुंह मिया मिठु बनने में कोई कसर नही छोड़ता।

ABVP Protest at HPU over suspension of members

चन्देल ने कहा कि सभी को ज्ञात है विवि में नौ महीने में पीएचडी (P.hD) और एमसीऐ (MCA) में फर्जी तरीके से प्रवेश के मामले सामने आते है, और इन सभी गडवड़ियों के विरोध करने वाले छात्र संगठनों की आवाज को दबाने का प्रयास विश्वविद्यालय प्रशासन् कर रहा है।

धरने क माध्यम से प्रशासन को चेताते हुये परिषद ने मांग उठाई विश्वविद्यालय अपना काम करे न कि छात्र संगठनों के कार्य मे दखल दे। ऐबीवीपी ने चेतावनी दी है कि जल्द से जल्द परिषद कार्यकर्ताओं का निष्कासन् वापिस नही करता है तो प्रदेश स्तरीय आंदोलन करने में कोई गूरेज़ नही होगाI ऐबीवीपी ने साथ ही यूजी UG के सभी परीक्षा परणामों को पूरा करने की मांग भी प्रशासन के सामने रखी है।

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सेब के सर्मथन मुल्य में मात्र 50 पैसे बढ़ौतरी बागवानों से भद्दा मजाकः राठौर

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शिमला -हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा सेब के सर्मथन मुल्य में की गई मात्र 50 पैसे की बढ़ौतरी को बागवानों के साथ किया गया भद्दा मजाक करार दिया है।

आज शिमला से जारी प्रेस वयान में कुलदीप सिंह राठौर ने बताया कि वर्तमान समय में जब बागवानों को अपनी फसल तैयार करने के लिए भारी मंहगाई का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि जी.एस.टी के चलते सेब से संबंधित पैकिंग से लेकर फफूंद नाशक दवाईयां एवं अपनी फसलों को मंण्ड़ियों तक पहुॅचाने के लिए किराया भी कई गुणा बढ़ गया है इसके चलते सेब के सर्मथन मुल्य कम से कम 10 रूपये होना चाहिए।

कुलदीप राठौर ने कहा कि सेब इलाकों में बहुत जगह सड़कों की हालत खराब पड़ी है और सेब को मण्ड़ियों तक पहुॅचाने वाले ट्रक व गाड़ियों के मालिक खराव सडकों पर गाडियाॅं भेजने को मना कर रहे हैं इसलिए सरकार को चाहिए कि ख़राब सडकों को जल्दी से जल्दी ठीक करवायें।

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हिमाचल सरकार पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे : कर्मचारी नेता

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शिमला -हिमाचल प्रदेश कर्मचारी महासंघ के पूर्व अध्यक्ष सुरेन्द्र मनकोटिया, पूर्व सयुक्त सचिव सेन राम नेगी,पूर्व प्रेस सचिव हरीश गुलेरिया, गैर शिक्षक महासंघ के महासचिव दीप राम शर्मा ,इंदिरागांधी आयुर्विज्ञान मेडिकल कॉलेज के पूर्व महासचिव आत्मा राम शर्मा ने प्रदेश सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद करने के निर्णय की आलोचना करते हुए इसे कर्मचारी विरोधी बताया है।

कर्मचारी नेताओं का कहना है कि जब जब प्रदेश में भाजपा सरकार सत्ता में आई तब तब प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद किया गया,जो कि कर्मचारियों के साथ अन्याय है।

कर्मचारी नेताओं ने जयराम सरकार की आलोचना करते हुए कहा है कि भाजपा कभी भी कर्मचारी हितेषी नही रही है।पूर्व में धूमल सरकार ने भी सत्ता में आते ही इसे बंद किया था अब बर्तमान में जयराम सरकार ने भी ऐसा ही किया है।उनका कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रख कर इसे खोला था।इसे खोलने का एक ही उद्देश्य था कि जो सरकार के किसी भी गलत फैंसले को चुनौती देने के लिए स्वतंत्र था और उसे जल्द और सस्ता न्याय मिल जाता था।

नेताओं का कहना है कि अब ऐसा नही होगा।किसी भी कर्मचारी को न्याय के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना होगा जहां पहले ही हजारों मामले सुनवाई के लिए लंबित पड़े है।

कर्मचारी नेताओं ने मुख्यमंत्री जयराम से आग्रह किया है कि वह इस मामले पर पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे। इसे उन्हें अपनी किसी भी प्रतिष्ठा का प्रश्न नही बनना चाहिए।

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