आईजीएमसी ने चमाकड़ी पुल बस हादसे के घायलों को मुफ्त दवाइयां देने से किया मना

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शिमला- हिमाचल के चमाकड़ी पुल बस हादसे के घायलों को आईजीएमसी ने मुफ्त दवाइयां देने से साफ मना कर दिया है। अस्पताल में अब तक दाखिल मरीज अपनी जेब से पैसे खर्च कर दवाइयां लेने को मजबूर हैं। कई परिजनों के पास पैसे खत्म हैं।

ऐसे में घायलों का उपचार करवाना मुश्किल हो गया है। हादसे के दिन डीसी सोलन ने सभी मरीजों के उपचार की जिम्मेदारी ली थी और कहा था कि मरीजों की दवा के बिल उनके खाते में डाले जाएं। पिछले तीन दिन से अस्पताल में दाखिल घायलों को मुफ्त में दवा नहीं दी जा रही है।

अस्पताल में सिविल सप्लाई की दुकान पर काम करने वाले कर्मचारी कह रहे हैं कि प्रशासन ने मुफ्त दवा देने की मनाही कर दी है। अगर विभाग से आदेश आते हैं तो हम दोबारा दवा देना शुरू कर देंगे।

आईजीएमसी में मौजूदा समय में चार लोगों का उपचार चल रहा है। कला देवी के बेटे रमेश चंद का कहना है कि उनकी मां की हालत काफी गंभीर है। हादसे में उनके जीजा का भी यही उपचार चल रहा है। दुकानों पर दवा लेने जा रहे हैं तो दवा नहीं दी जा रही है।

घायलों ने मांगी मदद, फिर भी महंगी दवाएं खरीदने को मजबूर

बाहर से महंगी दरों पर दवाएं खरीद रहे हैं। कुछ पैसे जेब में थे वह भी खत्म हो चुके हैं। हादसे वाले दिन डीसी सोलन ने अस्पताल में सभी मरीजों के उपचार के जिम्मेवारी ली थी, कहा था कि मरीजों के दवाओं के सभी बिल उनके खाते में डाला जाए।

उन्होंने कहा कि जिन लोगों का अभी भी इलाज चला है, उनके साथ सौतेला व्यवहार न किया जाए। अस्पताल में कला देवी के अलावा तीन और लोग भी उपचाराधीन हैं। उधर, बताया जा रहा है कि घायलों के इलाज का खर्च संबंधित जिले के डीसी की ओर से वहन किया जाना है।

डीसी सोलन से करेंगे बातचीत

मामले में जिलाधीश से बातचीत की जाएगी। अगर मुफ्त में दवा देने के निर्देश आते हैं तो मरीजों को मुफ्त दवा देनी शुरू कर दी जाएंगी।-डॅा. रमेश चंद, वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक, आईजीएमसी

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अस्पताल में पंद्रह घायलों का हुआ इलाज

हादसे के दौरान पंद्रह घायलों का अस्पताल में ग्यारह जून से इलाज चल रहा था। ज्यादातर लोगों को उपचार देने के बाद डाक्टरों ने छुट्टी दे दी है। उनमें चार लोग अभी भी अस्पताल में उपचाराधीन हैं।

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