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युग की हत्या के आरोपियों ने जुर्म कबूला , जानिए अपहरण से लेकर हत्या तक पूरा घटनाक्रम

राम बाजार में आरोपी तजिंदर, चंद्र पर निकाला भीड़ ने गुस्सा,आरोपियों की कोर्ट में पैरवी करने के लिए शहर का कोई भी नामी क्रिमिनल वकील तैयार नहीं

शिमला- राजधानी शिमला से चार साल के युग की अपहरण के बाद हत्या का जुर्म तीनों आरोपियों चंद्र शर्मा, तेजेंद्र पाल सिंह व विक्रांत बख्शी ने कबूल कर लिया है। सीआईडी ने वीरवार को आरोपियों को साथ लेकर अपहरण से लेकर हत्या तक का पूरा घटनाक्रम दोहराया और साक्ष्य के तौर पर उसका वीडियो सील कर दिया है। अपहरण और हत्या की लगभग अढ़ाई साल की प्रक्रिया को साढ़े पांच घंटे में दोहराया गया।

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भारी सुरक्षा बल की तैनाती में सीआइडी ने तीनों आरोपियों को लेकर आठ स्थानों पर घटनाक्रम दोहराया। वीरवार सुबह साढ़े सात बजे शुरू हुई यह प्रक्रिया दोपहर एक बजे तक चली। सीआइडी ने तुरंत कार्रवाई दल व सीआईडी के 25 जवानों व अधिकारियों की सुरक्षा में पूरे घटनाक्रम को दोहराया। इसके लिए तीन गाड़ियों को लगाया गया था। डीएसपी भूपेंद्र ब्रागटा की अगुवाई में टीम ने हर स्थान की जांच की जिसके लिए विशेष रूप से वीडियोग्राफर को साथ रखा गया था। इसके बाद आरोपियों को भराड़ी थाने ले जाया गया।

सीन नंबर-1

सुबह साढ़े सात बजे रामबाजार, तेजेंद्र का गोदाम

14 जून 2014 को सुबह 11 बजे मौसम खराब था। युग को मैंने तेजेंद्र के गोदाम में बुलाया। उसे कई चॉकलेट खिलाने के साथ अपने मोबाइल फोन पर वीडियो गेम खेलने को दी। वह घर जाने की जिद करता रहा पर उसे जबरदस्ती शाम तक रोके रखा। इसके बाद मैं अपने काम से कहीं चला गया। -चंद्र शर्मा, मुख्य आरोपी

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चंद्र के जाने के बाद मैंने गोदाम से पेटी निकाली, उसमें चारों तरफ से टेप लगाई। इसके बाद युग के मुंह पर टेप लगाई, उसके हाथ बांधे और पेटी में बंद कर दिया। मैं गाड़ी लेने चला गया -तेजेंद्र पाल सिंह

शाम करीब सात बजे मैं तेजेंद्र के गोदाम में आया। तब तेजेंद्र व चंद्र वहीं पर थे। चंद्रके साथ गाड़ी के पास पहुंचा। -विक्रांत बख्शी

रात नौ बजे गोदाम से उस पेटी को जिसमें युग को बंद किया था, अपने कंधे पर रखी और गुरुद्वारे के पास खड़ी गाड़ी में डाला। -चंद्र

सीन नंबर II

कर्नल की कोठी में सुबह करीब साढ़े आठ बजे

गाड़ी से लिफ्ट हाईकोर्ट होते हुए रामचंद्रा चौक में कर्नल की किराये पर ली गई 22 नंबर कोठी में पहुंचे। गाड़ी से युग को पेटी सहित उतारने के बाद उसे वैसे ही बैडबॉक्स में डाल दिया। -चंद्र शर्मा

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कारपेट पर युग के सारे कपड़े खोले। मैंने वीडियो व फोटो अपने मोबाइल फोन पर खींचे। इस दौरान युग की पिटाई भी की जिससे फिरौती की रकम ली जा सके। उसे शराब भी पिलाई और बैडबॉक्स में बांधकर रखते थे। -विक्रांत बख्शी

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तेजेंद्र व विक्रांत वहीं पर रुक गए। मैं अपने घर चला गया जिससे किसी को शक न हो। वहां पर हर स्थिति पर अपने घर से नजर रखी कि क्या-क्या हो रहा है। चंद्र

सीन नंबर III

चौड़ा मैदान व समरहिल में

मैंने इस डाकघर से फिरौती के लिए एक पत्र व एक पार्सल भेजा जिसमें कपड़े आदि भी थे। समरहिल के इस डाकघर से भी फिरौती के लिए एक पत्र भेजा। 22 जून को जब युग की हत्या की गई तो चौड़ा मैदान में इस जगह से मैंने ही बड़ा पत्थर गाड़ी में डाला था और कर्नल की कोठी में चले गए। -चंद्र

मैं भी चंद्र के साथ गाड़ी में था। -तेजेंद्र

अंबाला में पैसे देने को कहा तो पैसे लेने नहीं गया। पैसे वहां लेने जाता तो पता चल जाता। बाद में पुलिस के साथ सारी छानबीन में मौजूद था तो पता था कि हमें पकड़ने के लिए पुलिस के साथ जाल बिछाया गया है। -चंद्र

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सीआइडी ने पत्थर केलेस्टन के पानी के 12 लाख लीटर टैंक से बरामद किया।

सीन नंबर IV

केलेस्टन में हत्या वाले टैंक के पास सुबह करीब 11.30 बजे

22 जून को पहले यहां का निरीक्षण किया। इसके बाद वापसी में चौड़ा मैदान से पत्थर उठाया और नवबहार पहुंच कर युग को पेटी के साथ गाड़ी में डाला। हाईकोर्ट होते हुए केलेस्टन में बेहोशी की हालत में युग को निकाला, उसके साथ बडे पत्थर को बांध दिया और टैंक का ढक्कन खोल कर फेंक दिया। -चंद्र

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मैं, चंद्र और विक्रांत केलेस्टन पहुंचे। मैंने और चंद्र ने मिलकर युग को टैंक में फेंक दिया। -तेजेंद्र

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22 जून को जब युग को टैंक में फेंकने के लिए लाया तो मैं बार-बार कह रहा था रिज पर युग को छोड़ देते हैं मैं छोडूंगा। चंद्र और तेजेंद्र ने कहा कि वह हम दोनों को पहचानता है, हमें फंसा देगा। नहीं, इसे तो मारना ही पड़ेगा। पैसे तो नहीं मिलेंगे। सारे मामले की जानकारी पुलिस को दे दी है। विक्रांत

सीन नंबर V

शोघी के पास कपडे़ बरामद करने के लिए

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Photo: Amar Ujala

गाड़ी में युग के कपड़े और पेटी लेकर आया। यहां पर उसकी टीशर्ट फेंक दी। कुछ देर बाद कपड़े और पेटी को यहां पर जला दिया। -चंद्र

सीआईडी को युग के कपड़े नहीं मिले।

राम बाजार में आरोपी तजिंदर, चंद्र पर निकाला भीड़ ने गुस्सा

युग हत्याकांड के आरोपियों की वीरवार सुबह आठ बजे राम बाजार पहुंचने की भनक लगते ही चंद मिनटों में भीड़ जुट गई। सीआईडी कड़ी सुरक्षा में दो आरोपियों चंद्र और तजिंदर को हथकडि़यों में जकड़े हुए थी। इन्हें देखकर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्हें पीटने के लिए लपके।

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पुलिस के कमांडो ने उन्हें रोक दिया। भीड़ मांग कर रही थी कि आरोपियों को हमारे हवाले सौंप दो, वह खुद अपने हाथों से सजा देंगे। बताया जा रहा है कि इस दौरान भीड़ ने तजिंदर और चंद्र को थप्पड़ रसीद कर दिए। हालांकि पुलिस प्रशासन इससे इनकार कर रहा है।

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सीआईडी को इस बात की पहले से ही भनक लग थी कि आरोपियों पर मौके पर हमला हो सकता है। सीआईडी के साथ शिमला पुलिस का कमांडो दस्ता भी था। उन्हें पहले ही निर्देश दिए गए थे कि आरोपियों की सुरक्षा का इंतजाम कड़ा होना चाहिए इसलिए छुट्टी वाले दिन सुबह आठ बजे सीआईडी आरोपी को लेकर शहर में पहुंची। इस दौरान युग के परिजनों के साथ भी आरोपियों का आमना-सामना हुआ।

आरोपियों को मुश्किल से ही मिलेगा कोई नामी वकील

युग अपहरण और हत्याकांड मामले के आरोपियों की कोर्ट में पैरवी करने के लिए शहर का कोई भी नामी क्रिमिनल वकील तैयार नहीं है। तर्क दिया जा रहा है कि चार साल के मासूम बच्चे की हत्या करने वालों की पैरवी करना इंसानियत नहीं है। इस मामले में आरोपियों के पक्ष में खड़े होकर नामी क्रिमिनल वकील अपनी सामाजिक छवि भी खराब नहीं करना चाहते हैं। ऐसे में आरोपियों को मुश्किल से ही कोई नामी वकील मिलेगा।

एमसी के लापरवाह अफसरों पर एफआईआर दर्ज करने की तैयारी

क्लस्टन में पानी के टैंक के अंदर और बाहर युग के अवशेष मिलने के मामले में सीआईडी ने प्रदेश पुलिस मुख्यालय को रिपोर्ट भेज कर नगर निगम के जिम्मेदार अफसरों के खिलाफ मामला दर्ज करने की सिफारिश की है। प्रदेश पुलिस मुख्यालय से लिखित में सूचना मिलने पर शिमला पुलिस इस मामले में एमसी के लापरवाह अफसरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लेगी।

सीआईडी ने अपनी जांच में पाया कि आरोपियों ने 22 जून 2014 को इस टैंक में युग को फेंक दिया था। नगर निगम समय रहते टैंक की नियमित सफाई करता तो मामला पहले ही साफ हो जाता। निगम ने शहर में पीलिया फैलने के बाद टैंकों की सफाई प्रदेश न्यायालय के आदेशों के बाद की।

जब सीआईडी ने टैंक को खंगाला तो उसमें से भी युग के कुछ अवशेष मिले जबकि कुछ अवशेष टैंक के आस पास मिले थे जिन्हें निगम के कर्मचारियों ने लंगूर के अवशेष समझ कर एक बोरी में बंद करके फेंक दिया था। हत्या में इस्तेमाल किया गया पत्थर भी सीआईडी ने टैंक से बरामद किया।

टैंक सफाई में लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ जांच

टैंक से पब्लिक को पानी पिलाने के मामले में किरकिरी के बाद नगर निगम की लापरवाही की नींद टूट गई है। भराड़ी टैंक में युग का कंकाल मिलने के मामले में निगम ने टैंक की सफाई में लापरवाही करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी है। प्रकरण की जांच के लिए कमेटी गठित की गई है।

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Photo: Amar Ujala

कमेटी की जांच रिपोर्ट आने के बाद लापरवाह कर्मचारियों पर कार्रवाई की गाज गिरना तय है। भराड़ी टैंक की सफाई में लापरवाही करने के मामले को लेकर निगम प्रबंधन ने संबंधित कर्मचारियों से लिखित जवाब तलब किया है। इतना ही नहीं इस टैंक की कब-कब सफाई हुई इसका विस्तृत ब्यौरा तैयार करने के लिए सहायक आयुक्त की अध्यक्षता में एक टीम भी गठित कर दी गई है। टीम सोमवार तक आयुक्त को अपनी रिपोर्ट सौंपेगी जिसके बाद अग्रिम कार्रवाई को लेकर निर्णय लिया जाएगा।

एमसी आयुक्त ने दिए कड़ी कार्रवाई के संकेत

बुधवार शाम निगम आयुक्त ने निगम के नोडल आफिसरों की बैठक ली। बैठक में भराड़ी टैंक के मुद्दे को लेकर भी चर्चा की गई। बैठक के दौरान निगम आयुक्त ने दो टूक कहा कि इस मामले में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

अभी नहीं पहुंची है लिखित में जानकारी- एसपी

एसपी शिमला डीडब्ल्यू नेगी ने कहा कि अभी तक उनके पास इस बारे में कोई लिखित में जानकारी नहीं आई है। इतना जरूर मालूम पड़ा है कि सीआईडी ने इस बारे में नगर निगम के खिलाफ पत्र दिया है। प्रदेश पुलिस मुख्यालय से निर्देश आने के बाद ही आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।

All Photos Amar Ujala

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शिमला में दबंगों द्वारा दलित परिवार से मारपीट, न पुलिस ने एफआईआर दर्ज़ की, न डॉक्टर ने दिया उचित उपचार: दलित शोषण मुक्ति मंच

शिमला-हिमाचल प्रदेश दलित शोषण मुक्ति मंच शिमला के ढली थाना के अन्तर्गत आने वाले परिवार के साथ पड़ोस में रहने वाले दबंगों द्वारा जातिगत उत्पीड़न और मारपीट के मामले की कडी निन्दा शिमला है।

मंच ने आरोप लगाया है कि जब पीडित परिवार एफआईआर दर्ज करवाने के लिए ढली थाने में पहुंचा तो थाना प्रभारी ने भी एफआईआर दर्ज करने में आनाकानी की,जिस वजह से पीडित परिवार को ऑनलाइन एफआईआर दर्ज करवानी पड़ी। मंच ने कहा कि ढली थाना ने 18 घंटे तक एफआईआर तक दर्ज नहीं की गयी और पुलिस आरोपियों को पुलिस वैन में घुमाती रही।

उसके बाद पीडित परिवार जब उपचार के लिए आई.जी.एम.सी. पहुंचा तो उन्हें उचित उपचार नहीं मिला, पीडित लड़की कई घंटों तक स्ट्रेचर पर पड़ी खून से लतपथ दर्द से कहलाती रही। दलित शोषण मुक्ति मंच पुलिस और डॉक्टर के इस तरह की गैर जिम्मेदाराना रवैये के लिए कडी आलोचना की है और सरकार से मांग की है कि दोषी पुलिस कर्मियों और डॉक्टर के खिलाफ उचित कार्यवाही की जाऐ।



दलित शोषण मुक्ति मंच के शहरी संयोजक विवेक कश्यप व सह संयोजक राकेश कुमार ने कहा कि जब से प्रदेश में बीजेपी की सरकार सत्ता में आई है तब से दलितों पर अत्याचार बड़े है वो चाहे सिरमौर में केदार सिंह जिदान की हत्या हो,नेरवा में रजत की हत्या हो,कुल्लू घाटी के थाटीबीड़ की घटना हो या सोलन के लुहारघाट में एक दलित शिक्षक के साथ मारपीट का मामला हो,सरकार इन सब मामलों में न्याय दिलाने में विफल रही।

उन्होंने कहा कि इससे सरकार का दलित विरोधी रवैया सामने आया है। ढली मारपीट व छेडछाड मामले में ऐट्रोसिटी एक्ट लगने के बाद भी पुलिस अब तक कोई गिरफ्तारी नहीं कर पाई है।

‌दलित शोषण मुक्ति मंच ( हि।प्र) सरकार से मांंग की है कि अपने काम में कोताही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों और डॉक्टर के खिलाफ उचित कार्यवाही की जाऐऔर मारपीट और छेड़छाड़ के आरोपियों को तुरन्त गिरफ्तार किया जाऐ। मंच ने चेतवानी दी है कि अगर सरकार दोषियों को तुरंत गिरफ्तार नहीं करती है तो दलित शोषण मुक्ति मंच शहर की जनता को लामबंद कर के एक उग्र आंदोलन करेगी।

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समय रहते पुलिस ने की होती मदद तो नहीं होता दुराचार, दोषियों के साथ जिम्मेवार पुलिस अधिकारियों पर भी दर्ज़ हो एफआईआर: गुड़िया न्याय मंच

शिमला-गुड़िया न्याय मंच ने शिमला शहर के बीचोंबीच बलात्कार के मामले में पुलिस की बेहद संवेदनहीन कार्यप्रणाली की कड़ी आलोचना की है व दोषियों के साथ जिम्मेवार पुलिस अधिकारियों पर एफआईआर दर्ज करने की मांग की है। मंच ने चेताया है कि अगर बलात्कार के दोषियों व जिम्मेवार पुलिस अधिकारियों को बचाने की कोशिश की गई तो मंच जनता को लामबंद करके आंदोलन करेगा।

मंच के सह संयोजक विजेंद्र मेहरा ने पुलिस की नाक के नीचे एक और लड़की के बलात्कार पर कड़ा रोष ज़ाहिर किया है। उन्होंने कहा है कि इस बेहद संवेदनशील मामले में बलात्कार के दोषियों के साथ ही जिम्मेवार पुलिस अधिकारियों पर तुरन्त एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। अगर पुलिस प्रशासन ने थोड़ी भी संवेदनशीलता दिखाई होती तो मानवता को शर्मशार करने वाला यह घिनौना कार्य नहीं होता।

मंच ने यह सवाल उठाया है कि जब यह लड़की पुलिस के पास मदद मांगने गई तो फिर उसे मदद क्यों नहीं मिली। मंच के सह संयोजक ने कहा कि अगर पुलिस ने इस लड़की की समय रहते मदद की होती तो इस लड़की से दुराचार नहीं होता और न ही दरिंदे अपने मंसूबों में कामयाब हो पाते। उन्होंने इस बलात्कार के लिए पूरी तरह पुलिस जिम्मेवार ठहराया है।

उन्होंने कहा कि इस घटनाक्रम से गुड़िया प्रकरण की तरह एक बार फिर से स्पष्ट हो गया है कि हिमाचल प्रदेश के थाने किसी भी तरह से आम जनता के लिए सुरक्षित नहीं हैं और न ही इन थानों में जाने पर जनता को सुरक्षा,न्याय व मदद मिलती है। यह घटनाक्रम एक बार पुनः गुड़िया प्रकरण की तरह पुलिस की बेहद संवेदनहीन कार्यप्रणाली की पोल खोलता है व उस पर काला धब्बा है।

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देवभूमि हिमाचल व शिमला जैसे शांत व सुरक्षित शहर में ऐसी दुष्कर्म की घटना होना कानून व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिन्ह: चौहान

शिमला– शिमला शहर मैं रविवार को एक 19 वर्षीया युवती के अपहरण व् चलती कर में दुष्कर्म की घटना को लेकर माहौल गरमा गया है।

जनता का गुस्सा भांप मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मंगलवार को एडीएम शिमला प्रभा राजीव को मजिस्ट्रियल जांच सौंप दी है और 24 घंटे में रिपोर्ट तलब की है। साथ ही दुष्कर्म की छानबीन के लिए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक शिमला प्रवीर ठाकुर के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया गया है। एसआईटी में सात सदस्य भी होंगे। ये एएसपी शिमला अभिषेक यादव, डीएसपी योगेश जोशी, इंस्पेक्टर राजकुमार, सब इंस्पेक्टर डिंपल, एसएचओ महिला थाना न्यू शिमला दयावती, एएसआई पुलिस चौकी संजौली रंजना और एएसआई राजीव कुमार होंगे।

विपक्षी पार्टी कांग्रेस और कम्युनिस्ट पार्टी(मार्क्सवादी) ने इस घटना की कड़ी निंदा करते हुए शहर में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाये हैं।

कम्युनिस्ट पार्टी ने शिमला में युवती से हुए दुष्कर्म की शर्मसार करने वाली घटना को लेकर गम्भीर चिंता व्यक्त करती है। पार्टी ने कहा कि देवभूमि हिमाचल व शिमला जैसे शांत व सुरक्षित शहर में इस प्रकार की घटना का घटित होना कानून व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिन्ह लगाती है।

राज्य सचिवमण्डल के सदस्य संजय चौहान ने कहा कि पिछले कुछ समय से प्रदेश में इस प्रकार के अपराधियों घटनाओं की संख्या बढ़ रही है। हत्या व महिलाओं के प्रति अपराध जिसमें विशेष रूप से बलात्कार के मामलों में बहुत वृद्धि दर्ज की गई हैं। प्रदेश सरकार इस प्रकार के संगीन अपराधों को रोकने में पूरी तरह से विफल रही है।

चौहान ने ये भी कहा कि वर्ष 2017 में ‘गुडिया’ की निर्मम हत्या की घटना ने प्रदेश में कानून व्यवस्था की बिगड़ती स्तिथि को स्पष्ट रूप से दर्शाया था और तत्कालीन सरकार को इसका परिणाम भी भुगतना पड़ा था। परन्तु ये अत्यंत खेदजनक है कि अन्वेषण एजेंसियां आजतक इसका संतोषजनक परिणाम नहीं निकाल पाई है। जिससे आज प्रदेश में कानून व्यवस्था पर आम जनता असमंजस की स्थिति में है। जिस प्रकार से इस अत्यंत संवेदनशील घटना की पुलिस या सीबीआई ने जांच की और लगभग तीन वर्ष बीतने के बावजूद कोई ठोस परिणाम नहीं निकल पाने से प्रदेश में कानून व्यवस्था पर बड़ा प्रशन चिन्ह खड़ा होता है।

चौहान ने आरोप लगाया कि इसी लचर कानून व्यवस्था के कारण आये दिन अपराधी महिलाओं की हत्या, बलात्कार व मारपीट कर खुले घूमते हैं परंतु न जाने किन कारणों से पुलिस इन गंभीर मामलों में भी कार्यवाही नहीं करती है। कई मामलों में तो FIR दर्ज भी नहीं की जाती हैं जिससे अपराधियों के हौंसले बुलंद होते है और आम जनता को डर के साए में रहने के लिए मजबूर होना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार के गठन के समय भी कानून व्यवस्था एक बड़ी समस्या थी और इसी मुद्दे को लेकर जनता ने सरकार को प्रदेश में सत्तासीन किया था और सरकार ने कानून व्यवस्था दरुस्त करने का वायदा किया था। परन्तु एक वर्ष से अधिक समय बीतने के बावजूद कानून व्यवस्था दरुस्त करना तो दूर की बात बन गई है बल्कि यह बद से बदतर होती जा रही है और सरकार इस ओर कोई ध्यान नहीं दे रही हैं। जिससे कानून व्यवस्था पर सरकार की विफलता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

सी.पी.एम. ने मांग की है कि मांग करती हैं कि दुष्कर्म के लिए दोषियों को तुरंत पकड़ कर कड़ी कानूनी प्रक्रिया अमल में लाई जाए तथा लापरवाही करने वाले दोषी पुलिस अधिकारियों के विरूद्ध भी तुरन्त कार्यवाही की जाए। पार्टी ने यह भी मांग कि है कि पीड़ित छात्रा को कम से कम सरकार 10 लाख की राशी दे। कानून व्यवस्था को दरुस्त करने के लिए मुख्यमंत्री तुरंत ठोस कदम उठाये। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार तुरन्त दोषियों को पकड़ कर कानूनी कार्यवाही नहीं करती व कानून व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त नहीं करती तो सी।पी।एम। जनता को लामबन्द कर आंदोलन करेगी।

वंही दूसरी और कांग्रेस ने प्रदेश की बिगड़ती कानून व्यवस्था पर चिंता ब्यक्त करते हुए कहा है कि राजधानी में महिलाओं की सुरक्षा की पूरी पोल खुल गई हैं।पुलिस प्रशासन गहरी नींद में है।दिन दहाड़े चोरियां ओर डकैती तो आम बात हो गई है।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने कहा है कि इस से बड़ी पुलिस की लाचारी ओर क्या हो सकती है कि पीड़ित महिला ने पुलिस से सुरक्षा मांगी जो उसे नही दी गई।

राठौर ने इसे सरकार की कमजोरी बताते हुए कहा की भाजपा सरकार महिलाओं की सुरक्षा की बड़ी बड़ी बातें तो करती है पर सुरक्षा में जुटी पुलिस ने पूरी व्यवस्था की पोल खोल दी है।

राठौर ने दोषी पुलिस अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही करने की मांग करते हुए आरोपियों को तुरंत सलाखों के पीछे करने को कहा है।

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