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युग हत्याकांड में चौकानें वाले खुलासे, नगर निगम और शिमला पुलिस की भी खुली पोल

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शिमला- शिमला के चर्चित युग अपहरण व हत्याकांड का सीआईडी ने करीब दो साल की जांच के बाद खुलासा करने का दावा किया है। दरिंदगी की जो कहानी सामने आई है वह दिल दहला देने वाली है। शुरूआती कहानी में शिमला पुलिस की स्मार्टनेस की पोल भी खुल गई है।

जून 2014 मे आरोपियों ने चार साल के मासूम का अपहरण किया और फिर उसके कारोबारी पिता भारी भरकम फिरौती की मांग की। शातिर और कोई नहीं बल्कि पिता के करीबी और जान पहचान वाले थे। अपहरण के बाद मासूम को एक घर में सात दिन तक बंद करके छिपाया गया।

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फोटो: अमर उजाला

इस दौरान फिरौती के लिए कई बार पत्र लिखे गए। लेकिन जब जब नहीं बनी तो मासूम की हत्या कर उसे शिमला में ही पानी के एक बड़े टैंक में फेंक दिया। अंदेशा यह भी जताया जा रहा है कि मासूम को जिंदा ही टैंक में फेंका गया। इसके बाद भी आरोपी मासूम के पिता से फिरौती की मांग करते रहे।

जानिए कैसे रची गई थी पूरी साजिश

अपहरणकर्ता के साथ ही जांच करती रही शिमला पुलिस

मासूम युग हत्याकांड मामले में शिमला पुलिस कई महीनों तक अपहरणकर्ता को साथ लेकर युग का पता खोजती रही। युग गुप्ता की हत्या के आरोप में गिरफ्तार चंद्र शर्मा गुप्ता परिवार का पड़ोसी है। वह कानून की पढ़ाई कर रहा था। वह इस केस में कुछ ज्यादा ही दिलचस्पी ले रहा था इसलिए बहुत जल्द युग के परिजनों का विश्वासपात्र बन गया।

पड़ोसी होने के नाते गुप्ता परिवार की हर गतिविधि में भी चंद्र शामिल रहता। पुलिस और परिजन युग को अगवा करने वालों के खिलाफ क्या रणनीति बना रहे हैं, इसकी पूरी जानकारी मुख्य आरोपी को थी। चंद्र ने युग के रिश्तेदारों के घरों में पुलिस की दबिश दिलाकर जांच को भटकाने की भी बहुत कोशिश की।

गुप्ता परिवार के रिश्तेदारों के बीच दरार डालने में उसने कोई कसर नहीं छोड़ी। लेकिन जब चंद्र शर्मा ने युग के पिता विनोद कुमार की चल-अचल संपत्ति की जानकारी जुटाने में अधिक दिलचस्पी दिखाई तो परिजनों को उस पर शक हुआ।

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परिजनों के कहने पर ही विनोद गुप्ता ने चंद्र शर्मा पर संदेह हो गया। लेकिन चंद्र शर्मा की असलियत पता लगने में काफी वक्त लग गया। समय पर अगर चंद्र शर्मा का बेरहम चेहरा बेनकाब हो जाता तो शायद आज युग अपने परिवार के साथ होता।

उधर, युग की हत्या का दूसरा आरोपी तजिंद्र पाल सिंह कारोबारी है। इसकी भी रामबाजार में दुकान है। तीसरा आरोपी विक्त्रसंत बख्शी छोटा शिमला का रहने वाला है। विक्त्रसंत इन दिनों चंडीगढ़ में पढ़ाई कर रहा था। विक्त्रसंत को पुलिस ने रविवार रात चंडीगढ़ से गिरफ्तार किया जबकि चंद्र और तजिंद्र को सोमवार दोपहर बाद रामबाजार से गिरफ्तार किया गया।

शुरू से पढ़िए, कैसे हुआ अपहरण

युग का अपहरण 14 जून 2014 शाम समय करीब साढ़े सात बजे अपने रिहायशी सेट द्वारका गढ़ बिल्डिंग की चौथी मंजिल के गेट पर अंतिम बार खड़ा हुआ देखा गया था। युग अक्सर इस भवन के टॉप फ्लोर में अपने हम उम्र दोस्त के पास भी खेलने जाता रहता था।

इसी मंजिल में चंद्र शर्मा रहता था। युग के दोस्त के घर के दरवाजे के साथ आरोपी चंद्र शर्मा के घर का दरवाजा है। युग की दो बहने टीशा व भूमि भी आरोपी चंद्र शर्मा के घर इसकी मां अंजना शर्मा से रोजाना टयूशन पढ़ने जाती थीं। घटना के दिन चंद्र शर्मा घटनास्थल के आसपास मौजूद था।

सीआईडी ने चन्द्र व अन्य आरोपियों की मोबाइल जांच में पाया कि रात के समय करीब नौ से साढ़े नौ बजे चन्द्र की लोकशन उसके दोस्त तेजेंद्र पाल सिंह और विक्त्रसंत बख्शी के साथ घटनास्थल से बाहर संजौली की तरफ नवबहार की ओर पाई गई।

किडनेपिंग के बाद आया वापस, बना हमदर्द

नवबहार में एकांत स्थान फोरेस्ट रोड पर राम चंद्रा चौक के नजदीक एचआई जी फ्लैट नंबर 22 को आरोपी चंद्र शर्मा ने गुप्त रूप से किराये पर लिया हुआ था। सीआईडी को घटना वाले दिन इन तीनों के फोन की लोकेशन नवबिहार के उस गुप्त घर में की मिली।

करीब रात 11 से 11.50 बजे चंद्र शर्मा व तेजिंद्र पाल सिंह वापस घटनास्थल पर आ गए थे। वह यह जानने आए थे बच्चे के गायब होने के बाद घर का क्या माहौल है। इसके बाद से ही वह गुप्ता परिवार के साथ हो गया।

उसने घर वालों को यह भरोसा दिला दिया कि वह युग को खोजने में अपनी जान लगा देगा। वह हर वक्त युग के पिता के साथ रहने लगा। युग के बारे में जानकारी देने में वह पुलिस का सहयोग करता। बहुत जल्द पुलिस भी मानने लगी कि यह गुप्ता परिवार का असली हमदर्द है।

कैसे हुआ आरोपी चन्द्र पर शक

चंद्र शर्मा हर समय युग के पिता विनोद गुप्ता उर्फ बब्लू के साथ साथ रह रहा था। विनोद गुप्ता के पारिवारिक सदस्यों, स्थानीय लोगों तथा पुलिस को अपना परिचय इंटरनेशनल ह्यूमन राइटस कमिशन मेंबर के रूप में देकर युग की तलाश की प्रत्येक गतिविधि में भाग ले रहा था।

विनोद गुप्ता के पारिवारिक सदस्यों से पारिवारिक व्यवसाय और बंटवारे आदि के बारे में भी पूछताछ करता रहा। इस अवधि के दौरान चंद्र शर्मा विनोद गुप्ता के पारिवारिक सदस्यों और स्थानीय लोगों को साथ यह भी बता रहा था कि यह जल्दी ही विदेश जा रहा है। वहां पर इसे बहुत उच्च वेतनमान मिलना तय है।

इसी दौरान चंद्र शर्मा ने विनोद गुप्ता के परिवार के व्यवसाय और बंटवारे से संबंधित जानकारियां और पूछताछ करनी शुरू की दी। इससे पर विनोद गुप्ता के चाचा किशोर गुप्ता ने उसे डांटा और कहा इससे उसे क्या मतलब है? इसके बाद चंद्र शर्मा ने विनोद गुप्ता से न सिर्फ मिलना जुलना बंद किया बल्कि बातचीत बंद कर दी।

चार बार मांगी थी फिरौती, जानिए क्या था वो तरीका

शिमला के रामबाजार से मासूम युग को 14 जून 2014 को अगवा किया गया। हत्यारों ने युग को छुड़वाने के लिए परिजनों से चार बार फिरौती मांगी। घर वाले फिरौती देने को तैयार थे। बड़ी अजीब स्थिति थी। पुलिस भी उनके सम्पर्क में थी और अपहरणकर्ता भी।

घर में क्या-क्या चल रहा है इसकी पल पल की खबर अपहरणकर्ताओं को तत्काल मिल रही थी। असल मुश्किल युग को संभालने और उसे छुपाने की थी। यह काम मुश्किल हो गया तो उसे इन दरिन्दों ने 22 जून को ही मार डाला। लेकिन वे फिरौती मांगने की फिराक में लगे रहे।

पहली फिरौती

अपहरण के 14 दिन बाद पहली बार फिरौती का पत्र युग के जन्मदिन 27 जून 2014 को भेजा गया। सादे कागज पर हाथ से लिखकर पत्र को युग के पिता विनोद की दुकान के शटर के नीचे से डाला गया। इस पत्र में 3.60 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी गई।

निशानी के तौर पर युग का लॉकेट भेजा गया। इस पत्र में घर में काम करने वाले नौकर हरी का नाम लिखकर उसके पास ही 3.60 करोड़ रुपये अंबाला भेजने को कहा। बच्चे की याद में बिलख रहे परिजनों ने पत्र मिलते ही नौकर को 27 जून की शाम अंबाला रवाना कर दिया लेकिन अंबाला में कोई नहीं मिला।

बात नहीं बनी तो फिर दूसरी और तीसरी फिरौती

हत्यारों ने दूसरी बार भेजे फिरौती के पत्र में चार करोड़ रुपये की मांग की। मांग स्वीकार होने की स्थिति में परिजनों से घर के बाहर सफेद रंग का कपड़ा लटकाने को कहा। इस पत्र में फिरौती कहां लानी है, इसकी जानकारी नहीं दी गई।

तीसरी फिरौती

तीसरी बार फिरौती का पत्र रक्षाबंधन से पहले भेजा गया। इस पत्र में फिरौती की राशि को चार करोड़ से बढ़ाकर दस करोड़ कर दिया। लेकिन पैसा कहां लेकर आना है, यह नहीं बताया। मांग मंजूर होने पर फिर घर के बाहर किसी अन्य रंग का कपड़ा लटकाने को कहा। लेकिन कोई फिरौती लेने नहीं आया।

चौथी फिरौती

चौथी बार फिर फिरौती का पत्र भेजा गया। इस बार धनराशि को दस करोड़ से घटाकर चार करोड़ कर दिया। दूसरी, तीसरी और चौथी बार भेजे गए फिरौती के पत्र चौड़ा मैदान पोस्ट ऑफिस की मुहर लगे थे। चार बार फिरौती का पत्र भेजने के बावजूद अपहरणकर्ताओं ने परिजनों से कोई संपर्क नहीं किया। चौथी बार फिरौती का पत्र आने के बाद मामला सीआईडी के पास चला गया।

किराये के घर में छिपाया था युग को, सीआईडी के हाथ लगे सबूत

दो साल पहले युग अपहरण कांड की जांच के दौरान आरोपियों की हर दलील वैज्ञानिक और आधुनिक तकनीक आधारित जांच के आगे धरी रह गई। आरोपी अपने गुनाह से लाख इनकार करते रहे लेकिन उनकी हैंड राइटिंग, मोबाइल कॉल डिटेल, लैपटॉप व अन्य उपकरणों ने उनकी करतूत से पर्दा हटा दिया।

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फोटो: अमर उजाला

सूत्र बताते हैं कि जांच में जुटे क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट (सीआईडी) को कई ऐसे वैज्ञानिक आधार वाले सबूत हाथ लगे हैं जिनकी वजह से आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। इन्हीं साक्ष्यों की वजह से अब आरोपियों का कोर्ट में भी बच पाना मुश्किल है।

दरअसल, आरोपी तेजेंद्र और चंद्र की गिरफ्तारी के बाद से ही सीआईडी इनके लाई डिटेक्टर टेस्ट की कोशिश कर रहा था। लेकिन दोनों ही बहाने बनाकर टेस्ट से बच रहे थे। इस बीच सीआईडी ने लाई डिटेक्टर टेस्ट कराने का दबाव तो बनाए रखा लेकिन तय रणनीति के तहत आरोपियों के हैंड राइटिंग सैंपल लेकर जांच के लिए एफएसएल लैब भेज दिए।

मोबाइल रिकॉर्ड भी बने सबूत, यकीन में बदल गया शक

आरोपियों के मोबाइल के ढाई साल की कॉल डिटेल रिकॉर्ड को भी छाना गया। इस बीच आरोपियों से मिले लैपटॉप के डाटा को भी रिकवरी के लिए भेजा गया। एक-एक कर सभी जगह से ऐसी रिपोर्ट आने लगीं, जिससे आरोपियों पर शक यकीन में बदलता चला गया।

रिमांड के दौरान पूछताछ के बीच आखिरकार आरोपी टूट गए और उन्होंने युग के अपहरण और हत्या की बात कबूल ली। आरोपियों के कबूलनामे से वैज्ञानिक आधार पर जुटाए सबूतों को अब सीआईडी मिलाने की कवायद कर रहा है।

पानी के टैंक से मिला कंकाल, निगम ऐसे करता है सफाई

टैंकों की सफाई के लिए नगर निगम की ओर से निर्धारित शेड्यूल के तहत हर छह महीने में टैंक साफ करना अनिवार्य है। शहर में नगर निगम के कुल 42 टैंक हैं, नगर निगम के कनिष्ठ अभियंता की मौजूदगी में टैंक की सफाई की जाती है।

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फोटो: अमर उजाला

सफाई के लिए सबसे पहले एग्जिट प्वाइंट से टैंक खाली करवा दिया जाता है। खाली होने के बाद टैंक में झाड़ूू लगाया जाता है। पानी से सफाई के बाद सिल्ट और कूड़ा कचरा आउट लेट से बाहर निकाल दिया जाता है। इसके बाद ब्लीचिंग पाउडर से टैंक की सफाई होती है।

टैंक से यहां होती है सप्लाई

पुलिस लाइन भराड़ी, भराड़ी बाजार, तारा बाड़ी, लोअर भराड़ी, मिडल कुफ्टाधार, मिनी कुफ्टाधार, कुफ्टाधार आदि क्षेत्र।

युग गुप्ता के हत्यारों को फांसी होनी चाहिए: वीरभद्र

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि युग गुप्ता के हत्यारों को फांसी होनी चाहिए। यह मामला मासूम बच्चे के अपहरण और हत्या दोनों का है। इसमें फांसी की सजा हो सकती है। मुख्यमंत्री ने यह बात भावुक होकर मंगलवार को युग गुप्ता के पिता विनोद गुप्ता को विधानसभा स्थित अपने कार्यालय में कही।

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फोटो: अमर उजाला

ढांढस बंधाते हुए मुख्यमंत्री भारी मन से बोले – इस दुख की घड़ी में मैं आपके साथ हूं। मुख्यमंत्री ने इस दौरान डीजीपी सहित सीआईडी प्रमुख को मामले की गहनता से जांच के आदेश भी दिए।

हाईकोर्ट पहुंचा पानी के टैंक में युग का कंकाल मिलने का मामला

प्रदेश हाईकोर्ट ने युग गुप्ता का कंकाल नगर निगम के टैंक में पाए जाने की खबरों पर संज्ञान लेते हुए पीलिया मामले के सभी प्रतिवादियों से जवाब तलब किया है। कोर्ट ने युग मामले की जांच कर रहे सीआईडी के जांच अधिकारी को भी विस्तृत हलफनामा दायर करने आदेश दिए।

शिमला शहरवासियों को सीवरेज युक्त पानी पिलाने के मामले में सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर व न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान की खंडपीठ ने यह आदेश दिए। हाईकोर्ट ने पीलिया मामले को युग अपहरण की जांच से जुड़े एक अन्य मामले के साथ लगाये जाने के आदेश भी दिए।

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फोटो: अमर उजाला

कोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि नगर निगम बार-बार हलफनामे दायर कर शिमलावासियों को साफ पानी पिलाने की बातें करता रहा। शपथ पत्रों के माध्यम से कोर्ट को बताया गया कि वह नगर निगम अपने टैंकों को साफ करता आ रहा है।

जबकि युग के कंकाल का निगम के टैंक में दो सालों से पाया जाना यह दर्शाता है कि निगम कोर्ट की आंखों में हर बार धूल झोंकता रहा। कोर्ट ने कहा कि इससे जाहिर होता है कि निगम ने अब तक जो भी शपथपत्र दायर किये वो सब झूठे थे। मामले पर अगली सुनवाई 27 सितंबर को निर्धारित की गई है।

मासूम युग को इंसाफ दिलाने सड़कों पर उतरे कारोबारी

राजधानी शिमला के मासूम युग को इंसाफ दिलाने मंगलवार को शहर के सैकड़ों कारोबारी सड़कों पर उतरे। शिमला कार्ट रोड से लेकर लोअर बाजार तक कारोबारियों ने रैली निकाल कर रोष प्रदर्शन किया।

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युग के पिता विनोद गुप्ता और परिजनों की अगुवाई में कारोबारियों ने राज्य विधानसभा में जाकर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह और हाईकोर्ट में जाकर मुख्य न्यायाधीश से मुलाकात की। कारोबारियों ने मासूम युग के हत्यारों को फांसी देने और उनके परिजनों का सामाजिक बहिष्कार करने की मांग की।

कारोबारियों ने उपायुक्त आफिस शिमला के बाहर भी प्रदर्शन किया। युग गुप्ता की हत्या होने की खबर शहर में फैलते ही सोमवार रात से लोग रामबाजार स्थित द्वारका गढ़ में जुटना शुरू हो गए। मासूम युग के परिजनों को लोग ढांढस बंधाते रहे।

फोटो: अमर उजाला

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आढ़तियों के विरुद्ध चल रहे धोखाधड़ी के मुकदमें, फिर भी सरकार ने कारोबार करने की दे दी अनुमति

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शिमला– किसान संघर्ष समिति की बैठक 19 जुलाई को गुम्मा, कोटखाई में आयोजित की गई। इसकी अध्यक्षता सुशील चौहान की ने की तथा इसमे समिति के सचिव संजय चौहान विशेष रूप से उपस्थित रहे। बैठक में किसानों व बागवानों के ज्वलंत मुद्दों पर चर्चा की

बैठक में बागवानों ने अवगत करवाया कि जिन आढ़तियों ने बागवानों का बकाया भुगतान करना है व उनके विरुद्ध शिकायत दर्ज की गई है, इनमें से कुछ आढ़तियों ने दुकाने खोल कर अपना कारोबार आरम्भ कर दिया है। जबकि ए पी एम सी कह रही हैं कि ऐसे आढ़तियों व कारोबारियों को कारोबार नहीं करने दिया जाएगा। इससे ए पी एम सी की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगा है और वह इनको कारोबार की इनको कैसे इजाजत दे रही हैं जबकि इनके विरुद्ध मुकदमे चल रहे हैं और कार्यवाही की जानी हैं।

बागवानों ने कहा कि इसके अलावा ए पी एम सी, अधिनियम, 2005 के प्रावधानों को भी लागू नहीं किया जा रहा है। अधिनियम की धारा 39 की उपधारा 2 के नियम xxi में स्पष्ट प्रावधान है कि जो भी कारोबारी होगा उसको लाइसेंस जारी करने से पहले नकद में सुरक्षा के रूप में बैंक गारंटी लेनी है परंतु ए पी एम सी के द्वारा कोई भी ऐसी व्यवस्था नहीं की है जिससे बागवानों को मण्डियों में धोखाधड़ी का शिकार न होना पड़े। ए पी एम सी निर्देश जारी कर रही हैं कि आढ़ती खरीददार की जांच करवाएगा और पता लगाएं कि वह सही है या नहीं। जोकि ए पी एम सी अपने विधिवत दायित्व को निभाने से भाग रही हैं। क्योंकि किसानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य सुनिश्चित करना ए पी एम सी का वैधानिक दायित्व हैं।

बागवानों ने कहा कि ए पी एम सी अधिनियम, 2005 की धारा 39 की उपधारा 2 के नियम xix में स्पष्ट प्रावधान है कि किसान बागवान का जिस दिन ही उत्पाद बिकेगा उसी दिन उसका भुगतान किया जाए। परन्तु ए पी एम सी का ये बयान कि यदि 15 दिन तक आढ़ती या खरीददार भुगतान नही करता तो उसके बाद उसके विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी। यह ए पी एम सी अधिनियम, 2005 की खुले तौर पर अवहेलना हैं। इससे ए पी एम सी की मंशा पर सवालिया निशान लगाता है।

बागवानों ने बैठक में ये भी अवगत करवाया कि सरकार द्वारा मजदूरी के रूप में 5 रुपये प्रति पेटी की जो दर तय की गई है कई मण्डियों में यह 25 से 30 रुपए तक ली जा रही हैं। बागवानों ने गत वर्ष भी सरकार व ए पी एम सी से इस बारे शिकायत की थी। परन्तु इस पर भी अभी तक कोई रोक नहीं लगाई गई है।

बैठक में कुछ बागवानों ने अवगत करवाया कि SIT के माध्यम से कुछ बागवानो का आढ़तियों के द्वारा भुगतान भी किया गया है और कुछ बागवानों की बकाया राशी 20 जुलाई, 2019 तक दी जायेगी।

बैठक में कोटखाई के 4 ऐसे बागवान भी थे जिन्होंने भी आढ़तियों से और पैसे लेने है। यह कुल रकम 6,91,605 रुपये बनती हैं।

बैठक में निर्णय लिया गया कि इनकी ओर से भी दोषी आढ़तियों के विरुद्ध मुकदमा दायर किया जाएगा।

बैठक में निर्णय लिया गया कि सरकार किसान संघर्ष समिति द्वारा 24 जून, 2019 को दिये गए मांगपत्र पर शीघ्र कार्यवाही करें। तथा ए पी एम सी की लचर कार्यप्रणाली को सुचारू करने के लिए सख्त आदेश करें ताकि किसानों व बागवानों को उनके उत्पाद का उचित मूल्य मिल सके और उनको मण्डियों में धोखाधड़ी व शोषण से बचाया जा सके। यदि सरकार इन माँगो पर तुरन्त ठोस कदम नहीं उठती है तो किसान संघर्ष समिति अन्य किसान संगठनों के साथ मिलकर आंदोलन करेगी

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10 कार्यकर्ताओं के निष्कासन पर ऐबीवीपी का धरना प्रदर्शन,विश्वविद्यालय पर एक तरफा कार्यवाही का लगाया आरोप

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शिमला– आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद इकाई ने विश्वविद्यालय में पिंक पेटल्स चौक पर धरना प्रदर्शन किया । इकाई सचिव अंकित चंदेल ने जानकारी देते हुए बताया की पिछले कल विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से एक तनशाही फैसला निकाला गया जिसमें 10 ऐबीवीपी कार्यकर्ताओं को विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया गया।

गौरतलव है की पिछले 11 जुलाई को विद्यार्थी परिषद ने कैम्पस मे धरना प्रदर्शन किया था जिसके चलते 10 छात्रों का निष्काशन कर दिया है।

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धरने को संबोधित करते हुए इकाई सचिव अंकित चन्देल ने बताया की एक तरफ जब कर्मचारियों द्वारा कुलपति कार्यालय में नारेबाजी की जाती है तो उन कर्मचारियों क खिलाफ कुलपति साहब की कोई प्रतिक्रिया नही आती, परन्तु जब ऐबीवीपी कैम्प्स में धरना प्रदर्शन करते है तो उन्हें तुरन्त प्रभाव से निष्कासित कर दिया जाता है जोकि सरासर एकतरफा कार्यवाही है।

चन्देल ने कहा कि विश्वविद्यालय अपनी कमियों को छुपाने क लिए तरह-2 के हथकण्डे अपना रहा है। जहाँ अधूरे परिणामों की वजह से प्रदेश भर के छात्र परेशानी में हैं वहीँ प्रशासन अपने मुंह मिया मिठु बनने में कोई कसर नही छोड़ता।

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चन्देल ने कहा कि सभी को ज्ञात है विवि में नौ महीने में पीएचडी (P.hD) और एमसीऐ (MCA) में फर्जी तरीके से प्रवेश के मामले सामने आते है, और इन सभी गडवड़ियों के विरोध करने वाले छात्र संगठनों की आवाज को दबाने का प्रयास विश्वविद्यालय प्रशासन् कर रहा है।

धरने क माध्यम से प्रशासन को चेताते हुये परिषद ने मांग उठाई विश्वविद्यालय अपना काम करे न कि छात्र संगठनों के कार्य मे दखल दे। ऐबीवीपी ने चेतावनी दी है कि जल्द से जल्द परिषद कार्यकर्ताओं का निष्कासन् वापिस नही करता है तो प्रदेश स्तरीय आंदोलन करने में कोई गूरेज़ नही होगाI ऐबीवीपी ने साथ ही यूजी UG के सभी परीक्षा परणामों को पूरा करने की मांग भी प्रशासन के सामने रखी है।

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सेब के सर्मथन मुल्य में मात्र 50 पैसे बढ़ौतरी बागवानों से भद्दा मजाकः राठौर

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शिमला -हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा सेब के सर्मथन मुल्य में की गई मात्र 50 पैसे की बढ़ौतरी को बागवानों के साथ किया गया भद्दा मजाक करार दिया है।

आज शिमला से जारी प्रेस वयान में कुलदीप सिंह राठौर ने बताया कि वर्तमान समय में जब बागवानों को अपनी फसल तैयार करने के लिए भारी मंहगाई का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि जी.एस.टी के चलते सेब से संबंधित पैकिंग से लेकर फफूंद नाशक दवाईयां एवं अपनी फसलों को मंण्ड़ियों तक पहुॅचाने के लिए किराया भी कई गुणा बढ़ गया है इसके चलते सेब के सर्मथन मुल्य कम से कम 10 रूपये होना चाहिए।

कुलदीप राठौर ने कहा कि सेब इलाकों में बहुत जगह सड़कों की हालत खराब पड़ी है और सेब को मण्ड़ियों तक पहुॅचाने वाले ट्रक व गाड़ियों के मालिक खराव सडकों पर गाडियाॅं भेजने को मना कर रहे हैं इसलिए सरकार को चाहिए कि ख़राब सडकों को जल्दी से जल्दी ठीक करवायें।

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