हिमाचल विश्वविद्यालय कुलपति को मिला छात्र संगठनों की गतिविधियों पर रोक लगाने का मौका

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शिमला- हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में छात्र संगठनों की विभिन्न गतिविधियों पर भविष्य में रोक लग सकती है। बीते सोमवार को आर्ट्स ब्लॉक के बाहर छात्र संगठनों के कार्यकर्ताओं के बीच हुई झड़प के बाद हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय प्रशासन छात्र संगठनों की गतिविधियों पर रोक लगाने की तैयारी में है। हालांकि अभी कोई फैसला नहीं लिया है लेकिन इसके लिए कानूनी सलाह ली जा रही है। कानूनी सलाह लेने के बाद आगामी कदम उठाया जाएगा।

छात्र संगठन एसएफआई और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं के बीच झड़प के बाद एक बार फिर विश्वविद्यालय परिसर में शांति भंग हुई है और माहौल तनावपूर्ण बना है। छात्र गुटों के बीच झड़पों के कारण ही वर्ष 2014 मेें विश्वविद्यालय सहित कालेजों में एससीए चुनावों पर रोक लगी थी और यह रोक वर्ष 2015 में भी बरकरार रही। हालांकि एससीए चुनावों की बहाली और अन्य मांगों को लेकर विश्वविद्यालय और कालेजों में छात्र संगठनों के प्रदर्शन जारी है लेकिन एससीए चुनावों पर रोक के बाद विश्वविद्यालय और कालेजों परिसर में माहौल में सुधार जरूर आया है लेकिन बीते सोमवार को विश्वविद्यालय परिसर में एक बार फिर हिंसा भड़कने से आने वाले दिनों में एससीए चुनाव बहाल करने की छात्र संगठनों की मांग और इस मांग को लेकर चल रहे आंदोलन को धक्का लगा है।

कई छात्रों पर निष्कासन की तलवार

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय में हुई हिंसा के बाद इसमें संलिप्त छात्रों पर निष्कासन की तलवार लटक गई है। मामले की जांच पूरी होने के बाद झड़प के लिए दोषी पाए जाने वाले छात्रों पर कड़ी कार्रवाई अमल में लाए जाने की तैयारी है।

रजिस्ट्रार को कानूनी राय लेकर प्रतिवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.एडीएन वाजपेयी ने रजिस्ट्रार को आदेश दिए हैं कि वे शीघ्र कानूनी राय लेकर हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय परिसर में छात्र संगठनों की गतिविधियों, विशेष रूप से झड़प और हिंसात्मक गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत करें।

कुलपति प्रो.वाजपेयी ने विश्वविद्यालय परिसर में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद और एसएफआई के छात्रों के बीच हुए संघर्ष पर अपनी अप्रसन्नता व्यक्त करते हुए छात्रों से विश्वविद्यालय परिसर में शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने में सहयोग की अपील की है। संपूर्ण प्रकरण की जांच के लिए एक समिति का गठन किया गया है, जिसमें अधिष्ठाता अध्ययन-अध्यक्ष, अधिष्ठाता छात्र कल्याण-सदस्य, मुख्य सुरक्षा अधिकारी-सदस्य व उप-कुलसचिव (प्रशासन) को सदस्य सचिव बनाया गया है। कुलपति ने इस समिति से अपेक्षा की है कि वह अपनी अनुशंसा तीन दिनों के अंदर प्रस्तुत करेगी।

Image:Representational

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