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Photo: Tarun Sharma

शिमला- हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के शिक्षकों व गैर शिक्षकों की बाहर जाकर चाय पीने पर रोक लग गई है। लाइब्रेरी के आसपास पिंक पैटल, समरहिल चौक या अन्य किसी जगह शिक्षक व अन्य कर्मचारी चाय की चुस्कियां लेते देखे गए तो उन पर सख्त कार्रवाई होगी। अपने विभागों को छोड़कर कर्मचारी अब कहीं नहीं जा सकेंगे।

विश्वविद्यालय ने सर्कुलर जारी कर शिक्षकों के लिए लंच टाइमिंग डेढ़ से दो बजे तक निर्धारित कर दी है। ऐसे में शिक्षकों व अन्य कर्मचारियों को सुबह दस से शाम पांच बजे तक अपने कार्यालय में ही बैठना होगा।

विश्वविद्यालय ने अधिसूचना जारी की है, जिसमें लिखा है कि कुछ अध्यापक पुस्तकालय के पास चाय पीते हैं। विभाग को छोड़कर यूं बाहर टहलना बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उधर, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय कल्याण संघ (हपुटवा) ने इन आदेश का विरोध जताया है। इस मामले पर शुक्रवार को बैठक भी की गई। हपुटवा ने विवि प्रशासन के तानाशाही आदेश का कड़ा विरोध जताया है। संघ ने कुलपति से पूछा है कि शिक्षक पठन-पाठन के साथ खोज कार्य भी कर रहे हैं। वह कई बार सुबह आठ से रात दस बजे तक लैब में काम करते हैं। सर्दियों की छुट्टियां भी विवि में गुजारते हैं। कई बार फील्ड में भी पूरा दिन गुजारते हैं। फिर ऐसे तुगलकी आदेश जारी करने की क्या जरूरत है।

हपुटवा के महासचिव देशराज ठाकुर ने कहा कि विवि उच्च शिक्षा का केंद्र है, यहां पर शिक्षा की स्वतंत्रता है। यहां पर नए विचारों का जन्म होता है। नवाचार होते हैं, नई खोजें व आविष्कार होते हैं। ऐसे संस्थान में शिक्षण स्वायत्ता होती है। यह कोई सरकार का विभाग नहीं है जहां दस से पांच बजे काम करने की सीमाएं तय हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि कुलपति अब तानाशाही की ओर अग्रसर हो रहे हैं। आए दिन शिक्षकों से अनुचित व्यवहार कर रहे हैं। कुलपति यह न भूलें कि वह भी शिक्षक ही हैं। उनका आदेश न तो शिक्षकों के लिए ठीक है और न ही कुलपति के लिए। हपुटवा ने चेतावनी दी है कि कुलपति व रजिस्ट्रार अपनी सीमाएं न लांघें और भविष्य में ऐसे आदेश जारी न करें। यदि ऐसा होता है तो दोनों के बीच टकराव हो सकता है।

विवि के महौल को बेहतर बनाने के लिए जो भी फैसला लेना पड़े, वह लिया जाएगा। मैं इस मामले में ज्यादा टिप्पणी नहीं करना चाहता। इस संबंध में जो निर्णय लिया है, वह सही है। (प्रो. एडीएन वाजपेयी, कुलपति, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय)

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