मशोबरा नारी सेवा सदन के अनूठे विवाह समारोह में एक साथ दो बेसहारा बेटियों का कन्यादान

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करीब सात साल पहले लावारिस हालात में मिली नीलम मशोबरा के बालिकाश्रम में पनाह मिली थी। तब वह नाबालिग थी। बालिग़ होने पर उसे उसी परिसर में बने नारी सेवा सदन में रख दिया गया। सुगंधा सूद लगभग 10 माह से नारी सेवा सदन में थी। परिस्थितियों की मार के कारण उसकी पढ़ाई 10वीं के बाद छूट गई थी। अब उसने नारी सदन के सुधरे माहौल में रह कर 12वीं की परीक्षा दी।

शिमला बेसहारा महिलाओं के मानवाधिकार उल्लंघन के कारण लगातार विवादों में रहां मशोबरा का नारी सेवा सदन आज शहनाइयों की धुन से गूँज रहा था। मौका था दो अनाथ बेटियों किन्नौर की नीलम और शिमला की सुगंधा की शादी का।

बारिश के बीच दोनों की बारात आईं और वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हिन्दू रीति से विवाह हुआ। संस्थान के स्टाफ ने उन्हें उपहार देकर अपनी बेटियों की तरह विदा किया।

नारी सेवा सदन में हुए इस अनूठे विवाह समारोह में कन्यादान की रस्म महिला एवं बाल विकास विभाग के ज़िला कार्यक्रम अधिकारी राकेश भारद्वाज ने निभाई। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की प्रधान सचिव अनुराधा ठाकुर ने मुख्यमंत्री कन्यादान योजना के तहत दोनों कन्याओं को 25-25 हज़ार रुपये की अनुदान राशि और 20-20 हज़ार रुपये का पुनर्वास भत्ता स्वीकृत किया है। उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव ने विभाग की इस सराहनीय पहल का स्वागत किया है।

Mashobra Nari sew sadan marriage

करीब सात साल पहले लावारिस हालात में मिली नीलम मशोबरा के बालिकाश्रम में पनाह मिली थी। तब वह नाबालिग थी। बालिग़ होने पर उसे उसी परिसर में बने नारी सेवा सदन में रख दिया गया। उसकी बारात कुल्लू ज़िले के आनी से आई। उसके पति संतोष ठाकुर का वहां बगीचा है। बारात में ससुराल पक्ष की महिलायें, उसके ससुर व देवर आदि आए थे।

शिमला की रहने वाली सुगंधा सूद लगभग 10 माह से नारी सेवा सदन में थी। परिस्थितियों की मार के कारण उसकी पढ़ाई 10वीं के बाद छूट गई थी। अब उसने नारी सदन के सुधरे माहौल में रह कर 12वीं की परीक्षा दी। उसकी बारात हमीरपुर ज़िले के नादौन से आई जिसमें पति चरणजीत की बहन व चाचा चाची शामिल थे। कन्यादान जिला कार्यक्रम अधिकारी राकेश भारद्वाज ने संपन्न कराया।

उमंग फाउंडेशन के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव ने विभाग की इस अनूठी पहल को अत्यंत सराहनीय बताते हुए उसका स्वागत किया। उन्होंने कहा कि बेसहारा महिलाओं के मानवाधिकारों के संरक्षण की दिशा में ये महत्वपूर्ण कदम है।

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