आय से अधिक संपत्ति मामले में अदालत से सीएम को झटका

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नई दिल्ली- अदालत ने भ्रष्टाचार व आय से अधिक संपत्ति के मामले में दर्ज प्राथमिकी व उससे जुडे़ दस्तावेज मांगने के मामले में हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह को झटका दे दिया। अदालत ने उनके आवेदन को खारिज करते हुए स्पष्ट कर दिया कि दस्तावेज आरंभिक जांच से जुड़े हैं और वे दस्तावेज आरोपी को नहीं दिए जा सकते। वहीं हिमाचल प्रदेश से दिल्ली स्थानांतरित मामले की सुनवाई नहीं हो पाई।

पटियाला हाउस स्थित सीबीआई के विशेष न्यायाधीश विनोद कुमार ने अपने फैसले में कहा कि प्राथमिक जांच रिपोर्ट से ही तय किया जाता है कि मामले में जांच के लिए प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए या नहीं। प्राथमिकी जांच का आरंभिक बिंदु होती है व जुड़े दस्तावेज प्राथमिकी का हिस्सा नहीं होते।

अदालत ने ये तर्क भी दिया

ऐसे दस्तावेज आरोपी को प्रदान नहीं किए जा सकते, वह मात्र प्राथमिकी पाने का हकदार है। अदालत ने सीबीआई द्वारा सीलबंद रिपोर्ट व दस्तावेजों का अध्ययन करने के बाद यह फैसला दिया है। सीबीआई ने वीरभद्र सिंह व उनकी पत्नी के खिलाफ आंरभिक जांच जून में आरंभ की थी। उन पर स्टील मंत्रालय में मंत्री होने के दौरान आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का आरोप है।

सीबीआई ने जांच के बाद 23 सितंबर को वीरभद्र सिंह व उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह, एलआईसी एजेंट आनंद चौहान व उनके सहयोगी चुन्नी लाल के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया था। सीबीआई ने 26 सितंबर को उनकी बेटी के विवाह समारोह के दौरान वीरभद्र सिंह के दिल्ली, हिमाचल प्रदेश निवास पर छापेमारी कर तलाशी ली थी।

हाईकोर्ट में सुनवाई टली- वीरभद्र सिंह के खिलाफ हिमाचल में चल रहे मामले को सर्वोच्च न्यायालय ने दिल्ली हाईकोर्ट में स्थानांतरित कर दिया था। इस मामले में बुधवार को न्यायमूर्ति आशुतोष के समक्ष पहली सुनवाई थी, लेकिन वीरभद्र की और से कोई भी पेश नहीं हुआ। अदालत ने इस मामले की सुनवाई 14 दिसंबर तय की है।

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