जानिए इस घंटी की कहानी जिसकी तलाश कर रही सीबीआई

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पांच साल खाक छानने के बाद खाली हाथ रही पुलिस के बाद अब सीबीआई इस ऐतिहासिक घंटी की तलाश करेगी। अंग्रेजी शानसनकाल का गवाह रही यह दुर्लभ बड़ी घंटी कई मायनों में अहम थी। आइए जानते हैं इसकी पूरी कहानी

कहते हैं कि साल 1903 में नेपाल के राजा ने अपने भारत दौरे के दौरान यहां के तत्कालीन वायसराय लार्ड कर्जन को यह बहुमूल्य घंटी तोहफे के तौर पर दी थी। अष्टधातु से बनी यह घंटी करीब 30 किलो वजनी थी। इसमें राइस पुलिंग जैसे कई गुण विद्यमान थे।

लकड़ी के स्टैंड समेत इसका वजन करीब 70 किलो के आसपास था। वर्तमान समय में इसकी कीमत अरबों रुपए आंकी जाती है। वायसराय ने भी इस तोहफे को स्वीकार किया और इसे शिमला के इस सबसे खूबसूरत भवन में रख दिया।

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यह वहीं एडवांस स्टडी भवन है जहां भारत पाक समझौते के अलावा कई ऐतिहासिक बैठकें व फैसले लिए गए थे। यह घंटी भी इसी भवन के ठीक बाहर बालकनी में गेट पर रखी गई थी।

यहां आने वाले सैलानियों को भी संस्‍थान प्रशासन इस घंटी की कहानी बताता था। इसी दौरान शातिरों की भी इस पर नजर पड़ चुकी थी। मगर चोरी करना आसान नहीं था क्योंकि दिन रात पूरे परिसर में सुरक्षा का कड़ा पहरा रहता था।

22 अप्रैल 2010 को शातिरों ने सुरक्षाकर्मियों के नाक तले घंटी चोरी कर दी। स्टैंड समेत चोर इसे करीब 100 मीटर तक घसीटते हुए ले गए और फिर घंटी निकालकर गाड़ी में उड़ा ले गए।

करीब पांच साल की जांच के दौरान पुलिस ने संस्‍थान के सुरक्षाकर्मियों समेत कई लोग गिरफ्तार किए मगर इसका कोई पता नहीं चला। आखिरकार अब जांच सीबीआई के हवाले है। देखना है सीबीआई कब तक इस ऐतिहासिक घंटी का पता लगा पाती है।

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