26 अक्टूबर को वीरभद्र की किस्मत का फैसला, गिरफ़्तारी हुई तो कौन संभालेगा सत्ता की कमान ?

0
209

शिमला। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह की गिरफ्तारी पर रोक लगाने के फैसले के खिलाफ सीबीआई के सुप्रीम कोर्ट पहुंचते ही राज्य में सियासी हलचल तेज हो गई है। इस सियासी आग में घी डालने का काम भाजपा के उन बयानों ने किया है, जिसमें पार्टी प्रदेश में समय से पहले विधानसभा चुनाव की बात कर रही है।

ऐसे में हिमाचल में सहज ही सवाल उठ रहा है कि यदि सुप्रीम कोर्ट ने गिरफ्तारी पर रोक हटाई और वीरभद्र सिंह को पूछताछ के लिए गिरफ्तार किया जाता है तो प्रदेश में कौन सत्ता की कमान संभालेगा? सुप्रीम कोर्ट में 26 अक्टूबर को मामले की सुनवाई है। इसी बीच, हिमाचल कांग्रेस के अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह सुक्खू को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली तलब कर मामले की जानकारी ली है।

यही नहीं, हाल ही में शिमला स्थित कांग्रेस मुख्यालय में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सुखविंद्र सिंह से परिवहन मंत्री जीएस बाली की मुलाकात भी हुई। अंदरखाने वीरभद्र सिंह समर्थक भी इस घटनाक्रम से डरे हुए हैं कि यदि आय से अधिक संपत्ति मामले में मुख्यमंत्री गिरफ्तार होते हैं तो कांग्रेस सरकार का भविष्य क्या होगा?

मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति मामले में सीबीआई ने 26 सितंबर को शिमला सहित सराहन, रामपुर व दिल्ली आवासों में छापेमारी की थी। छापेमारी से दो दिन पहले ही सीबीआई ने मुख्यमंत्री व उनकी पत्नी प्रतिभा सिंह के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। इस कार्रवाई की भनक हिमाचल में मुख्यमंत्री को लग गई थी। यह भी अहसास हो गया था कि सीबीआई छापेमारी भी कर सकती है। यही कारण है कि छापेमारी से पहले हिमाचल सरकार के सभी मंत्रियों ने वीरभद्र सिंह के नेतृत्व पर भरोसा जताने संबंधी हस्ताक्षरित बयान भी जारी किया था।

हिमाचल के इतिहास में यह पहली बार हुआ कि किसी मुख्यमंत्री के निवास पर सीबीआई का छापा पड़ा हो। छापेमारी के बाद कांग्रेस हाईकमान वीरभद्र सिंह के पक्ष में उतर आया। हालांकि कांग्रेस नेताओं गुलाम नबी आजाद तथा दीपेंद्र हुड्डा ने उनके समर्थन में मीडिया में बयान जारी किए, लेकिन अब परिस्थितियां बदल गई हैं। यह सही है कि इस मामले में वीरभद्र सिंह की पैरवी मशहूर वकील व कांग्रेस नेता कपिल सिब्बल कर रहे हैं, परंतु सीबीआई जिस तरह से इस केस में सक्रियता दिखा रही है, उससे वीरभद्र सिंह समर्थक आशंकित हैं।

हिमाचल की राजनीति में पांच दशक से प्रभावशाली वीरभद्र सिंह के लिए इससे पहले इतना मुश्किल समय कभी नहीं आया था। उन्होंने कभी नहीं सोचा होगा कि ऐसी परिस्थितियां आएंगी। मौजूदा परिस्थितियों पर गौर करें तो कांग्रेस में दूसरी पंक्ति के नेताओं को उभरने ही नहीं दिया गया। हालांकि कांग्रेस में कौल सिंह, विद्या स्टोक्स के साथ-साथ जीएस बाली भी मुख्यमंत्री पद के लिए गोटियां फिट करते रहे हैं, लेकिन वीरभद्र सिंह के समक्ष सफल नहीं हुए हैं।

अब देखना यह है कि सीबीआई को 26 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट क्या निर्देश देता है। यदि हिमाचल हाईकोर्ट के गिरफ्तारी के आदेश पर रोक हटती है तो प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन संभावित है। ऐसे में कांग्रेस की गुटबाजी भी फूट कर सामने आ सकती है। इन्हीं परिस्थितियों को देखते हुए भाजपा नेता बयान जारी कर रहे हैं कि प्रदेश में विधानसभा चुनाव समय से पूर्व हो सकते हैं।

हिमाचल वॉचर हिंदी के एंड्रायड ऐप के लिए यहां क्लिक करें

NO COMMENTS