शिमला शहर के ढाबों व दूकानों में बाल-मजदूरी कर रहे 6 बच्चों को चाइल्डलाईन ने संयुक्त अभियान में कराया मुक्त

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शिमला- बाल-मजदूरी आज भी हमारे समाज का एक भयावह सच है! गरीबी होने की सजा भुगत रहे बच्चे अभी भी ढाबों में अक्सर काम करते दिख जाते हैं! इसी बात का प्रमाण है शिमला शहर से बचाये गए छह बच्चे जो अलग-2 ढाबों और दुकानों में शोषण का शिकार हो रहे थे! मंगलवार को शिमला महिला पुलिस थाना, श्रम विभाग तथा चाइल्डलाईन शिमला के संयुक्त अभियान से शहर के विभिन्न ढाबों तथा दूकानों से इन बच्चों को बाल-मजदूरी से छुड़ाया गया।

उक्त टीम में पुलिस पुलिस विभाग से संजना- महिला आरक्षी, कौशल्या तथा थाना प्रभारी रीना तथा चाइल्डलाईन शिमला से कुमारी सानु, नितिका, विरेन्द्र, भगत राम ठाकुर तथा समन्वयक दिनेश कुमार एवं श्रम विभाग से निरीक्षक हेमराज पटयाल तथा सोहन लाल जलोटा शमिल थे।

उपरोक्त छः नाबालिग बच्चों को जिला बाल कल्याण समिति के सदस्य सुभाष वर्मा के समक्ष पेश किया गया। उक्त बच्चों को अस्थाई आश्रय के आदेश जारी कर उन्हें फिलहाल आश्रय प्रदान किया गया है।

वर्मा ने लोगों से अपील की है कि नाबालिग बच्चों को बाल-मजदूरी से दूर रखें तथा पढ़ाई की तरफ प्राथमिकता देकर उनके भविष्य को उज्ज्वल बनायें। साथ ही साथ लोगों से यह आवेदन किया है कि किसी भी बच्चे को बल-मजदूरी करते देखने पर प्रशाशन या पुलिस को सूचना दें ताकि असाक्षरता से इनका भविष्य बर्बाद होने से बचाया जा सके !

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