केन्द्र और राज्य सरकार की किसान विरोधी नीतियों के कारण किसानों की आत्महत्या का दैनिक आंकड़ा 55 से 60 पहुंचा: किसान सभा

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Himachal Kisan Sabha

शिमला- अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमरा राम ने केन्द्र और राज्य सरकार की किसान विरोधी नीतियों को कोसते हुए कहा कि केन्द्र और राज्य सरकार के कारण देश का किसान आज गंभीर कृषि संकट के दौर से गुज़र रहा है। किसान आत्महत्या करने पर मजबूर है। किसानों की आत्महत्या का आंकड़ा हर दिन 55 से 60 पहुंच गया है।

सभा ने कहा कि मोदी सरकार ने देश के किसानों के साथ बहुत बड़ा धोखा किया है। चुनाव से पहले देश भर में रैलियां करके मोदी ने ज़ोर-शोर से इस बात का एलान किया था कि वे सत्ता में आते ही डाॅ. स्वामिनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करेंगे और किसानों को उनकी उत्पादन लागत पर 50 प्रतिशत लाभकारी मूल्य देंगे लेकिन सत्ता में आते ही केन्द्र सरकार ने सर्वोच्च न्यायालय में यह कह कर अपना पल्ला झाड़ लिया कि उसके पास इतने साधन नहीं है कि वह डाॅ. स्वामिनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू कर सके।

सभा ने कहा कि दूसरी ओर कारपोरेट घरानों को फायदा पहुंचाने के लिए केन्द्र सरकार भूमि अधिग्रहण बिल में संशोधन लाकर किसानों से उनकी ज़मीनें छीनने की साजिश रच रही है। सभा ने यह भी कहा कि मोदी राज में पूंजीपतियों को लूट की खुली छूट है। मनरेगा के बजट में कटौती करके मोदी सरकार ने ग्रामीण रोज़गार पर कुठाराघात किया है। साल में 100 दिन की जगह सिकुड़कर रोज़गार 35 से 39 दिन रह गया है तथा जिसके फलस्वरूप केन्द्र सरकार के खिलाफ 24 नवम्बर को दिल्ली में लाखों किसान रामलीला ग्रांउड में विरोध प्रदर्शन करेंगे।

हिमाचल किसान सभा के राज्य सचिव कुशाल भारद्वाज ने नुक्कड़ सभा को सम्बोधित करते हुए कहा कि केन्द्र की तरह ही राज्य की कांग्रेस सरकार भी किसान विरोधी साबित हुई है। प्रदेश के किसान जंगली जानवरों की समस्या से बुरी तरह से प्रभावित है लेकिन सरकार समस्या को हल करने के बजाय उसे आगे टालने की कोशिश कर रही है।

उन्होंने कहा कि 28 अगस्त 2015 को विधानसभा में संकल्प प्रस्ताव पारित करने के बावजूद प्रदेश सरकार ने किसानों को 10 बीघा तक जम़ीन देने और गरीब, लघु और सीमान्त किसानों को राहत देने के लिए नीति बनाने के अपने वादे को भूलकर किसानों के फलदार पौधों को काटने की मुहिम में जुटी है। सभा ने यह भी कहा कि प्रदेश में वनाधिकार कानून को लागू नहीं किया जा रहा और न ही आवारा-नकारा पशुओं पर सरकार कोई नीति बना रही है। भारद्वाज ने प्राकृतिक आपदा, सूखे, भारी बरसात और ओलावृष्टि से किसानों की फसलों के नुकसान के मुआवज़े की राशि को बढ़ाकर न्यायसंगत बनाने की मांग भी उठाई।

किसान सभा ने जंगली जानवरों की समस्या के समाधान व बन्दरों लिए का निर्यात खोलने, कलिंग के लिए प्रशिक्षित शूटरों की टीमें बनाने, फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले अन्य जंगली जानवरों को वर्मिन घोषित करने की मांग भी उठाई।

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