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इस फैसले से देश का कोई भी ऐसा वर्ग नही है जिसे नुकसान न पंहुचा हो या परेशानी न हुई हो जैसे छोट व्यापारी, मजदूर, दिहाडीदार, किसान, बागवान व आम जनता इससे प्रभावित हुई है।

शिमला- हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी मीडिया विभाग के चैयरमैन नरेश चैहान ने बताया कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ठाकुर सुखविन्दर सिंह सुक्खू के निर्देशानुसार प्रदेश कांग्रेस पार्टी केन्द्र सरकार द्वारा बिना सोचे-समझें लिए गये 500-1000 रूपये के नोटबन्दी के फैसले से आम लोगों को जो समस्या आ रही है और परेशानी का सामना करना पड रहा है इसके चलते केन्द्र सरकार के खिलाफ 24 नवम्बर 2016 को पूरे प्रदेश में जिला स्तर पर विरोध प्रर्दशन करेगी।

कांग्रेस ने कहा कि 8 नवम्बर को प्रधानमंत्री द्वारा देश में नोटबन्दी का फैसला जल्दवाजी और बिना तैयारी के लिया गया है, इस फैसले से देश के करोड़ों लोगों को परेशानी हुई है और ऐसी कोई भी व्यवसाय नही है जिसे इस फैसले से फर्क न पडा हो। उन्होंनें कहा कि केंद्र सर्कार द्वारा नोटबन्दी का फैसला लेने से पहले कोई भी तैयारी नही की गई जैसे पर्याप्त नोटो की छपाई करना, बैंकों को तैयार करना व नये नोटो को बैंका तक पंहुचाना या एटीएम को दुरूस्त करना ऐसा कुछ भी नही किया गया सीधा नोटबन्दी का फैसला देश पर थोपा गया।

कांग्रेस ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार द्वारा कालेधन पर रोक लगाने के लिए नोटबन्दी के इस फैसले से 5 फीदसी लोगों को निशाना बनाने के लिए बाकी 95 प्रतिशत आम जनता को परेशानी में डाल दिया है। आज बैंकों से अपना ही पैसा निकालने के लिए केंद्र की सरकार ने आम जनता को 2000 रूपये निकालने के लिए बैंकों के बाहर कतार में लगा दिया है इसके बावजूद भी लोगों को 15-15 घण्टे लाईन में लक कर बैंकों में जमा अपना ही पैसा नही मिल पा रहा है और इस फैसले से अब तक पूरे देश में तकरिबन 50 से अधिक लोग अपनी जान गवां चुकें हैं !

कांग्रेस ने कहा कि आज 14 दिन बीत जाने के बाद भी स्थिती में कोई सुधार नही आया है और आज भी अपना पैसा निकालने के लिए लोग कतार मे खडें हैं। उन्होंनें कहा कि प्रधानमंत्री को भाषणों में इधर-उधर बोलने के बजाये संसद में इसका जवाब देना चाहिए और इस फैसले से देश की आम जनता को जो परेशानी हो रही है उसकी जिम्मेवारी लेते हुए प्रधानमंत्री व वित मंत्री को देश से माफी मांगनी चाहिए।

नोट बंदी पर प्रदेश कांग्रेस ने कहा कि इस फैसले से देश का कोई भी ऐसा वर्ग नही है जिसे नुकसान न पंहुचा हो या परेशानी न हुई हो जैसे छोट व्यापारी, मजदूर, दिहाडीदार, किसान, बागवान व आम जनता इससे प्रभावित हुई है। इससे देश की अर्थव्वयस्था प्रभावित हुई है और व्यपार ठप पडा है और आम जनता अपना काम छोड बैंकों के बाहर कतार में खडा है !

पूरे देश में आर्थिक आपातकाल की स्थिती बनी हुई है। केंद्र सरकार अपनी नाकामी छिपाने के लिए रोज प्रेस के माध्यम से नोटबन्दी के निर्णय में अपने फैसले बदल रही है, जिससे लोगों में एक भ्रामक स्थिती बनी रहती है और जो नई दरे देने के फैसले सरकार ले रही है हकीकत में उसका फायदा आम जनता को नही मिल रहा है। वहीं सरकार अपने इस फैसले को सही तरिके से लागू करने में विफल रही है और आने वाले समय में नोटबन्दी के इस फैसले से देश की अर्थव्यवस्था को बहुत बडा झटका लेगेगा।

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