मंडी प्रशासन के नाक तले एनजीटी के आदेशों का उलंघन, सुकेती खड्ड में फेंका जा रहा मलबा

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Illegal Dumping mandi
Photo: Jagran

मंडी- जिला मुख्यालय में प्रशासन के नाक तले एनजीटी के आदेश को ठेंगा दिखाया जा रहा है। शहर के बाईपास के समीप सुकेती खड्ड में दिनरात मलबा फेंका जा रहा और प्रशासन चैन की नींद सोया हुआ है।

नगर परिषद की रामनगर वार्ड के लोगों ने बीती रात जागकर काटी। रामनगर के ठीक सामने बाइपास पर पूरी रात ट्रैक्टरों से मलबे की डंपिंग की जाती रही। टिप्परों के डाले को खोलने व मलबे को पलटने से आने वाली तीखी आवाजों के कारण लोग रातभर नहीं सो सके। बीमार व बुजुर्ग लोग पूरी रात परेशान रहे। लोगों ने आवाजें देकर व टार्च आदि से रोशनी करके इन्हें ललकारा भी, मगर रात 11 से सुबह सात बजे तक बदस्तूर यह सिलसिला जारी रहा। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल ने (एनजीटी) के साफ आदेश है कि किसी भी खड्ड व नाले या नदी में मलबे की डंपिंग नहीं हो सकेगी। ऐसा करने पर एक लाख जुर्माने का प्रावधान है। जुर्माना करने की शक्तियां प्रशासन, पुलिस, प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड, वन, लोक निर्माण विभाग समेत सभी संबंधित विभागों को दी गई हैं। बावजूद इसके इन आदेशों को ठेंगा दिखाते हुए यहां दिन रात डंपिंग की जा रही है।

रामनगर के स्थानीय लोगो ने पुलिस को भी फोन पर सूचना दी गई तथा कार्रवाई करने की मांग की गई। इन लोगों ने बताया कि यह मलबा रामनगर में ही बनाए जा रहे एक प्लाट से उठाया जा रहा था जो कुछ ही दूरी पर जाकर फेंका गया। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि सात टिप्पर इस अवैध डंपिंग के कार्य को अंजाम दे रहे थे।

आधा शहर इससे परेशान हो उठा था। मगर पुलिस प्रशासन को यह नजर नहीं आया। लोगों का कहना है कि उन्हें किसी के प्लाट बनाने से एतराज नहीं है, मगर कम से कम मलबा तो डंपिंग साइट पर या ऐसी जगह फेंका जाए जहां पर आबादी न हो या फिर दिन के समय यह काम किया जाए, ताकि लोगों की नींद हराम न हो। लोगों ने कहा कि यदि प्रशासन ने इस बारे में कोई कार्रवाई नहीं की तो वे सीधे एनजीटी व प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड को इसकी शिकायत भेजेंगे।

उधर, शहरी पुलिस चौकी प्रभारी राम लाल ठाकुर का कहना है कि मामला संज्ञान में आया है। अवैध रूप से सुकेती खड्ड में मलबा फेंकने वालों पर कार्रवाई की जाएगी।

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