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शिमला- हिमाचल प्रदेश के सरकारी स्कूलों में भी प्री नर्सरी की कक्षाएं शुरू करने को लेकर तैयारी आरंभ हो गई है। प्रदेश सरकार ने मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड की बैठक के दौरान यह मामला उठाया है। बैठक में सभी राज्यों के मुख्य संसदीय सचिव (सीपीएस) व शिक्षा सचिवों ने हिस्सा लिया।

वैसे देखा जाये तो प्रदेश के सरकारी स्कूलो की स्तिथि बहुत दयनीय है, कहीं पर शिक्षक नहीं होते तो कहीं पर विद्यार्थी नहीं, कुछ जगह पर तो सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बचे बुनियादी चीजो से ही वंचित है! हंसी तो तब आती है जब प्रदेश के मुख्यमंत्री प्रदेश में साक्षरता दर की बात करते है पर इस और कभी ध्यान नहीं देते की कुछ स्कूलों में तो छत तक नहीं है तो कुछ स्कूलों की इमारतों की हालत भी जर जर है

बैठक में राज्य सरकार की ओर से सीपीएस नीरज भारती व शिक्षा सचिव डॉ. राकेश शर्मा शामिल हुए और प्रदेश के मामले सलाहकार बोर्ड के समक्ष उठाए। राज्य सरकार की ओर से सुझाव दिया गया कि सरकारी स्कूलों में भी प्री नर्सरी कक्षाएं शुरू करने से बच्चों की हाजिरी बढ़ेगी। निजी स्कूलों में प्री नर्सरी की कक्षाओं में दाखिला लेने वाले बच्चे उसी स्कूल में कम से कम आठवीं कक्षा तक पढ़ाई करते हैं। ऐसे में यदि सरकारी स्कूलों में प्री नर्सरी शुरू की जाती है तो आठवीं कक्षा तक बच्चे एक ही स्कूल में पढ़ेंगे और इससे सरकारी स्कूलों में शिक्षा का स्तर भी बढ़ेगा।

पांचवीं व आठवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा

प्रदेश सरकार ने स्कूलों में प्री नर्सरी कक्षाओं को शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत लाए जाने की बात बोर्ड के समक्ष रखी है। बैठक में पांचवीं व आठवीं कक्षा के लिए बोर्ड के तहत परीक्षा लिए जाने का प्रावधान दोबारा शुरू करने के मामले को भी उठाया गया। शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत स्कूलों में बच्चों को फेल नहीं करने की नीति में संशोधन करने की मांग की गई है। बोर्ड की बैठक में राज्य सरकार की ओर से कहा गया कि पांचवीं व आठवीं की बोर्ड परीक्षाएं न लिए जाने के कारण प्रदेश में शिक्षा का स्तर गिरता जा रहा है। केंद्रीय शिक्षा सलाहकार बोर्ड सभी राज्यों से आए सुझावों को केंद्र सरकार के समक्ष रखेगा। इसके बाद केंद्र सरकार शिक्षा का अधिकार अधिनियम को संशोधन के लिए संसद में लेकर जाएगी।

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