प्रदेश शिक्षा बोर्ड किताबो के मूल्यों में 45 फीसदी तक की बढ़ोतरी जबकि गुणवत्ता निम्न स्तर की

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Himachal Pradesh Board of School Education

राज्य स्कूल शिक्षा बोर्ड ने बढ़ाए पाठ्य पुस्तकों के दाम,गुणवत्ता के मामले में ये पुस्तकें हैं निम्न स्तर की,प्राइवेट स्कूलों के बच्चे होंगे ज्यादा प्रभावित

शिमला- नया शैक्षणिक सत्र प्राइवेट स्कूलों में पढ़ाई कर रहे बच्चों के अभिभावकों की जेब में डाका डालेगा। वहीं सरकारी स्कूलों में पढ़ाई करने वाले नौंवी से जमा दो तक के बच्चों पर भी इस बार महंगी किताबों का बोझ पड़ेगा। स्कूल शिक्षा बोर्ड ने इस शैक्षणिक सत्र से विभिन्न टाइटल की किताबों के मूल्यों में 10 से 45 फीसदी तक की बढ़ोतरी की है।

बोर्ड के इस फैसले से प्रदेश भर के लाखों बच्चों के अभिभावकों को महंगी किताबें खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। बोर्ड ने कुछ किताबों के मूल्यों में इतनी बढ़ोतरी की है कि यह पुस्तकें निजी प्रकाशकों की पुस्तकों से भी महंगी हैं, जबकि गुणवत्ता के मामले मे बोर्ड की पुस्तकें निम्न स्तर की हैं।

छपाई के मामले में भी यह पुस्तकें ज्यादा क्लीयर नहीं हैं। पुस्तकों के संशोधित मूल्यों के अनुसार दूसरी कक्षा की हिंदी की पुस्तक के दाम 70 रुपये से बढ़ाकर 86 रुपये, अंग्रेजी की किताब 26 से बढ़ाकर 33 रुपये कर दिए गए हैं। इसके अलावा तीन दर्जन के करीब विभिन्न टाइटल की किताबों के मूल्यों में भी भारी बढ़ोतरी हुई है।

यहां जानिए कीमतों में कितनी हुई बढ़ोतरी

तीसरी कक्षा की हिंदी की पुस्तक 32 की बजाय 43 रुपये में मिलेगी, जबकि गणित की पुस्तक 46 से 64 और अंग्रेजी के 35 से 50 रुपये कर दिए हैं। चौथी कक्षा का मैथ 51 से 73, हिंदी, अंग्रेजी और पर्यावरण शिक्षा की पुस्तक अब 31 की जगह 43 रुपये में मिलेगी। पांचवीं कक्षा की हिंदी में करीब 45 प्रतिशत की बढ़ोतरी कर दाम 37 रुपये से बढ़ाकर 54 रुपये दाम किया गया।

प्राइवेट स्कूलों के बच्चे होंगे ज्यादा प्रभावित

पुस्तकों के दाम में हुई बढ़ोतरी से प्राइवेट स्कूलों के बच्चे ज्यादा प्रभावित होंगे। क्योंकि शिक्षा का अधिकार कानून के चलते सरकारी स्कूलों में सर्व शिक्षा अभियान के तहत पहली से आठवीं तक पुस्तकें बिल्कुल फ्री मिलती हैं। नौवीं और दसवीं में पढ़ाई करने वाले एससी, एसटी, ओबीसी, आईआरडीपी सहित अन्य आरक्षित वर्ग के बच्चों को भी किताबें मुफ्त मिलती हैं।

एनसीईआरटी से पुस्तकों के निर्धारित मूल्यों से दस फीसदी तक रेट स्कूल शिक्षा बोर्ड बढ़ा या कम कर सकता है। बोर्ड की पुस्तकों के रेट एनसीईआरटी के मूल्यों से कम चल रहे थे। कागज और छपाई महंगी होने पर बोर्ड ने इन मूल्यों को एनसीईआरटी के निर्धारित मूल्यों के बराबर किया है।

विनय धीमान, सचिव स्कूल शिक्षा बोर्ड

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