कमला नेहरूअस्पताल में बच्चा बदलने के मामले में अपने असली मां बाप को सौंप जाएंगे दोनों बच्चे

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शिमला: कमला नेहरू अस्पताल में बच्चा बदलने के मामले में हिमाचल हाईकोर्ट में शुक्रवार को दोनों दंपति हाजिर हुए। कोर्ट ने कहा-यह अपने आप में बड़ा विचित्र और तकलीफदेह केस है। आप दोनों खुद अलग कमरे में बैठ कर बच्चों की अदला-बदली की तारीख तय कर कोर्ट को बता दें।

दोनों दंपति पहली बार एक साथ बैठे। माहौल में खुशी और गम का अजीब मंजर था। तय हुआ कि 26 अक्तूबर को जितेंद्र के खलीनी स्थित घर में दोनों बच्चों की भाई बहन की तरह अन्न ग्रहण की रस्म होगी। दोनों पांच महीने पहले 26 तारीख को ही पैदा हुए थे।

और इसी दिन दोनों बच्चे अपने असली मां बाप को सौंप दिए जाएंगे। बाद में कोर्ट को इसकी सूचना दे दी जाएगी। हिमाचल हाईकोर्ट में मुख्य न्यायाधीश मंसूर अहमद मीर और न्यायाधीश संदीप शर्मा की खंडपीठ ने डीएनए जांच रिपोर्ट पेश करने के बाद शुक्रवार दोपहर 2.30 बजे इस मामले में सुनवाई शुरू की।

मुख्य न्यायाधीश भी हुए दुखी, कहा दोनों के साथ हुई है ज्यादती

इस दौरान दोनों दंपति बच्चों के साथ कोर्ट में उपस्थित थे। मुख्य न्यायाधीश ने दोनों बच्चों के अभिभावकों को डीएनए रिपोर्ट से अवगत करवाया। सीजे मंसूर अहमद मीर ने बच्चा बदलने की घटना को दु:खद बताया। उन्होंने कहा कि इस प्रकरण से दोनों परिवारों के साथ ज्यादती हुई है।

मुख्य न्यायाधीश ने दोनों बच्चों के अभिभावकों से कहा कि हालांकि बच्चों को अलग करना दुखदायी और असहनीय पीड़ा दायक होगा, लेकिन यदि दोनों परिवार बच्चों को भाई-बहन मान कर आगे बढ़ें तो वह पीड़ा धीरे-धीरे खत्म हो जाएगी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि बच्चा बदलने के दोषियों को किसी भी सूरत में बक्शा नहीं जाएगा। इस मामले पर आगामी सुनवाई 27 अक्तूबर को होगी।

दोनों परिवारों ने मिल बैठकर लिया बड़ा फैसला

इससे पहले खंडपीठ ने दोनों दंपति को आपसी सुलह से मामला कोर्ट से बाहर सुलझाने को कहा। कोर्ट ने पुलिस और अस्पताल प्रबंधन को आदेश दिए कि वह इस मामले को अपने लॉजिकल तरीके से सुलझाएं।

कोर्ट की सलाह पर दोनों बच्चों के माता-पिता रजिस्ट्रार जनरल के कक्ष में आपसी समझौते के लिए बैठे। दो दौर में चली इस चरचा और बातचीत के बाद सहमति से निर्णय लिया कि दोनों दंपति शिमला के खलीनी स्थित अमानत के पिता के घर पर दोनों बच्चों का अन्न ग्रहण अनुष्ठान करेंगे।

इसमें दोनों बच्चों अमानत और नितांश को दोनों दंपति अपने-अपने परिवार की मौजूदगी में अपनाएंगे। इसके बाद दोनों एक-दूसरे को बच्चे सौंप देंगे। ये बातचीत बड़े सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई। सभी मान रहे थे कि गलती उनकी नहीं, केएनएच की है। 27 अक्तूबर को दंपति पुन: कोर्ट में पेश होंगे और कानूनी रूप से दोनों के बीच बनी सहमति को अंतिम रूप दे दिया जाएगा।

कोर्ट के बाहर रोती रहीं माएं

कोर्ट के बाहर दोनों माएं रोती रहीं। अंजना के आंसू तो रुकने का नाम नहीं ले रहे थे। दोनों मीडिया से बात करते हुए रो रहे थे। अंजना को बेटे के छिन जाने का दुख था जिसकी वह बायोलॉजिकल मां नहीं।

शीतल को भी अपनी बेटी के चले जाने का दुख सता रहा था जो उसकी नहीं है। दोनों परिवारों के बीच एक अजीबो-गरीब रिश्ता बन गया था। दंपतियों में बच्चा बदलने की घटना को लेकर अस्पताल प्रशासन के खिलाफ भारी गुस्सा था। वे कड़ी कार्रवाई की मांग करते रहे।

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