Himachal Kisan Sabha 2

हालाकिं हिमाचल किसान सभा बंदरों को वर्मिन घोषित करने के निर्णय को किसानों की जीत मान रही हो पर इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि ये मानवता की हार है!

शिमला- प्रदेश के 53 विकास खण्डों में बंदरों को वर्मिन घोषित करने के फैसले को लेकर हिमाचल किसान सभा के राज्य महासचिव कुषाल भारद्वाज ने प्रदेशभर के किसानों के लम्बे संघर्श की ऐतिहासिक जीत बताया है। उन्होंने कहा कि जंगली जानवरों विषेशकर बंदरों के प्रदेश भर में फैले आंतक व इससे मुक्ति के लिए विभिन्न सरकारों की उदासीनता के खिलाफ हिमाचल किसान सभा ने पिछले कई वर्षोंसे प्रदेश भर में निरंतर संघर्ष लड़ा, जिसमें अनेकों बार विधान सभा का घेराव भी शामिल है।

Himachal Kisan Sabha

किसान सभा का यह भी कहना है कि बंदरों व सूअरों से मुक्ति दिलाने एवम् इन्हें वर्मिन घोषित करवाने की मांग पर जोगिन्दर नगर विधान सभा क्षेत्र की जोगिन्दर नगर व लडभड़ोल तहसीलों में तो अनेकों संघर्श लड़े। इसी वर्ष 18 मार्च को लगभग बारह सौ किसानों ने और 27 जून को लगभग दो हजार किसानों ने जोगिन्दर नगर में विषाल प्रदर्षन का आयोजन किया था। इसी वर्ष 26 अगस्त को शिमला में हुए विशाल किसान प्रदर्षन में जोगिन्दर नगर से ही 800 से अधिक किसानों ने हिस्सा लिया था।

जिले की मंडी, पधर, सरकाघाट, धर्मपुर, चच्योट तहसीलों में भी किसान सभा ने संघर्श लड़ा। मनना है कि कुषाल भारद्वाज किसानों के के दबाव के कारण सरकार को बंदरों को वर्मिन घोषित करने का निर्णय लेना पड़ा। भारद्वाज ने इस जीत पर जोगिन्दर नगर, लडभड़ोल, पधर सरकाघाट व धर्मपुर तहसीलों के सभी किसानों समेत प्रदेष भर के किसानों को बधाई दी है।

सभा का कहना है कि अब जबकि बंदरों को वर्मिन घोशित किया जा चुका है तो सरकार को चाहिए कि सरकारी संसाधनों के बलबूते विभिन्न विभागों विषेशकर वन महकमें की जिम्मेवारी लगाकर सिद्वस्थ शिकारियों को इस काम पर लगाएं तथा बंदरों की साइंटिफिक किलिंग के लिए तुरंत अभियान चलाया जाए। सभा ने कहा कि अब आवारा पशुओं की समस्या के समाधान के लिए भी ठोस पहल करें तथा प्रदेश भर में बड़े पैमाने पर गोसदनों का निर्माण कर उन्हें सरकारी संसाधनों से चलाया जाए।

हालाकिं हिमाचल किसान सभा बंदरों को वर्मिन घोषित करने के निर्णय को किसानों की जीत रही हो पर इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि ये मानवता की हार है!<

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