अब बंदर मारने पर 500 रुपये, कोई वैज्ञानिक तरीका नहीं, कोई भी मार सकता है गोली

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monkey culling in Himachal

ज्ञात रहे की वर्मिन घोषित बंदरों को मारने के लिए सरकार ने किसी भी प्रकार का वैज्ञानिक ढंग नहीं अपनाया है जो की निन्दनियां है !

शिमला-हिमाचल में बंदरों के आतंक से निजात पाने के लिए लोगों से मांगे गए सुझावों पर चर्चा के लिए सोमवार को एक बैठक आयोजित हुई। बैठक की अध्यक्षता वनमंत्री ठाकुर सिंह भरमौरी ने की।

बैठक में वन मंत्री ने बताया कि बंदरों को मारने पर अब तीन सौ रुपये के बजाय पांच सौ रुपये बतौर प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। इसके अलावा बैठक में तय हुआ कि बंदरों को आतंक से निपटने के लिए अब पंचायत स्तर पर नोडल टीमें गठित की जाएंगी।

ज्ञात रहे की वर्मिन घोषित बंदरों को मारने के लिए सरकार ने किसी भी प्रकार का वैज्ञानिक ढंग नहीं अपनाया है जो की निन्दनियां है !

यह टीमें वन विभाग के अधिकारियों के सहयोग से बंदरों को मारने के अलावा उन्हें भगाने और क्षेत्र विशेष तक सीमित रखने के लिए काम करेगी। बैठक के दौरान यह भी निर्णय हुआ कि बंदरों को वर्मिन घोषित कराने के साथ ही उनके एक्सपोर्ट पर लगे प्रतिबंध को हटाने के लिए नए सिरे से केंद्र सरकार से संपर्क किया जाएगा।

70 हजार बंदूकों के लाइसेंस, नहीं कर रहे शिकार

प्रधान सचिव तरुण कपूर ने बताया कि प्रदेश में वैसे तो 70 हजार से ज्यादा बंदूकों के लाइसेंस जारी हुए हैं। लेकिन बंदूक चलाने या शिकार करने वालों की संख्या बेहद कम हैं। ऐसे में अब पंचायत स्तर पर टीम बनाई जाएगी ताकि शिकारी वर्मिन घोषित क्षेत्रों में बंदरों को मार सके।

बैठक के दौरान वन मंत्री व प्रधान सचिव वन के अलावा शिमला के महापौर संजय चौहान, वन निगम के उपाध्यक्ष केवल सिंह पठानिया आदि प्रमुख रूप से उपस्थित थे।

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