जो बन्दर मारेगा वो ही दफनाएगा, जानिए बन्दर मारने के लिए किन नियमो का करना होगा पालन

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monkey culling in Himachal

नियमों के अनुसार बूढ़े, कमजोर, अपंग या गर्भवती, बच्चे वाली मादा, को नहीं मार सकेंगे।

शिमला- हिमाचल में फसलों को नुकसान पहुंचाने और हमलावर बंदरों को मारने के लिए सरकार 300 रुपये बतौर इनाम दे रही है, लेकिन खुद कोई जिम्मेदारी लेने को तैयार नहीं। जारी गाइडलाइन ने उलटा बंदर मारने वालों के हाथ बांध दिए हैं। गाइडलाइन के मुताबिक बंदर को मारने वाले पर ही उसे दफनाने की भी जिम्मेदारी होगी। बंदरों को भले ही वर्मिन घोषित किया गया हो।

नियमों के अनुसार बूढ़े, कमजोर, अपंग या बच्चे वाली मादा को नहीं मार सकेंगे। बंदर पर निशाना साधने से पहले शिकारी को पता करना होगा कि मादा बंदर कहीं गर्भवती तो नहीं।

कानूनी विवाद की सारी जिम्मेदारी बंदर मारने वाले पर

बंदर अगर अपने बच्चे को सीने से चिपकाए हुए है तो उसे भी नहीं मारा जा सकता। खास बात ये है कि बंदर को ऐसे मारा जाए जिससे बंदर पर निर्दयता न हो, यह कैसे संभव है इसका जिक्र गाइडलाइन में नहीं है।

सबसे दिलचस्प बात यह कि बंदर मारने के दौरान या बाद में अगर कोई कानूनी विवाद हुआ तो उसकी जिम्मेदारी भी बंदर मारने वाले पर होगी। ऐसे मामलों में वन विभाग पार्टी नहीं बनेगा। बंदर मारने के बाद संबंधित रेंज अफसर, फॉरेस्ट गार्ड को सूचना देनी होगी।

पहले से गठित कमेटी की निगरानी में बंदर को चयनित जगह पर ही दफनाया जाएगा। बंदर मारने से लेकर दफनाने तक वन विभाग सिर्फ मॉनीटरिंग रोल में रहेगा।

तीन सौ रुपये प्रोत्साहन राशि प्राप्त करने का प्रोसेस

बंदर मारने के बाद संबंधित क्षेत्र के फॉरेस्ट गार्ड, रेंज अफसर या डीएफओ को सूचित करना होगा। वन अधिकारी घटनास्थल का निरीक्षण कर रिपोर्ट बनाएगा। इसके बाद बंदर को तय प्रक्रिया के तहत मारने वाले को दफनाना होगा। इसके बाद उसे तीन सौ रुपये बतौर प्रोत्साहन राशि मिलेंगे।

वर्मिन बंदरों को मारने के संबंध में एक प्रोटोकाल तैयार किया है। स्थानीय अफसरों के माध्यम से लोगों को इसकी जानकारी दी जा रही है ताकि मरने के बाद बंदर से किसी तरह की संक्रामक बीमारी न फैले। इसके लिए संबंधित रेंज व डिविजन के अफसरों को निर्देश दिए गए हैं।- एसएस नेगी, पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ

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