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शिमला-एक बार फिर से प्रदेश हाईकोर्ट ने निचली अदालत का फैसला उलटते हुए साढ़े 14 किलो चरस के साथ आनी में पकड़े तीन आरोपियों जय भगवान, सतीश कुमार और कर्ण सिंह को मादक पदार्थ अधिनियम के तहत दोषी करार देते हुए 20 साल के कठोर कारावास और दो-दो लाख रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है। हाईकोर्ट ने विशेष न्यायाधीश किन्नौर डिविजन रामपुर के फैसले को पलटते हुए यह सजा सुनाई है।

15 मई 2010 को पुलिस ने आनी में पेट्रोलिंग व नाकेबंदी के दौरान आरोपियों को चरस के साथ गिरफ्तार किया गया था। एक दोषी की मौत हो चुकी है। 10 गवाहों को कोर्ट में पेश करने के बावजूद अभियोजन पक्ष निचली अदालत में चारों दोषियों का दोष साबित नहीं कर पाया। निचली अदालत के फैसले के खिलाफ सरकार ने हाईकोर्ट में अपील की थी जिसे स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट ने सभी दोषियों को यह सजा सुनाई।

न्यायाधीश राजीव शर्मा और न्यायाधीश सुरेश्वर ठाकुर की खंडपीठ ने दोषियों को कोर्ट में पेश न कर पाने वाले जिम्मेवार पुलिस वालों को लताड़ते हुए उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई अमल में लाने के आदेश भी दिए। कोर्ट ने डीजीपी को आदेश दिए कि वह एक सप्ताह के भीतर तीनों दोषियों को सलाखों के पीछे भेजे वर्ना वह लापरवाही के लिये निजी तौर पर स्वयं जिम्मेवार होंगे।

कोर्ट ने इन तीनों को कोर्ट में पेश न कर पाने पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि सरकारी मशीनरी का कोर्ट के आदेशों के प्रति तनिक भी सम्मान नहीं रहा है।

With Inputs from Amar Ujala

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