unauthorized buildings in Shimla

शिमला-हिमाचल सरकार ने भले ही अवैध भवनों को नियमित करने के लिए विधानसभा में संशोधित टीसीपी विधेयक पास कर दिया हो लेकिन इन भवनों की ज़िम्मेदारी लेने से हाथ पीछे खींच लिए है! प्रदेश सरकार ने इसकी पूरी जिम्मेदारी स्ट्रक्चर पास करने वाले इंजीनियरो पर डाली है! इंजीनियरो ने भी स्पष्ट कर दिया की प्रमाण पत्र सिर्फ उन्हें ही दिया जा सकता है जो भवन उनकी देख रेख में बने है!

सवाल ये उठता है की हिमाचल प्रदेश में कई भवन ऐसे है जो की काफी वर्षो से बने हुए है उन भवनों को न तो किसी भी इंजीनियर व् वास्तुकार ने बनाया है परन्तु वो भवन लोगो ने स्वयं अपने आप बनाये है! हिमाचल प्रदेश नाना प्रकार का प्रदेश है जहां पर शहर व् ग्राम दोनों प्रकार की भोगोलिक परिस्तिथिया है! ग्रामीण लोग अक्सर स्ट्रक्चर इंजीनियर व् वास्तुकार से सलाह नहीं लेते है परन्तु वो स्वयं अपने आप ही भवनों का निर्माण कर लेते है!

यह कहना है भाजपा प्रदेश अध्यक्ष श्री सतपाल सत्ती का जिन्होंने हिमाचल प्रदेश सरकार के टीसीपी संशोधन विधेयक पर सवाल उठाया है!

सत्ती ने कहा की कांग्रेस सरकार बड चढ़ के लोगो को विश्वास दिलाया कि सारे भवन इनकी शर्तो पर नियमित होंगे पर भाजपा ने जब इसका विरोध किया और इनकी महंगी दरो को सस्ता करने का अहवान किया! और ‘As it is, Where it is’ यानि के जिस प्रकार से मकान बने है उसी प्रकार से स्वीकृत किये जाये यह भाजपा के शिमला से विधायक सुरेश भारद्वाज की मांग थी! सत्ती ने दावा किया कि प्रदेश सरकार ने भाजपा के दबाव में आ कर विधेयक तो वापिस लिया और उस पर पुनः विचार किया और फिर से एक बार टीसीपी विधेयक में संशोधन किए पर आज एक बार फिर कांग्रेस सरकार लोगो को सुविधा देने में असफल रही है और स्वयं ही जनता की सुविधा में बाधा बन रही है !

सत्ती ने कहा की कांग्रेस सरकार ने यह धारा डाल जनता के लिए बड़ी परेशानी खड़ी कर दी है ! इंजीनियर व् वास्तुकार उन्ही भवनों को स्वीकृति देंगे जो उन्होंने बनाये है परन्तु 80% लोग जिन्होंने अपने भवनों का स्वयं निर्माण किया है वो क्या करेगे यह एक बड़ा सवाल निकल कर आता है !

सतपाल सत्ती ने सरकार से जल्द से जल्द इस धारा को वापिस मांग की है की है तथा सरकार से इन भवनों की खुद ज़िम्मेदारी लेने व् एक सरल व्यवस्था खड़ी करने की मांग की है!

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