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डीएसपी सुरेश चौहान द्वारा छात्रों को असभ्य भाषा का इस्तेमाल कर धमकाने को लेकर उठे सवाल

DSP SHimla Suresh Chauhan

शिमला– पिछले कल दिनांक 3 अप्रैल को हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के मुख्य सुरक्षा अधिकारी डी०एस०पी०सुरेश चौहान का एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर हो रहा था जिसमे वे विश्वविद्यालय के एक छात्र से असभ्य भाषा का इस्तेमाल कर धमकियाँ देते सुनाई दे रहे हैं! वे छात्र से को कहते हुए सुनाई दे रहे हैं,

बहार निकल नहीं तो ठोक दूंगा।

छात्र के विरोध करने व तमीज से बात करने की बात सुनकर डी०एस०पी कह रहे हैं,

बहार निकल, बड़ा आया तमीज सीखने वाला!

एक पुलिसकर्मी कहता हुआ सुनाई दे रहा है,

गाड़ी लेके आओ, यंहा से दो, तीन बन्दे उठाने हैं।

याद रखें कि कानून पुलिस को चेतावनी देने का अधिकार देता है, धमकी देने का नहीं!

इसके बाद इस छात्र को सरकारी कर्मचारी के साथ बतमीज़ी करने और काम में बाधा पहुँचाने के के जुर्म में गिरफ्तार कर कर लिया गया,जोकि धमकियाँ देने के बिना भी संभव था!

ये सारा मामला छात्रों के द्वारा परिसर के अंदर बैज लगाने के कारण शुरू हुआ! हालाँकि इस वाक्या को यह कहकर पुलिस का बचाव किया जा सकता है कि छात्र का लहज़ा भी उग्र था, पर फिर भी कई सवाल हैं जो इस वीडियो को देखने के बाद पूछे जा रहे हैं!

सोशल मीडिया पर भी लोगों ने एक पुलिस अफसर के इस काम करने के तरीके और दुर्व्यवहार के ऊपर सवाल उठाये हैं!  आखिर जब एक पुलिस अधिकारी नियमों के उलंघन के लिए कानूनी तौर पर करवाई कर सकते हैं तो डी०एस०पी० गाली गलौच करने पे क्यों उतर आये? इस छात्र को बिना गली गलौच किये बिना भी  भी हिरासत में लिया जा सकता था! ये भी सवाल उठता है की एक अफसर के इस व्यव्हार से विश्वविद्याला में उपस्थित अन्य छात्र और छात्रों को क्या सन्देश जायेगा!

जंहा छात्र को गिरफ्तार कर लिया गया वंही डी०एस०पी० के इस दुर्व्यवहार को लेकर कोई जांच नहीं हो रही!

इसी के चलते आज दिनांक 4 अप्रैल को को एस०एफ०आई० हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई  ने समरहिल चौक पर  डी०एस०पी०सुरेश चौहान के खिलाफ अपना विरोध प्रदर्शन किया। एस०एफ०आई० ने कहा कि बीते दिन विश्वविद्यालय परिसर के अंदर डीएसपी के द्वारा छात्रों के साथ की गई बदसलूकी को लेकर ये विरोध प्रदर्शन किया गया।छात्रों के साथ किए गए गलत व्यवहार और गाली गलौच को लेकर बीते दिन डी०एस०पी० के द्वारा अपने पद का गलत प्रयोग करके छात्रों को डराया धमकाया गया और साथ ही साथ एस०एफ०आई० राज्य अध्यक्ष को भी गलत तरीके से पुलिस हिरासत में लिया और पुलिस प्रशासन के द्वारा एक तरफा कार्रवाई की जा रही है ।

एस०एफ०आई० का कहना है कि  साथ ही साथ आज विश्वविद्यालय प्रशासन के द्वारा एक तुगलकी फरमान फिर से जारी किया गया है जिसमें परिसर प्रशासन के द्वारा 18 छात्रों को अनिश्चितकालीन  निष्कासन किया गया है! छात्रों के निष्कासन की वजह छात्रों के द्वारा परिसर के अंदर बैज लगाना बताई गई है

एस०एफ०आई० का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन कहीं न कहीं छात्रों के लोकतांत्रिक अधिकारों के हनन करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहा है और इसके साथ साथ परिसर में न तो कोई विरोध प्रदर्शन की इजाजत विश्वविद्यालय प्रशासन के द्वारा छात्रों को दी गई है  यहां तक कि छात्र अपनी बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी विरोध प्रदर्शन नहीं कर सकते हैं जो कि यह दर्शाता है कि विश्वविद्यालय प्रशासन कहीं न कहीं छात्रों के जनवादी अधिकारों के पक्ष में नहीं है ।

एस०एफ०आई० ने आरोप लगाया कि बीते कुछ दिन पहले जो घटनाक्रम विश्वविद्यालय परिसर में हुआ था जिसमें  ऐबीवीपी  का एक कार्यकर्ता जो गर्ल्स हॉस्टल में तेजधार हथियार लेकर अंदर घुस गया था उस मुद्दे पर अभी तक कोई भी उचित कार्रवाई विश्वविद्यालय प्रशासन के द्वारा नहीं की गई है ।

हालांकि विश्वविद्यालय एस०एफ०आई० इकाई इस घटनाक्रम को लेकर विश्वविद्यालय प्रशासन के साथ मिल चुकी है जिसमें एस०एफ०आई०ने मांग की थी कि गर्ल्स हॉस्टल में तेजधार हथियार ले जाने वाले छात्र के ऊपर जल्द से जल्द कार्रवाई हो परन्तु इस घटनाक्रम को लेकर न तो विश्वविद्यालय प्रशासन के द्वारा कोई कार्रवाई की गई है।

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10 कार्यकर्ताओं के निष्कासन पर ऐबीवीपी का धरना प्रदर्शन,विश्वविद्यालय पर एक तरफा कार्यवाही का लगाया आरोप

ABVP Protest at HPU over suspension of members 2

शिमला– आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद इकाई ने विश्वविद्यालय में पिंक पेटल्स चौक पर धरना प्रदर्शन किया । इकाई सचिव अंकित चंदेल ने जानकारी देते हुए बताया की पिछले कल विश्वविद्यालय प्रशासन की तरफ से एक तनशाही फैसला निकाला गया जिसमें 10 ऐबीवीपी कार्यकर्ताओं को विश्वविद्यालय से निष्कासित कर दिया गया।

गौरतलव है की पिछले 11 जुलाई को विद्यार्थी परिषद ने कैम्पस मे धरना प्रदर्शन किया था जिसके चलते 10 छात्रों का निष्काशन कर दिया है।

ABVP Protest at HPU over suspension of members 3

धरने को संबोधित करते हुए इकाई सचिव अंकित चन्देल ने बताया की एक तरफ जब कर्मचारियों द्वारा कुलपति कार्यालय में नारेबाजी की जाती है तो उन कर्मचारियों क खिलाफ कुलपति साहब की कोई प्रतिक्रिया नही आती, परन्तु जब ऐबीवीपी कैम्प्स में धरना प्रदर्शन करते है तो उन्हें तुरन्त प्रभाव से निष्कासित कर दिया जाता है जोकि सरासर एकतरफा कार्यवाही है।

चन्देल ने कहा कि विश्वविद्यालय अपनी कमियों को छुपाने क लिए तरह-2 के हथकण्डे अपना रहा है। जहाँ अधूरे परिणामों की वजह से प्रदेश भर के छात्र परेशानी में हैं वहीँ प्रशासन अपने मुंह मिया मिठु बनने में कोई कसर नही छोड़ता।

ABVP Protest at HPU over suspension of members

चन्देल ने कहा कि सभी को ज्ञात है विवि में नौ महीने में पीएचडी (P.hD) और एमसीऐ (MCA) में फर्जी तरीके से प्रवेश के मामले सामने आते है, और इन सभी गडवड़ियों के विरोध करने वाले छात्र संगठनों की आवाज को दबाने का प्रयास विश्वविद्यालय प्रशासन् कर रहा है।

धरने क माध्यम से प्रशासन को चेताते हुये परिषद ने मांग उठाई विश्वविद्यालय अपना काम करे न कि छात्र संगठनों के कार्य मे दखल दे। ऐबीवीपी ने चेतावनी दी है कि जल्द से जल्द परिषद कार्यकर्ताओं का निष्कासन् वापिस नही करता है तो प्रदेश स्तरीय आंदोलन करने में कोई गूरेज़ नही होगाI ऐबीवीपी ने साथ ही यूजी UG के सभी परीक्षा परणामों को पूरा करने की मांग भी प्रशासन के सामने रखी है।

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सेब के सर्मथन मुल्य में मात्र 50 पैसे बढ़ौतरी बागवानों से भद्दा मजाकः राठौर

Apple proccurement support price in Himachal PRadesh

शिमला -हिमाचल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने वर्तमान भाजपा सरकार द्वारा सेब के सर्मथन मुल्य में की गई मात्र 50 पैसे की बढ़ौतरी को बागवानों के साथ किया गया भद्दा मजाक करार दिया है।

आज शिमला से जारी प्रेस वयान में कुलदीप सिंह राठौर ने बताया कि वर्तमान समय में जब बागवानों को अपनी फसल तैयार करने के लिए भारी मंहगाई का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि जी.एस.टी के चलते सेब से संबंधित पैकिंग से लेकर फफूंद नाशक दवाईयां एवं अपनी फसलों को मंण्ड़ियों तक पहुॅचाने के लिए किराया भी कई गुणा बढ़ गया है इसके चलते सेब के सर्मथन मुल्य कम से कम 10 रूपये होना चाहिए।

कुलदीप राठौर ने कहा कि सेब इलाकों में बहुत जगह सड़कों की हालत खराब पड़ी है और सेब को मण्ड़ियों तक पहुॅचाने वाले ट्रक व गाड़ियों के मालिक खराव सडकों पर गाडियाॅं भेजने को मना कर रहे हैं इसलिए सरकार को चाहिए कि ख़राब सडकों को जल्दी से जल्दी ठीक करवायें।

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हिमाचल सरकार पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे : कर्मचारी नेता

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शिमला -हिमाचल प्रदेश कर्मचारी महासंघ के पूर्व अध्यक्ष सुरेन्द्र मनकोटिया, पूर्व सयुक्त सचिव सेन राम नेगी,पूर्व प्रेस सचिव हरीश गुलेरिया, गैर शिक्षक महासंघ के महासचिव दीप राम शर्मा ,इंदिरागांधी आयुर्विज्ञान मेडिकल कॉलेज के पूर्व महासचिव आत्मा राम शर्मा ने प्रदेश सरकार द्वारा हिमाचल प्रदेश प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद करने के निर्णय की आलोचना करते हुए इसे कर्मचारी विरोधी बताया है।

कर्मचारी नेताओं का कहना है कि जब जब प्रदेश में भाजपा सरकार सत्ता में आई तब तब प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बंद किया गया,जो कि कर्मचारियों के साथ अन्याय है।

कर्मचारी नेताओं ने जयराम सरकार की आलोचना करते हुए कहा है कि भाजपा कभी भी कर्मचारी हितेषी नही रही है।पूर्व में धूमल सरकार ने भी सत्ता में आते ही इसे बंद किया था अब बर्तमान में जयराम सरकार ने भी ऐसा ही किया है।उनका कहना है कि पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कर्मचारियों के हितों को ध्यान में रख कर इसे खोला था।इसे खोलने का एक ही उद्देश्य था कि जो सरकार के किसी भी गलत फैंसले को चुनौती देने के लिए स्वतंत्र था और उसे जल्द और सस्ता न्याय मिल जाता था।

नेताओं का कहना है कि अब ऐसा नही होगा।किसी भी कर्मचारी को न्याय के लिए उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाना होगा जहां पहले ही हजारों मामले सुनवाई के लिए लंबित पड़े है।

कर्मचारी नेताओं ने मुख्यमंत्री जयराम से आग्रह किया है कि वह इस मामले पर पुनर्विचार कर कर्मचारी हित में प्रशसनिक ट्रिब्यूनल को बहाल करे। इसे उन्हें अपनी किसी भी प्रतिष्ठा का प्रश्न नही बनना चाहिए।

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